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Worksheets74.श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_18.22 -18.46
Total questions: 37
Worksheet time: 1hrs 14mins
जो कर्म नियमित है और जो आसक्ति, राग या द्वेष से रहित कर्मफल की चाह के बिना किया जाता है, वह_____ कहलाता है?
सात्त्विक
राजसिक
तामसिक
इनमे से कोई भी नहीं
शास्त्र मनुष्य को कितने वर्ण तथा कितने आश्रम में विभाजित करता है?
4.4
4.5
2.3
4.2
जो कार्य अपनी इच्छा पूर्ति के निमित्त प्रयासपूर्वक एवं मिथ्याअहंकार के भाव से किया जाता है, वह _____कहा जाता है?
तामसिक
रजोगुणी
सात्विक
इनमे से कोई भी नहीं
मनुष्यों को अपना लेखा जोखा परमेश्वर के दूतों को देना होता है। दूत किस नाम से जाने जाते हैं?
इंद्र दूत
वायु दूत
शिव दूत
यमदूत
जो कर्म मोहवश शास्त्रीय आदेशों की अवहेलना करके तथा भावी बन्धन की परवाह किये बिना या हिंसा अथवा अन्यों को दुख पहुँचाने के लिए किया जाता है, वह ____कहलाता है?
तामसी
सात्विक
राजसिक
इनमे से कोई भी नहीं
मोहग्राहस्त किए गए कर्म किस श्रेणी में आते हैं?
शुद्ध सतोगुण
ऐसे कर्म कृष्ण भावनाभावित होते हैं
तमोगुण
सात्विक
गीता के अनुसार किस प्रकार का व्यक्ति सदैव प्रकृति के गुण के अतीत होता है?
अनुभवी व्यक्ति
परिपक्व व्यक्ति
कृष्णभावनामय व्यक्ति
धर्मी व्यक्ति
सात्त्विक कर्ता किसे कहते हैं?
जो व्यक्ति भौतिक गुणों के संसर्ग के बिना अहंकाररहित, संकल्प तथा उत्साहपूर्वक अपना कर्म करता है और सफलता अथवा असफलता में अविचलित रहता है
जो करता कर्म तथा कर्म फल के प्रति आसक्त होता है फलो का भोग करना चाहता है तथा जो लोभी सदा इरशालु अपवित्र था सुख दुख से विचित्र होने वाला है
जो कर्ता सदा शास्त्रों के आदेशों के विरुद्ध कार्य करता रहता है, जो भौतिकवादी, हठी, कपटी तथा अन्यों का अपमान करने में पटु है और तथा जो आलसी, सदैव खिन्न तथा काम करने में दीर्घसूत्री है
उपरोक्त में से कोई नहीं
आलस्य तथा प्रमाद किस गुण के कारण पैदा होते हैं?
शुद्ध सतोगुण
तमोगुण
सतोगुण
रजोगुण
शरीर से परे आत्म संबंधि ज्ञान _________ ज्ञान कहलाता है?
सतोगुण
सतोगुण
तमोगुण
भौतिक
कौन ज्ञान, कर्म तथा कर्ता में भेद का कारण है?
प्रकृति के 3 गुण
आध्यात्मिक प्रयास
परमात्मा
भौतिक सुख
गीता के अनुसार मनुष्य को कर्म किस के निदेशानुसार करना चाहिए?
शास्त्र के अनुसार
अपने पिता से परामर्श के बाद
देवता की अनुमति के अनुसार
किसी अधिकृत या अघोषित गुरु से परामर्श करने के बाद
कौन कर्म तथा उनकी प्रतिक्रिया ममें बंद जाता है?
जो व्यक्ति शास्त्रों के निर्देशों को नहीं जानता
जो कृष्ण भावनामय है
जो शास्त्र के निर्देश का पालन करते हैं
जो गुरु के निर्देश का पालन करता है
जो बुद्धि अच्छे बुरे का भेद बताती है, वह _____है?
सात्विक
तामसिक
राजसिक
भौतिक
कर्म को प्रेरणा देने वाले 3 कारण क्या है?
ज्ञान, ज्ञाय और ज्ञाता
इंद्रिय, कर्म तथा कर्ता
ज्ञाय, कर्म तथा कर्ता
इंद्रिया ज्ञाय और ज्ञाता
तामसी बुद्धि के क्या लक्षण है?
जो बुद्धि मोह तथा अंधकार के वशीभूत होती है
जो अधर्म को धर्म तथा धर्म को अधर्म मानती है
जो सदैव विपरीत दिशा में प्रयत्न करती है
उपर्युक्त सभी सही हैं
योग का वास्तविक अर्थ क्या है?
शरिर को दुरस्त रखना
मानसिक शांति
योग परमात्मा को जानने का साधन है
योग का सीधा अर्थ प्राणायाम है
सात्त्विक धृति किसे कहते हैं?
