Worksheets75.श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_18.48 -18.78
Total questions: 32
Worksheet time: 26mins
सर्वोच्च सिद्ध अवस्था कौन प्राप्त कर सकता है ?
जो आत्मसयंमी व् अनासक्त हो
जो समस्त भौतिक भोगो की प्रवाह नहीं करता हो
सन्यास के द्वारा
उपरोक्त सभी
इनमे से कोई नहीं
सच्चा सन्यासी कौन है ?
जो अपने आप को परमेश्वर का अंश मानता हो
जो अपने कार्य के फल को भोगना का कोई अधिकार नहीं रखता हो
जो कृष्ण भावनामृत में स्थित होकर कर्म करता हो
उपरोक्त सभी
"यस्त्वात्मरतिरेव स्यात " इसकी पुष्टि कौन से अध्याय में की गयी है ?
चोथे अध्याय
तीसरे अध्याय
पांचवे अध्याय
नौवे अध्याय
वास्तविक सिद्धि क्या है ?
शुद्ध कृष्णभावनामृत प्राप्त करने में है
ब्रहम में समा जाना
इनमे से कोई नहीं
(1) और (2)
कृप्या यहाँ पर नाम लिखे ?
कृप्या यहाँ पर पता लिखे ?
कृप्या यहाँ पर फोन नो लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपनी आयु लिखे ?
श्लोक संख्या 18.49 के तात्पर्य के अनुसार सच्चा वैराग्य/सन्यास क्या है ?
मनुष्य अपने को परमेश्वर का अंश मानकर स्वयं उसके फल को न भोगे और परमेश्वर को अर्पित कर दे
घर गृहस्थी का त्याग कर वृंदावन आदि स्थानों में रहे
अपने को कर्ता भाव से मुक्त कर ले
उपरोक्त सभी
योगारूढ़ की मनोदशा अथवा योग की सिद्धअवस्था व्यक्ति कैसे प्राप्त कर सकता है ?
योगाभ्यास करके
अपने को भगवान अंश मान कर संसार में भक्ति से प्राप्त दिव्य सुख के अलावा कोई भौतिक सुख का आनंद न ले
ब्रह्मचर्य का पालन करके
उपरोक्त सभी
भगवत गीता के अनुसार कौन व्यक्ति शांति प्राप्त कर सकता है ?
जो इच्छाओं की पूर्ति के ले
जो भौतिक इच्छाओं के प्रकट होने पर भी उन से विचलित न हो
जिसकी इच्छाएँ अपने आप पूरी होती जाएँ
2 और 3
क्या शुद्ध भक्ति प्राप्त करने से पहले ब्रह्मभूत अवस्था प्राप्त करना आवश्यक है ?
नहीं, ब्रह्मभूत अवस्था तो ब्रह्मवादियों को है
हाँ, बिना इस अवस्था को प्राप्त हुए भक्ति करने पर भी साधक को कोई लाभ नहीं होगा
नहीं, अगर भक्त ब्रह्मभूत अवस्था को प्राप्त कर ले तो वह ब्रह्मवादी बन जाएगा
हाँ, किंतु एक भक्त स्वतः ही इस अवस्था को भक्ति मार्ग में प्रगति करने पर प्राप्त कर लेता है
परम ज्ञान होने पर सेव्य तथा सेवक में कोई अंतर नहीं रहता किंतु फिर भी उच्चतर आध्यात्मिक दृष्टि से ……….............. तो रहता ही है ।
अंतर
अभेद
कैवल्य
प्रेम
18वे अध्याय में भगवान कौन से प्रसिद्ध श्लोक में बोलते हैं कि केवल भक्त ही उन्हें जान सकते हैं ?
18.35
18.45
18.55
18.65
भगवान कृष्ण को जानने और उन्हें तत्व से जानने में क्या अंतर है ?
कोई अंतर नहीं है
जानना ज्ञान तक सीमित है किंतु तत्व से जानना विज्ञान है
ज्ञान में अनुभूति नहीं होती किंतु तत्व से जानने में अनुभूति होती है
2 और 3
भगवान कृष्ण के भक्त समस्त कार्यों में प्रव्रत रहकर भी कर्म चक्कर से छूटकर भगवान के धाम को कैसे प्राप्त कर लेते हैं ?
क्यूँकि ऐसे शुद्ध भक्त भगवान के निर्देशन में कार्य करते हैं
भगवान की कृपा के कारण
भगवान के संरक्षण में रहने के कारण
उपरोक्त सभी
भगवान कृष्ण श्लोक संख्या 18.47 में उपदेश करते हैं की प्रत्येक व्यक्ति को कृष्ण के संरक्षण में रहकर कार्य करना चाहिए ।ऐसा संरक्षण भगवान कृष्ण का हमारे व्यक्तिगत रूप से साथ में ना होने की स्तिथि में कैसे प्राप्त हो सकता है ?
प्रामाणिक गुरु के निर्देशन में उनसे निर्देश प्राप्त कर के
भगवान कृष्ण का ध्यान कर के और उनसे ध्यान में आदेश प्राप्त कर के
वेदों को पढ़कर
उपरोक्त सभी
भगवान कृष्ण कौन से श्लोक में उपदेश करते हैं की जो व्यक्ति भगवान कृष्ण के उपदेश के अनुसार कार्य नहीं करेगा वह विनष्ट हो जाएगा ?
