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Worksheetsमातृभूमि का मान
Total questions: 38
Worksheet time: 19mins
राव हेमू के बारे में सही कथन-
हाड़ा वंश के थे और किसी की गुलामी स्वीकार नहीं करना चाहते थे
महाराणा लाखा के मित्र थे
मेवाड़ के शासक थे
उन्होंने महाराणा लाखा को नकली गढ़ बनाने का सुझाव दिया
पाठ के आधार पर हाड़ाओं के विषय में गलत विकल्प चुनिए -
वीरता में मुट्ठी भर हाड़ा भी बड़ी से बड़ी सेना पर भारी पड़ते थे l
युद्ध में वे यम से भी नहीं डरते थे l
हाड़ाओं ने सिसोदिया की गुलामी स्वीकार कर ली थी l
हाड़ा वंश किसी की गुलामी स्वीकार नहीं करना चाहता था l
जिनकी खाल मोटी होती है उनके लिए किसी भी बात में कोई भी अपयश, कलंक या अपमान का कारण नहीं होता प्रस्तुत कथन के वक्ता हैं -
महाराणा लाखा
अभय सिंह
राव हेमू
वीर सिंह
प्रस्तुत एकांकी का क्या संदेश है -
अपनी मातृभूमि के मान के लिए तन- मन न्योछावर कर देना चाहिए
निज मान से श्रेष्ठ है देश का मान
आपसी एकता से ही हम देश की रक्षा कर सकते हैं
उपर्युक्त सभी
बूंदी आप जैसे पुत्रों को पाकर फूली नहीं समाती -
प्रस्तुत कथन किसके लिए कहा गया है -
सेनापति अभय सिंह के लिए
महाराणा लाखा के लिए
वीर सिंह के साथियों के लिए
राव हेमू के लिए
वीर सिंह के चरित्र के विषय में गलत विकल्प चुनिए -
वह सिसोदिया वंश का था
अपने नाम के अनुसार वह वीर था
खेल - खेल में भी वह अपने देश का अपमान नहीं सह सकता था
उसने नकली दुर्ग पर भी हाड़ा का ध्वज फहराने की प्रतिज्ञा ली थी
1.बूंदी के शासक कौन थे ?
राव हेमू
वीर सिंह
अभय सिंह
2. महाराणा लाखा कौन थे ?
मेवाड़ के सैनिक
मेवाड़ के शासक
मेवाड़ के सेनापति
3.
मेवाड़ के सेनापति अभय सिंह राव हेमू के पास कौन सा प्रस्ताव लेकर आए ?
मेवाड़ से मित्रता बढ़ाने का
मेवाड़ की सहायता करने का
मेवाड़ की अधीनता स्वीकार करने का
4. अभय सिंह के अनुसार बूंदी राज्य सदा से मेवाड़ के----------- रहा है I
अधीन आश्रित विरुद्ध
विरुद्ध
आश्रित
5. राव हेमू के अनुसार प्रेम व भाईचारे रूपी माला को माला को तोड़ने का श्री गणेश------ ने किया है I
वीर सिंह ने
महाराणा लाखा ने
चारणी ने
राव हेमु और महाराणा लाखा के बीच युद्ध कहाँ हुआ था ?
मेवाड़
चित्तौड़
बूंदी
नीमरा के मैदान में
अभय सिंह बुंदिगढ किसका प्रस्थाव लेकर राव हेमु के पास आए थे
बप्पा रावल
महाराणा लाखा
वीरवर हम्मीर
वीर सिंह
वीर सिंह की जन्मभूमि थी -
चित्तौड़
बूंदी
मेवाड़
बूंदी दुर्ग
इस एकांकी का मुख्य पात्र है ?
अभय सिंह
वीर सिंह
महाराणा लाखा
चारणी
वीर सिंह के बलिदान ने मेवाड़ और बूंदी राज्य के बाँच में -
मित्रता का संबंध बना दिया
दुश्मनी पैदा कर दी
दुश्मनी को और बढ़ा दिया
दरार पैदा कर ली
बूंदी का नकली दुर्ग बनाकर उसे विध्वंस करने का उपाय किसने दिया ?
