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Worksheetsलखनवी अंदाज
Total questions: 25
Worksheet time: 13mins
लेखक सेकंड क्लास के डिब्बे में जा रहे थे क्योंकि
फर्स्ट क्लास का टिकट मंहगा था।
सेकंड क्लास के डिब्बे में लेखक को एकांत मिल सकता था
सेकंड क्लास में नवाब साहब जा रहे थे।
थर्ड क्लास में जाना लेखक को अपमान लगता था।
डिब्बे की स्तिथि के बारे में प्रवेश से पहले लेखक का अनुमान था कि
डिब्बा एकदम खाली होगा
उसे खिड़की वाली सीट मिलेगी
वह नवाब साहब से मिल सकेगा
डिब्बा बहुत सुविधाजनक होगा।
लेखक के डिब्बे में चढ़ने पर नवाब साहब की क्या प्रतिक्रिया हुई?
नवाब साहब लेखक को देखकर प्रसन्न हो गए
नवाब साहब ने लेखक का स्वागत किया
नवाब साहब को अच्छा नहीं लगा
नवाब साहब ने लेखक को अपमानित किया
सहसा कूद जाने का अर्थ होगा
अचानक कूद जाना
अचानक से प्रवेश करना
डिब्बे में कूदकर चढ़ना
कुछ कह नहीं सकते।
नवाब साहब को लेखक का डिब्बे में आना अच्छा ना लगा,इसका कारण लेखक के अनुसार था कि
नवाब साहब को शर्म महसूस हो रही थी क्योंकि लेखक ने उन्हें खीरा खाते देख लिया था।
शायद नवाब साहब भी किसी कहानी के बारे में सोच रहे हैं।
इनमें से कोई सही नहीं है
ये दोनों ही सही है।
लखनऊ स्टेशन पर खीरा बेचने वाले क्या जानते थे?
ग्राहकों को कैसे लूटा जाता है।
जीरा मिला नमक और पिसी हुई लाल मिर्च की पुड़िया भी दी जाती है।
कि नवाब साहब बहुत खीरा खाते हैं
के नहीं सकते कि क्या जानते थे।
नवाब साहब गाड़ी की खिड़की से बाहर देखकर स्थिति पर गौर करते रहे उसके बाद उन्होंने लेखक से पूछा_
उसका परिचय
जनाब खीरे का शौक फरमाएंगे
सेकंड क्लास के डिब्बे में क्यों आए
मेरी सामने वाली बर्थ पर बैठने की हिम्मत कैसे हुई?
नवाब साहब ने फिर एक पल खिड़की के बाहर देखकर गौर किया और तब उन्होंने नीचे बताई गई बातों में से क्या नहीं किया?
खीरो के नीचे रखा तौलिया झाड़कर सामने बिछा लिया
खीरों को बहुत एहतियात से छीलकर सजाया।
चाकू से खीरे काटे और गोदकर झाग निकाला
सीट के नीचे से लोटा उठाया और बाहर चले गए।
नवाब साहब ने बहुत करीने से खीरे की फांकों पर
काला नमक और लाल मिर्च की सुर्खी बुरक दी।
जीरा मिला नमक और लाल मिर्च की सुर्खी बुरक दी।
हल्दी और काली मिर्च बुरक दी।
घर से लाया हुआ चूरन बुरक दिया।
नवाब साहब ने एक बार फिर लेखक की ओर देखकर कहा
वल्लाह,शौक कीजिए,लखनऊ का बालम खीरा है।
आप अभी तक मेरी सामने की सीट से नहीं उठे
आप अपने बारे में कुछ बताते क्यों नहीं?
जिस गाड़ी मै बैठे हैं उसका नाम बता दीजिए।
नवाब साहब ने खीरे की फांकों को खिड़की के बाहर फेंकने से पहले
खीरे की एक फांक उठाकर होठों तक ले गए।
फांक को सूंघा।
तब मुंह में भर आए पानी के घूंट को पीकर फांकों को खिड़की से बाहर छोड़ते गए
ये सभी।
खीरे को सामने कटा हुआ देखकर भी लेखक ने खाने से मना कर दिया क्योंकि
उसे खीरा खाना पसंद नहीं था
वह पहले खीरा खाने से मना कर चुका था
नवाब साहब ने साफ सफाई से खीरा नहीं काटा था।
कुछ कह नहीं सकते।
नवाब साहब की गुलाबी आंखों में कौन सा गर्व चमक रहा था
नवाब साहब खीरे नीचे फेंक कर अपनी खानदानी रईसी का तरीका दिखा रहे थे।
नवाब केवल खीरे की गंध लेकर ही अपना पेट भर लेते हैं
नवाब सामान्य आदमी की तरह खीरा नहीं खाते
ये सभी।
नवाब साहब ने भरे पेट की डकार सुनाकर लेखक की ओर देखकर कहा
देखा खीरा ऐसे खाया जाता है
खीरा लज़ीज़ होता है लेकिन होता है सकील,नामुराद मेदे पर बोझ डाल देता है
आपकी वजह से मैंने खीरा नहीं खाया मैंने
देख लो नवाब ऐसे खीरा खाते हैं।
ज्ञान चक्षु खुलने पर लेखक सोचने लगा कि
यही है खीरा खाने का असली तरीका।
यदि खीरे की सुगंध और स्वाद की कल्पना से पेट भर जाने से डकार आ सकता है तो बिना विचार,घटना और पात्रों के लेखक की इच्छा मातृ से नई कहानी क्यों नहीं बन सकती
लखनऊ के नवाबों का खीरा खाने का तरीका वह भी अपनाएगा।
अब कभी भी सेकंड क्लास के डिब्बे में बैठकर यात्रा नहीं करूंगा,सीट मिलने पर भी बैठूंगा नहीं।
नवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल के कारण
बहुत खुशी का अनुभव करने लगे।
थककर लेट गए।
परेशान होने लगे थे
डकार लेने लगे थे।
इस पाठ के लेखक का नाम है
रामवृक्ष बेनपुरी
स्वयं प्रकाश
यशपाल
सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
सकील का अर्थ होगा
हल्का
भारी
स्वादिष्ट
भ्रम
नवाब साहब ने खीरे की फांकों क्या किया?
खिड़की से बाहर फेंक दिया
लेखक को दे दिया
अजय को दे दिया
इनमें से कोई नहीं
लेखक ने ट्रेन में सेकंड क्लास का टिकट क्यों लिया था?
आराम से यात्रा करने के लिए
अमीरी दिखाने के लिए
नई कहानी के बारे में सोचने के लिए
इनमें से कोई नहीं
लखनवी अंदाज नामक पाठ में किस पर व्यंग किया गया है?
सामान्य वर्ग पर
गरीब जनता पर
सामंत वर्ग पर
उपरोक्त में से कोई नहीं
'सफेदपोश' शब्द का क्या अर्थ है?
भद्र व्यक्ति
सफेद कपड़ा
व्यवसाय
उपरोक्त में से कोई नहीं
डिब्बे की स्तिथि के बारे में प्रवेश से पहले लेखक का अनुमान था कि
डिब्बा एकदम खाली होगा
उसे खिड़की वाली सीट मिलेगी
वह नवाब साहब से मिल सकेगा
डिब्बा बहुत सुविधाजनक होगा।
