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Bhagavad Gita As It Is DAY-16 (3.33-42)

Total questions: 21

Worksheet time: 2hrs 55mins

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Date
1.

कृष्ण की माया के बन्धन से मुक्त होने का क्या उपाय है? (3.33)

a)

केवल सैद्धान्तिक ज्ञान से आत्मा को शरीर से पृथक् जानना

b)

पूर्ण कृष्णभावनाभावित होने से पहले नियत्कर्मों का त्याग

c)

सहसा तथाकथित योगी या कृत्रिम अध्यात्मवादी बन जाना

d)

यथास्थिति में रहकर कृष्णभावनामृत का श्रेष्ठ प्रशिक्षण

2.

ज्ञान की दृष्टि से विद्वान् होने पर भी प्रकृति के गुणों के प्रभाव से मुक्त क्यों नहीं हुआ जा सकता? (3.33)

a)

तथाकथित अध्यात्मवादी भीतर-भीतर पूर्णतया प्रकृति के गुणों के अधीन रहते हैं

b)

भौतिक प्रकृति की दीर्घकालीन संगति के कारण वह बन्धन में रहता है

c)

कृष्णभावनामृत ही बन्धन से छूटने में सहायक होता है, भले कोई अपने नियत्कर्मों के करने में संलग्न क्यों न रहे

3.

इनमें से किस मार्ग के पालन से व्यक्ति भौतिक बन्धन से मुक्त होकर कृष्णभावनामृत के पद पर आसीन हो सकता है? (3.34)

a)

अनियन्त्रित इन्द्रिय-भोग

b)

अनासक्त रहकर यम-नियमों का पालन करना

c)

सभी प्रकार के नियमित इन्द्रिय-भोग के लिए आसक्ति

d)

सदैव कृष्ण की प्रेमाभक्ति में कार्य करते रहने से

e)

कृष्णभावनामृत से विरक्त होने से

4.

इनमें से ठीक वाक्य चुनिए | (3.34)

a)

यौन-सुख मुक्त जीव के लिए भी आवश्यक है

b)

पत्नी के अतिरिक्त सभी स्त्रियों को साली मानना चाहिए

c)

राजमार्ग तक में दुर्घटना की संभावना बनी रहती है

d)

यम-नियमों के नियन्त्रण पर पूर्ण विश्र्वास करना चाहिए

5.

जैसे आध्यात्मिक कर्म गुरु द्वारा कृष्ण की दिव्यसेवा के लिए आदेशित होते हैं, वैसे ही भौतिक दृष्टि से नियतकर्म कैसे निर्धारित होता है? (3.35)

a)

मनोवैज्ञानिक दशा के अनुसार

b)

भौतिक प्रकृति के गुणों के अधीन

c)

किसी प्रमाणिक निर्देशन के पालन द्वारा

d)

देश, परिवार, स्वजनों की इच्छाओं के अनुसार

6.

किस स्थिति में एक क्षत्रिय ब्राह्मण की तरह और एक ब्राह्मण क्षत्रिय की तरह कर्म कर सकता है? (3.35)

a)

जब मनुष्य प्रकृति के गुणों के वशीभूत हो

b)

जब मनुष्य प्रकृति के गुणों को लाँघकर कृष्णभावनामृत में पूर्णतया लीन हो

7.

ब्रह्म में स्थित होने के कारण ही कौन पहले क्षत्रिय थे जो बाद में ब्राह्मण बन गए? (3.35)

a)

विश्र्वामित्र

b)

परशुराम

c)

वशिष्ठ

d)

जमदाग्नि

8.

मनुष्य न चाहते हुए भी पापकर्मों के लिए प्रेरित होता है जैसे कि उसे बलपूर्वक उनमें लगाया जा रहा हो - यह किसने कहा? (3.36)

a)

अर्जुन

b)

कृष्ण

9.

कभी-कभी इच्छा के विरुद्ध भी जीव अनेक प्रकार से पापकर्म करता है, क्यों? (3.36)

a)

मूलतः जीव पाप करना चाहता है

b)

अन्तर्यामी परमात्मा प्रेरित करते हैं

c)

अन्य कारण होते हैं

10.

शाश्र्वत कृष्ण-प्रेम किस की संगति से काम में परिणत हो जाता है? (3.37)

a)

कृष्ण

b)

सतोगुण

c)

रजोगुण

d)

तमोगुण

11.