जो अटूट है, जिसे योगाभ्यास द्वारा अचल रहकर धारण किया जाता है और जो इस प्रकार मन, प्राण तथा इन्द्रियों के कार्यकलापों को वश में रखती है
जिस धृति से मनुष्य धर्म, अर्थ तथा काम के फलों में लिप्त बना रहता है, ऐसी धृति सात्विक है
जो धृति स्वप्न, भय, शोक, विषाद तथा मोह के परे नहीं जाती ऐसी धृति सात्विक है
इनमे से कोई भी नहीं
भय , शोक , मोह और विषाद कौन से गुण के गुण के प्रतिफल हैं ?
सतो गुण
रजो गुण
तमोगुण
मिश्रित
भगवान कृष्ण के द्वारा 18 अध्याय में तीन गुणो के आधार पर धृति का वर्णन क्या गया है । “धृति” शब्द का क्या अर्थ है ?
वृत्ति
स्वभाव
धारण करना
निश्चय
कभी कभी इस भौतिक जगत में जीव तीन प्रकार के सुखों का भोग करते हुए समस्त दुखों से कैसे मुक्त हो जाता है ?
भक्तों की संगति प्राप्त करके
सुखों में दुःख का आस्वादन कर के
समस्त सुखों के सम भाव प्राप्त कर के
सुखों के प्रति मध्य मार्ग का पालन कर के
श्रील प्रभुपाद श्लोक के तात्पर्य में भौतिक सुख को “ चर्वित चर्वन” के रूप में क्यों सम्बोधित करते हैं ?
क्यूँकि भौतिक सुख में कोई संतुष्टि नहीं है
क्यूँकि भौतिक सुख में कोई नवीन सुख नहीं है
क्यूँकि भौतिक सुख में व्यक्ति पुनः पुनः पहले से भोग किए हुए सुख को ही बारम्बार भोगता रहता है
उपरोक्त सभी
सतो गुणी सुख प्रारम्भ में विश के समान और अंत में अमृत के समान क्यूँ लगता है ?
क्यूँकि प्रारम्भ में इस सुख को प्राप्त करने के लिए अनेक नियमों का पालन करना पड़ता है जो अत्यंत मुश्किल है
क्यूँकि जब व्यक्ति इन नियमों का पालन सफलता पूर्वक करता है तो वह अंत में दिव्य आनंद प्राप्त करता है
क्यूँकि इस सुख में खट्टे मीठे अनुभव प्राप्त होते रहते हैं
1 और 2
1,2 और 3
रजो गुणी सुख में निम्नलिखित में स कौन सी विशेषताएँ पायी जाती हैं ?
ये सुख आत्म साक्षातकार के प्रति अंधा है
ये सुख इंद्रियों द्वारा उनके विषयों के संसर्ग से प्राप्त होता है
ये सुख प्रारम्भ से लेकर अंत तक मोह कारक है
उपरोक्त सभी
रजो गुणी सुख का इस अगर में सबसे प्रमुख उदाहरण क्या है ?
स्त्री पुरुष का आकर्षण
सम्बन्धियों के प्रति आकर्षण
धन सम्पत्ति के प्रति आकर्षण
उपरोक्त सभी
जो व्यक्ति निद्रा और आलस्य में ही सुखी रहता है वह निश्चय ही ………… है
आलसी
कुम्भकर्ण
राक्षस
तमोगुणी
निम्नलिखित में से कौन से व्यक्ति को ना शुरुआत में और ना ही अंत में सुख नहीं मिलता है ?
सतोगुणी
रजोगुणी
तमोगुणी
भ्रमित
श्लोक संख्या 18.40 के अनुसार ………. भी तीन गुणो से मुक्त नहीं है ?
देवता
महर्षि
मुनि गण
सप्त ऋषि
श्लोक संख्या 18.41 के अनुसार चारों वर्ण प्रकृति के तीन गुणो के आधार पर बने हैं । इस से पूर्व भी भगवान कृष्ण इस प्रकार का उपदेश पहले कौन से श्लोक में कर चुके हैं ?
2.13
3.13
4.13
5.13
निम्नलिखित में से कौन सा गुण ब्राह्मणों का स्वाभाविक गुण नहीं है ?
संकल्प
अन्यों की सेवा
उदारता
उपरोक्त सभी
वैश्यों के स्वाभाविक कर्म गो रक्षा का क्या अर्थ है ?
गो पालन
गो पालन कर के धन कमाना और जीवन यापन करना
धन की हानि होने पर भी गो पालन करना
उपरोक्त सभी
“जन्मदस्स्य यत” सूत्र कौन से शास्त्र में दिया या है ?
पराशर स्मृति
अगस्त्य संहिता
वेदांत सूत्र
आरण्यक शास्त्र
वैष्णव जन परमेश्वर की पूजा उनकी …………. शक्ति के समेत करते हैं ?
अंतरंगा
बहिरंगा
तटस्था
उपरोक्त सभी
कृप्या यहाँ पर नाम लिखे ?
कृप्या यहाँ पर पता लिखे ?
कृप्या यहाँ पर फोन नो लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपनी आयु लिखे ?
