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Bhagavad Gita As It Is DAY-23 (5.18-26)

Total questions: 16

Worksheet time: 2hrs 30mins

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Date
1.

विनम्र साधुपुरुष एक विनीत ब्राह्मण, गाय, हाथी, कुत्ता तथा चाण्डाल को समान दृष्टि (समभाव) से क्यों देखते हैं? (5.18)

a)

इसका कारण परमेश्वर से उनका सम्बन्ध है जो सबके हृदय में स्थित है तथा सभी शरीरों में सचेतन है

b)

क्योंकि एक ही आत्मा उन सब भिन्न शरीरों में स्थित है जो हर शरीर की पीड़ा का अनुभव कर सकती है

2.

मानसिक समता वाले व्यक्ति के विषय में भगवान् ने क्या बताया है? (5.19)

a)

आत्म-साक्षात्कार का लक्षण है

b)

जन्म तथा मृत्यु पर, विजय प्राप्त किए हुए मानना चाहिए

c)

बद्धजीव माना जाता है

d)

वैकुण्ठ जाने का अधिकारी हो जाता है

e)

आसक्ति अथवा घृणा से रहित होने के कारण निर्दोष होता है

3.

स्वरूपसिद्ध व्यक्ति के क्या लक्षण होते हैं? (5.20)

a)

वह शरीर और आत्मतत्त्व में कोई अंतर नहीं मानता

b)

वह भलीभाँति जानता है कि मैं यह शरीर ही हूँ

c)

कुछ प्राप्त होने पर अत्यंत प्रसन्न होता है

d)

शरीर की कुछ हानि होने पर तुरंत शोकमग्न होता है

e)

वह ब्रह्म, परमात्मा तथा भगवान् के ज्ञान को जानता है

4.

मुक्त पुरुष भौतिक इन्द्रियसुख की ओर आकृष्ट न होकर, सदैव समाधि में रहकर ______ (5.21)

a)

अत्यंत दुखी रहता है

b)

काम-सुख के बारे में सोचता रहता है

c)

नित्य नवीन कष्टों/अभावों का अनुभव करता है

d)

परब्रह्म में एकाग्रचित्त होने के कारण असीम सुख भोगता है

5.

भौतिक इन्द्रियों के संसर्ग से इतना आनंद मिलता है, ये कृष्णभावनाभावित व्यक्ति भला इसमें क्यों रूचि नहीं लेता, ऐसा उसे क्या मिल जाता है? (5.22)

a)

भौतिक इन्द्रियसुख नाशवान हैं क्योंकि शरीर ही नाशवान है

b)

बुद्धिमान् मुक्तात्मा किसी नाशवान वस्तु में रूचि नहीं रखता

c)

भौतिकसुख के प्रति जितना आसक्त, उतने अधिक दुख

d)

सूकरों-कूकरों का रमणीय सुख हर किसी के भाग्य में कहाँ

6.

भगवान् की प्रेमाभक्ति (आत्मसाक्षात्कार) और इन्द्रियसुख (कामसुख) के साथ साथ चलने में क्या दिक्कत है? (5.21)

a)

महान भक्त श्री यामुनाचार्य ने कहा है कि मैं काम-सुख के विचार पर ही थूकता हूँ और मेरे होंठ अरुचि से सिमट जाते हैं

b)

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति प्रेमाभक्ति में इतना अधिक लीन रहता है कि इन्द्रियसुख में तनिक रूचि नहीं लेता

c)

भौतिकता की दृष्टि में कामसुख ही सर्वोपरि आनन्द है और भौतिकतावादी लोग इसके बिना कोई कार्य कर नहीं सकते

7.

इनमें से किस श्लोक में कहा गया है कि परम सत्य को राम कहा जाता है? (5.22)

a)

ये हि संस्पर्शजा भोगा दु:खयोनय एव ते |

आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः || (5.22)

b)

रमन्ते योगिनोऽनन्ते सत्यानन्दे चिदात्मनि |

इति रामपदेनासौ परं ब्रह्माभिधीयते || (पद्मपुराण)

c)

(SB 5.5.1) नायं देहो देहभाजां नृलोके कष्टान् कामानर्हते विड्भुजां ये |

तपो दिव्यं पुत्रका येन सत्त्वं शुद्धयेद् यस्माद् ब्रह्मसौख्यं त्वनन्तम् ||

8.

