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WorksheetsRevision 1( अध्याय 16, 17)
Total questions: 31
Worksheet time: 24mins
कृप्या यहाँ पर अपनी आयु लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपना फोन नो. लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपना नाम लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपना पता लिखे ?
श्लोक संख्या 17.6 के अनुसार कठोर तपस्या और व्रत जिनका शास्त्रों में उल्लेख नहीं है किस प्रकार की तपस्या है ?
तमोगुणी
आसुरी
फलहीन
उपरोक्त सभी
जूठा भोजन उसी अवस्था में ग्रहण किया जा सकता है , जब वह उस भोजन का अंश हो जो भगवान को अर्पित किया जा चुका हो या किसी ………….. द्वारा ग्रहण क्या जा चुका हो ?
देवता
रिश्तेदार
साधु पुरुष
उपरोक्त सभी
आध्यात्मिक प्रगति के लिए किसी विशेष मार्ग का पालन श्रद्धा पूर्वक करने से पूर्व साधक किस वस्तु पर ध्यान देना चाहिए ?
यहाँ तक कि उस मार्ग का पालन बहुत सारे व्यक्ति करते हों
यह की वह मार्ग पालन करने में सहज हो
यह की मार्ग शास्त्र के अनुसार हो
उपरोक्त सभी
प्रकृति के दूषित गुण हृदय तक फैल जाते हैं, अतएव किसी भी गुण विशेष के संपर्क में रह कर हृदय जिस स्थिति में होता है, उसी के अनुसार ………….स्थापित होती है?
प्रकृति
चेतना
अनर्थ
श्रद्धा
अगर प्रकृति के तीन गुणो में बंधे व्यक्ति देवताओं, यक्षों, राक्षसों व भूत प्रेतों की पूजा करते हैं तो फिर वे भगवान कृष्ण/ विष्णु की पूजा/भक्ति कैसे कर सकते हैं ?
देवताओं की कृपा से
उपरोक्त सभी
शुद्ध भक्तों की कृपा व संगति से
पूर्वजों की कृपा से
श्लोक 17.8 के अनुसार कितने घंटे पूर्व बना कोई भी भोजन ( भगवान् को अर्पित प्रसादम् को छोड़कर) तामसी माना जाता है ?
5
4
3
6
आत्म साक्षात्कार के लिए शास्त्रों में विभिन्न मार्गों का वर्णन किया गया है।निम्नलिखित में से कौन से मार्ग में व्यक्ति ने काम, क्रोध और लोभ में रह कर भी पूर्णता प्राप्त कर सकता है।?
भक्ति मार्ग
योग मार्ग
ज्ञान मार्ग
उपरोक्त में से कोई नहीं
श्लोक संख्या 18. देश के अनुसार जो व्यक्ति शास्त्रों के आदेशों की अवहेलना करता है और मनमाने ढंग से कार्य करता है वैसे व्यक्ति को सुख की प्राप्ति नहीं होती। ऐसा कैसे संभव है क्योंकि व्यक्ति संसार के विभिन्न प्रकार के सुखों के लिए ही तो मनमाने ढंग से कार्य करता है?
क्योंकि भौतिक सुखों को प्राप्त करने पर भी जीवात्मा सूखी नहीं हो पाती
क्योंकि शास्त्रों के अनुसार कार्य न करने से जीवात्मा को किसी भी प्रकार के सुख की प्राप्ति नहीं होती
उपरोक्त दोनों
उपरोक्त दोनों में से कोई नहीं
उस व्यक्ति के प्रयास की गति कैसी होती है जो ईश्वर में विश्वास तो रखे किन्तु ईश्वर की सेवा न करे ?
ईश्वर में विश्वास करने के कारण ऐसा व्यक्ति उच्च लोगों को जाता है
ईश्वर में विश्वास करने के कारण ऐसा व्यक्ति भक्ति मार्ग में आगे बढ़ता है
ऐसे व्यक्ति के प्रयास भी अंततोगत्वा निष्फल हो जाते हैं
एक और तीन
श्लोक संख्या 16.23 के अनुसार शास्त्रों की अवहेलना करने वाले व्यक्ति को न तो सिद्धि ,न तो सुख और न ही परम गति प्राप्त होती है।इस श्लोक से पूर्व भी निम्नलिखित में से कौन से श्लोक में भगवान कृष्ण इसी प्रकार का उपदेश किया है?
7.34
9.12
10.11
8.23
वेदों की रचना निम्नलिखित में से किसने की है?
