NEW
Font size
Worksheetsभगवान के डाकिए
Total questions: 8
Worksheet time: 5mins
भगवान के डाकिए’ के रचयिता कौन हैं ?
हरिशंकर परसाई
भगवती चरण वर्मा
रामदरश मिश्र
रामधारी सिंह ‘दिनकर’
बादल और पक्षियों के लाए संदेश को कौन पढ़ सकते हैं ?
संसार में रहने वाले सभी लोग
सभी बुद्धिमान व्यक्ति
सभी जीव जंतु
पेड़, पौधे, सरोवर-सरिताएँ, समुद्र व पर्वत यानी प्रकृति
भगवान के डाकिए इस संसार को क्या संदेश देना चाहते हैं ?
विश्वबंधुत्व का
भेद-भाव न करने का
निरंतर आगे बढ़ने का
आपसी प्रेम का
पक्षी और बादल,ये भगवान के डाकिए हैं,
जो एक महादेश से दूसरे महादेश को जाते हैं।
हम तो समझ नहीं पाते हैं
मगर उनकी लाई चिट्ठियाँ
पेड़, पौधे, पानी और पहाड़ बाँचते हैं।
*उपरोक्त पंक्तियों का सारांश हो सकता है -
भगवान के डाकिए विश्व बंधुत्व की बात करते हैं , और हमें भी यही सिखाते हैं
भगवान के डाकिए विश्व बंधुत्व की बात नहीं करते हैं , और हमें भी यही सिखाते हैं की पानी और बादल अपने-अपने देश की शान हैं
भगवान के डाकिए सत्यता की बात करते हैं , क्यों कि पक्षी और बादल झूठ नहीं बोलते
भगवान के डाकिए विश्व बंधुत्व की बात करते हैं , क्यों कि ज़माना ख़राब है, और हम इस बात से कोई ताल्लुकात नहीं रखते हैं
"सौरभ" का पर्यायवाची नहीं है -
प्रसंग
खुशबू
महक
सुगंध
कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए क्यों कहा है ?
* कौन-सा वाक्य वर्तनी की दृष्टि से ग़लत नहीं है ?
क्यों कि पक्षी एक देश से दुसरे देश तक विश्व -बंधुत्व की भावना को भेजने का कार्य करते हैं |
क्यों की पक्षी एक देश से दूसरे देश तक विश्व -बंधुत्व की भावना को भेजने का कार्य करते हैं |
क्यों कि पक्षी एक देश से दूसरे देश तक विश्व -बधुत्व की भावना को भेजने का कार्य करते हैं |
क्यों कि पक्षी एक देश से दूसरे देश तक विश्व -बंधुत्व की भावना को भेजने का कार्य करते हैं |
पंक्तियाँ पूर्ण कीजिए-
* ................................................ पंक्षियों की पांखों पर तिरता हैं |
वह पवन छटा बिखेरते और हवा में तैरते हुए
वह आसमान मिट्टी को धुलकर दूत बनाते हुए
वह सौरभ हवा में तैरते हुए
कालिदास का मेघदूत बादल हवा में तैरते हुए
उलटे क्रम में ये व्याकरण के विषय दिए गए हैं |
क्रिया, विशेषण, सर्वनाम, संज्ञा
पक्षी और बादल ये दोनों संज्ञा शब्द हैं ,सोचिए यदि ये सर्वनाम होते तो , फिर क्रमशः सर्वनाम क्या होते ?
संज्ञा
सर्वनाम
क्रिया
विशेषण