आत्म-साक्षात्कार के पथ पर अग्रसर होने के इच्छुक व्यक्ति को कितने प्रकार के भौतिक इन्द्रियों के वेग को रोकने का प्रयत्न करना चाहिए? (5.23)

a)

3

b)

4

c)

5

d)

6

9.

जो मनुष्य इस शरीर को त्यागने के पूर्व इन्द्रियों के वेगों को सहन करने तथा इच्छा एवं क्रोध के वेग को रोकने में समर्थ होता है, उसका क्या परिणाम होता है? (5.23)

a)

वह इस संसार में सुखी रह सकता है

b)

वह गोस्वामी या स्वामी कहलाता है

c)

वह स्वरुपसिद्ध माना जाता है

d)

वह आत्म-साक्षात्कार की अवस्था में सुखी रहता है

10.

ब्रह्मभूत अवस्था को प्राप्त मुक्त पुरुष की क्या स्थिति होती है? (5.24)

a)

सदा बाह्य भौतिक सुख के लिए लालायित रहता है

b)

अन्तःकरण में किसी सुख का अनुभव नहीं करता

c)

बाह्यसुख देने वाली बाह्य क्रियाओं में लिप्त रहता है

d)

अन्तःकरण में जीवन के कार्यकलापों का आनन्द लेता है

11.

कौन लोग ब्रह्मनिर्वाण (मुक्ति) को प्राप्त होते हैं? (5.25)

a)

जो लोग संशय से उत्पन्न होने वाले द्वैत से घिरे हैं

b)

जिनके मन रोजगारपरक साक्षात्कार में रत हैं

c)

जो अन्यों को धोखा देने में सदैव व्यस्त रहते हैं

d)

जो समस्त पापों से रहित हैं

12.

कौन व्यक्ति सभी जीवों के कल्याणकार्य में रत कहा जाएगा? (5.25)

a)

जो व्यक्ति मानव समाज का भौतिक कल्याण करने में ही व्यस्त रहता है

b)

जो पूर्णतया कृष्णभावनाभावित है अतः वह जो भी कर्म करता है सबों के हित को ध्यान में रखकर करता है

13.

समस्त जीवों का कल्याण करने के लिए कृष्णभावनाभावित होने की या कृष्ण को जानने की क्या आवश्यकता है? (5.25)

a)

परमभोक्ता, परमनियन्ता तथा परमसखा कृष्ण को भूल जाना ही मानवता के क्लेशों का कारण है

b)

जीवन-संघर्ष में कठिनाइयों का वास्तविक कारण परमेश्वर से अपने सम्बन्ध की विस्मृति है

c)

शरीर तथा मन की क्षणिक खुशी सन्तोषजनक नहीं होती, अतः बिना कृष्णभावनाभावित हुए कोई कल्याण संभव नहीं

14.

कौन हैं जो क्रोध तथा समस्त भौतिक इच्छाओं से रहित हैं और जिनकी मुक्ति निकट भविष्य में सुनिश्चित है? (5.26)

a)

देवतागण जो भगवान् के प्रशासनिक प्रतिनिधि हैं

b)

तपस्वी जो दीर्घकाल से ध्यान लगाने का प्रयास कर रहे हैं

c)

ऋषि-मुनि जो कठोर परिश्रम से भी इन्द्रियवेग नहीं कर पाते

d)

भगवान् के चरणकमलों की सेवा करके दिव्य आनन्द में लीन भक्त

15.

मछली, कछुवा तथा पक्षी केवल दृष्टि, चिन्तन तथा स्पर्श से अपनी सन्तानों को पालते हैं, इस उदाहरण से भगवान् भक्त को क्या सन्देश दे रहे हैं? (5.26)

a)

भगवद्भक्त, भगवद्धाम से दूर स्थिर रहकर भी भगवान् का चिन्तन करके कृष्णभावनामृत द्वारा उनके धाम पहुँच सकता है

b)

भगवान् या भगवद्धाम कभी नहीं मिलने वाले, बस दूर से ही देखकर या चिंतन द्वारा संतुष्ट रहो जैसे व्रज की गोपियाँ रहीं

16.

कृष्णभावनाभावित जीवन स्वीकार करने पर भी काम, क्रोध बना हुआ है, जब अगली बार ये आप पर आक्रमण करें तो आप क्या करेंगे?

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