जीवात्मा के सबसे बड़े शत्रु काम (रजोगुण) को क्रोध (तमोगुण) में न गिरने देकर सतोगुण तक कैसे उठाया जा सकता है? (3.37)

a)

आज तक तक तो कोई ऐसा कर नहीं पाया

b)

रहने तथा कार्य करने की विधियों द्वारा

c)

आध्यात्मिक आसक्ति के द्वारा

12.

इनमें से क्या सही नहीं है? (3.37)

a)

स्वतन्त्रता का दुरूपयोग करके जब जीवात्माएं सेवा को इन्द्रियसुख में बदल देती हैं तो वे काम की चपेट में आ जाती हैं

b)

भगवान् ने इस सृष्टि की रचना जीवात्माओं के लिए इन कामपूर्ण रुचियों की पूर्ति हेतु सुविधा प्रदान करने के निमित्त की

c)

सारी वस्तुओं का उद्गम परब्रह्म है | परन्तु काम का उद्गम परब्रह्म से नहीं हुआ

d)

काम तथा क्रोध कृष्णभावनामृत में प्रयुक्त होने पर हमारे शत्रु न रह कर मित्र बन जाते हैं

13.

जीवात्मा की शुद्ध चेतना के काम की विभिन्न मात्राओं से धूमिल होने के लिए क्या उदाहरण दिए गए हैं? (3.38)

a)

अग्नि धुएँ से

b)

पानी काई से

c)

दर्पण धूल से

d)

लोहा जंग से

e)

भ्रूण गर्भाशय से

14.

धूम्र से आवृत अग्नि वाली चेतना किसके समान है? (3.38)

a)

मनुष्य - कृष्णभावनामृत के शुभारम्भ की अवस्था

b)

वृक्षों के समान - इधर-उधर हिलने में भी असहाय

c)

पशु-पक्षियों के समान

15.

इन्द्रियतृप्ति का भोग करते समय होने वाली कुछ प्रसन्नता की अनुभूति ही इन्द्रियभोक्ता का चरम शत्रु कैसे है? (3.39)

a)

कभी तृप्ति नहीं होती, जैसे ईंधन डालने से अग्नि नहीं बुझती

b)

यह जगत् मैथुन्य-आगार या विषयी-जीवन की हथकड़ियाँ है

c)

इन्द्रियतृप्ति पर आधारित प्रगति मतलब बन्धन अवधि बढाना

d)

काम अज्ञान का प्रतीक है जिससे जीव को इस संसार में रखा जाता है

16.

जीवात्मा के वास्तविक ज्ञान को ढक कर उसे मोहित करने वाला काम कहाँ निवास करता है? (3.40)

a)

इन्द्रियाँ

b)

मन

c)

बुद्धि

d)

परमात्मा

17.

काममय बुद्धि से प्रभावित आत्मा का मिथ्या स्वरूप कैसे गधा या बैल के समान कार्य करता है? (3.40)

a)

देह के विकारों को स्वजन समझता है

b)

जन्मभूमि को पूज्य मानता है

c)

तीर्थस्थलों की यात्रा भक्तों से भेंट के बजाय केवल स्नान के लिए करता है

18.

ज्ञान तथा आत्म-साक्षात्कार का विनाशकर्ता, सबसे पापी शत्रु कौन है जिसका दमन करने का निर्देश भगवान् कृष्ण ने अर्जुन को दिया? (3.41)

a)

काम

b)

ईश्र्वर-प्रेम

c)

इन्द्रियाँ

d)

भौतिक शरीर

19.

गलत वाक्य छाँटिए | (3.41)

a)

ज्ञान का अर्थ है आत्म तथा अनात्म के भेद का बोध

b)

विज्ञान का अर्थ है आत्मा तथा परमात्मा के सम्बन्ध का विशिष्ट ज्ञान

c)

विलम्ब से प्रारम्भ करने वाला भक्ति के विधि-विधानों का पालन करके ईश्र्वरप्रेमी नहीं बन सकता

20.

आत्मा, इन्द्रिय-विषयों, इन्द्रियों, मन तथा बुद्धि में सर्वश्रेष्ठ कौन है? (3.42)

a)

आत्मा

b)

इन्द्रिय

c)

इन्द्रिय-विषय

d)

मन

e)

बुद्धि

21.

इस काम रूपी शत्रु को जीतने के लिये आप क्या दो महत्त्वपूर्ण कदम उठाने वाले हैं?

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