अभय सिंह
चारणी
महाराणा लाखा
वीर सिंह का साथी
धन्ना सेठ कहाँ रहते थे ?
कुंदन नगर
कुंदनपुर
कुंज का अर्थ है-
बगीचा
मैदान
भूखे कुत्ते का पेट ----से लगा था।
पीठ
कमर
-------के कारण उसकी गर्दन गिर जाती थी ?
सबलता
दुर्बलता
सेठ ने कहाँ रात बिताई ?
मंदिर के चबूतरे पर
धर्मशाला के चबूतरे पर
सेठानी दिया जलाने के लिए कहाँ आयी ?
दहलीज पर
दालान में
सेठानी ने अपने पति के लिए कितनी रोटियां बनाईं?
आठ
दो
बीस
चार
किस गाँव में "धन्ना सेठ" रहते थे ?
कुंदनपुर
रामपुर
दुबई
चिरगांव
सेठ ने अंतिम ___ भी ___ को खिला दी I
रोटी, श्वान
चावल, गाय
रोटी, बिल्ली
चावल, सांड
मूक का अर्थ क्या है?
जो देख नहीं सकता
जो बोल नहीं सकता
जो सुन नहीं सकता
जो चल नहीं सकता
सेठ क्या बेचने आया था?
वस्त्र
खाना
यज्ञ
महायज्ञ
धन्ना सेठ की पत्नी न यज्ञ बेचने आए सेठ क सामने क्या शर्त रखी?
वो उनके पैरों में गिरकर उनसे धन्ना सेठ की पत्नी से यज्ञ खरीने क लिए कहें
वो अपना महायज्ञ बेचें तभी वो खरीदेंगी
वो उनसे उनका यज्ञ बहुत काम दाम में खरीदेंगी
इनमे से कोई नहीं
क्रय-विक्रय क क्या अर्थ है ?
टोल-मोल
लड़ाई-झगड़ा
लेन-देन
इनमें से कोई नहीं
धनी सेठ का स्वभाव कैसा था?
वह बहुत कठोर ह्रदय के थे
वह अत्यंत विनम्र और उदार थे
घमंडी थे
इनमें से कोई नहीं
जब बहुत आर्थिक तंगी हुई तब सेठानी ने सेठ को क्या कहा?
घर बेचने को कहा
गहने बेचने को कहा
यज्ञ बेचने को कहा
सेठ के एक रोटी खिलाने के बाद कुत्ते पर क्या असर हुआ?
वह मुंह उठाकर सेठ की ओर देखने लगा
उसकी आंखों में कृतज्ञता थी
वह एकदम से चलने लगा
वह लड़खड़ा के जमीन पर गिर गया
रोटी खिलाने से पहले कुत्ते की स्थिति कैसी थी?
वह बहुत फुर्तीला था
वह मरणासन्न था
वह सेठ के ऊपर भौंकने लगा
इनमें से कोई नहीं
धनी सेठ कुंदनपुर कैसे गए ?
पैदल
बैलगाड़ी से
घोड़े पर
बाइक पर
धन्ना सेठ की पत्नी के बारे में क्या अफवाह थी?
वह तीनों लोकों की बातें जान लेती थी।
वह बहुत अच्छा खाना बनाती थी।
वह बहुत शांत स्वभाव की थी।
वह बहुत खडूस थी।
सेठ कब कुंदनपुर पहुंचे?
दोपहर में
सुबह
दीया जले
बड़े तड़के
सेठ ने अपना यज्ञ क्यों नहीं बेचा?
उनको मूल्य बहुत कम मिला
धन्ना सेठ उनका मजाक उड़ाने लगे
मानवोचित कर्तव्य का मूल लेना उन्हें उचित ना लगा
सेठानी ने यज्ञ बेचने में बाधा डाल दी