18.57
18.58
18.59
18.60
श्लोक संख्या 18.58 और 18.59 के अनुसार कौन से प्रमुख कारण से व्यक्ति भगवान कृष्ण के उपदेश का पालन नहीं करता ?
काम
मिथ्या अहंकार
क्रोध
मोह
श्लोक संख्या 18.59 के अनुसार हृदय में स्थित परमात्मा सबको अपनी माया से भरमा रहे हैं । भगवान इस प्रकार से जीवों को क्यूँ भरमते हैं ?
क्यूँकि जीवों की इस भौतिक जगत में सुख प्राप्त करने की इच्छा है जिसे परमात्मा पूरी करने की स्वतंत्रता देते हैं
क्यूँकि परमात्मा जीव की इच्छा के अनुसार उसे वैसी ही प्रेरणा देते हैं
क्यूँकि परमात्मा/ भगवान की माया शक्ति भगवान से बहिर्मुख जीवों को दंड देती है जिस से वह भगवान की शरण में जाने के लिए तत्पर हों
उपरोक्त सभी
भगवत गीता के कौन से श्लोक से इस बात की पुष्टि होती है की भगवान कृष्ण कभी भी किसी जीव की सीमित स्वतंत्रता में कभी हस्तक्षेप नहीं करते ?
18.60
18.61
18.62
18.63
भगवान कृष्ण ने गीता के 18वे अध्याय में ब्रह्म ज्ञान और परमात्मा ज्ञान देने के बाद अर्जुन को अपना परम आदेश क्यूँ दिया ?
क्यूँकि अर्जुन भगवान का भाई था
क्यूँकि अर्जुन भगवान का अत्यंत प्रिय मित्र था
उपरोक्त दोनो
उपरोक्त में से कोई नहीं
श्लोक संख्या 18.64 में इंगित भगवान कृष्ण का परम आदेश क्या है ?
भगवान कृष्ण का भक्त बनना
भगवान कृष्ण का चिंतन, पूजा और उन्हें नमस्कार करना
सारे धर्मों का त्याग करके भगवान की शरण में जाना
उपरोक्त सभी
गीता के अनुसार मनुष्य को अपने पापों के फल से मुक्त होने के लिए क्या करना चाहिए ?
शास्त्रों के अनुसार प्रायश्चित करना चाहिए
पाप का फल भगवान को अर्पित कर देना चाहिए
भगवान कृष्ण की शरण में बिना संशय/भय के जाना चाहिए और पाप कर्म नहीं करे चाहिए
उपरोक्त सभी
भगवान गीता के अनुसार इस के महान उपदेश का वर्णन /प्रचार कौन से प्रकार के मनुष्यों को नहीं करना चाहिए ?
जो आत्म संयमी ना हो
जो एकनिष्ठ न हो
जो भगवान कृष्ण से द्वेष रखता हो
जो भक्त न हो
उपरोक्त सभी
श्लोक संख्या 18.68 के अनुसार कौन व्यक्ति भगवान कृष्ण की शुद्ध भक्ति प्राप्त कर के अवश्य भगवान कृष्ण को प्राप्त करता है ?
जो मरते समय भगवान कृष्ण का ध्यान करता है
जो भगवान की भक्ति में डूब जाता है
जो गीता के उपदेश का प्रचार भक्तों को करता है
उपरोक्त सभी
कौन सा सेवक सब कालों में भगवान कृष्ण को सबसे प्रिय है ?
जो गीता के परम रहस्य को भक्तों को बताता है
जो अश्रद्धालुओं और द्वेषीयों को भी गीता का प्रचार करता है
जो एकनिष्ठ भक्ति में स्थित है
उपरोक्त सभी
जो व्यक्ति श्रधा और द्वेष रहित होकर गीता के उपदेश को सुनता है उसे क्या फल प्राप्त होता है ?
वे सारे पापों से मुक्त हो जाते हैं
वे पुण्यतमों के लोक को प्राप्त करते हैं
उपरोक्त दोनों
उपरोक्त में से कोई नहीं
भगवत गीता का द्वेष रहित होकर अध्ययन करने का क्या फल है ?
वह व्यक्ति भगवत धाम प्राप्त करता है
वह व्यक्ति भौम वृंदावन धाम में जन्म लेता है
वह व्यक्ति भगवान कृष्ण की पूजा करने लगता है
उपरोक्त सभी
भगवत गीता का उपदेश सुन ने का अर्जुन पर क्या प्रभाव हुआ ?
अर्जुन का मोह नष्ट हो गया
अर्जुन की स्मरण शक्ति उसे वापिस मिल गयी
अर्जुन भगवान के उपदेश के अनुसार कार्य करने को उद्यत हो गया
उपरोक्त सभी
संजय के आराध्य भगवान कौन हैं ?
व्यास
धृतराष्ट्र
श्याम सुंदर कृष्ण
भगवान कृष्ण का विश्वरूप
धृतराष्ट्र अपने पुत्रों के विजय के बारे में सोच रहा था किंतु संजय ने कैसे उसे परोक्ष रूप से बता दिया की युद्ध में पांडवों की विजय होगी ?
जब संजय ने कहा कि जहां कृष्ण और अर्जुन होंगे वहीं विजय भी होगी
जब संजय ने विश्वरूप का वर्णन किया
उपरोक्त दोनो
उपरोक्त में से कोई नहीं