ब्रह्मा जी
भगवान विष्णु
वेदव्यास
ऋषियों
इस जन्म में संग्रह की हुई सम्पति (भक्ति या मिथ्या अंहकार ) हमारे अगले जीवन की तैयारी है ये कौन से श्लोक संख्या में कहा गया है ?
16.16
16.17
16.19
16.18
मृत्यु के बाद जीव को माता के गर्भ में रखा जाता है जहाँ उच्च शक्ति के नरीक्षण में उसे विशेष प्रकार का शरीर प्राप्त होता है यह श्रीमद भागवतम के कौन से स्कन्ध में कहा गया है ?
पहले स्कंध
द्वितीय स्कंध
तृतीय स्कंध
चतुर्थ स्कंध
देहात्मबुधि से निकलने के लिए भगवान गीता में किस विधि का पालन करने की सलाह दे रहे हैं ?
एकांत में रहकर परमात्मा का ध्यान करने की
कृष्ण किसी भी तरीके को अपनाने का सुझाव दे रहे हैं लेकिन कठोरता से पालन करने के लिए कह रहे हैं
अनासक्त रहकर निर्वेश का ध्यान करने की
भक्ति में लगकर विधि विधानो का पालन करने की
परमेश्र्वर किसी से घृणा नहीं करते. श्लोक 16.20 के अनुसार ये हमें _______ से पता चलता है?
उपनिषदों से
पुराणों से
वेद से
वेदान्तसूत्र
नरक के कितने द्वार का वर्णन श्लोक 16.21 में हुआ है?
6
8
3
2
मृत्युरूपी भवबंधन से निकलने की सर्वोत्कृष्ट विधि क्या है?
परोपकारी कार्य
निराकार ब्रह्म का ध्यान
योग अभ्यास
भगवद्भक्ति
गीता के ______अध्याय में कहा है वेदों के सारे विधि-विधान कृष्ण को जानने के लिए हैं ?
14
13
16
15
________आसुरी जीवन के कारण स्वरूप हैं ?
तमो तथा रजो गुण
सतोगुण
शुद्ध सतोगुण
प्रकृति के सभी प्रकार के गुण
निम्नलिखित में से कौन से श्लोक में भगवान कृष्ण शास्त्रों में वर्णित विधि के पालन पर बल देते हैं ?
16.16
16.17
16.19
16.18
श्लोक संख्या 16.19 के अनुसार आसुरी व्यक्तियों को कौन विभिन्न आसुरी योनियों में डालता है ?
यम दूत
माया शक्ति
भगवान कृष्ण
यमराज
लोग संख्या 16.21 में भगवान कृष्ण काम, क्रोध और लोभ को नरक के तीन द्वार बतलाते है।इससे पूर्व निम्नलिखित कौन से श्लोक में है भगवान कृष्ण इसी प्रकार का उपदेश करते हैं ?
2.62
2.63
3.37
उपरोक्त सभी
श्लोक संख्या 16.17 में भगवान कृष्ण निम्नलिखित में से कौन से अनर्थ का उल्लेख नहीं किया हैं ?
काम
दर्प
बल
लोभ
दैवी स्वभाव के लोग इस जगत के प्रति क्या भाव रखते हैं ?
यह संसार मिथ्या है
यह संसार अस्थाई है
यह संसार शून्य है
उपरोक्त सभी
निम्नलिखित में से कौन से श्लोक में भगवान कृष्ण नाभिकीय अस्त्रों केआविष्कार की अप्रत्यक्ष सूचना देते हैं ?
15.09
15.10
15.11
15.12
भगवान कृष्ण आसुरी गुणो का वर्णन करते हुए कहते हैं की असुरी व्यक्ति सदैव अधिक से अधिक धन संचय करने की योजनाएँ बनाता रहता है ।क्या अधिक धन कमाना असुरी गुण है ?
हाँ, क्यूँकि धन से बुद्धि का नाश होता है
नहीं , भगवान कृष्ण तो यहाँ आवश्यकता पूरी होने के उपरांत धन से संतुष्टि के विषय में वर्णन कर रहे हैं
नहीं, क्यूँकि धन ना हो तो जीव का पालन पोषण भी ना हो
हाँ, क्यूँकि भागवतम के अनुसार कृष्ण केवल अकिंचन भक्तों को ही मिलते हैं
कृष्णाभवनामृत हेतु दिया गया दान____ की श्रेणी में आता है?
सतोगुण
रजोगुण
तमोगुण
ये एक मिश्रीत दान है जो सभी श्रेणी का हिस्सा है
