WorksheetsBhakti Shastri Unit-3 Hindi
Total questions: 30
Worksheet time: 18mins
ब्रह्मपुच्छ प्रतिष्ठा के पांच स्तरों में से सही विकल्प का चुनाव करें जिस प्रकार तैत्तरीय उपनिषद 2.9 में वर्णित है।
अन्नमय,
प्राणमय
ज्ञानमय
विशेषमय
इस संसार के 24 तत्त्वों में से सही विकल्प का चुनाव करें?
पांच महाभूत
प्रकृति के तीन गुणों का अव्यक्त स्तर
इन्द्रियों के विषय
ज्ञानेन्द्रियाँ
संस्कृत या हिंदी में ज्ञान की बीस वस्तुओं में से सही विकल्प का चुनाव करें।
विनम्रता, दम्भहीनता, अहिंसा
सहिष्णुता, सरलता, प्रामाणिक गुरु के पास जाना
पवित्रता, स्थिरता, आत्मसंयम,
इन्द्रियतृप्ति के विषयों का परित्याग, अहंकार का भाव
महत्तत्व का क्या अर्थ है?
समग्र ब्रह्माण्ड का सम्पूर्ण कारण
महद् ब्रह्म
भौतिक प्रकृति के अवयव
परा-प्रकृति
सतोगुण में स्थित व्यक्ति किस प्रकार से बंधन में होते हैं?
सुख के भाव से
ज्ञान के भाव से
पाप कर्मों से
असहाय भाव से
रजोगुण के क्या लक्षण हैं?
असीम आध्यात्मिक आकांक्षा
असीम आध्यात्मिक तृष्णा
पुरुष तथा स्त्री का पारस्परिक आकर्षण
सभी
तमोगुण के तीन परिणामों को सूचीबद्ध करें
पागलपन (प्रमाद),
आलस
नींद
उत्कंठावटवृक्ष की पत्तियां क्या होती हैं?
वैदिक स्तोत्र
वेदों का ज्ञाता
सकाम कर्म
मुक्ति
भौतिक जगत का वृक्ष किस पर स्थित होता है?
हमारी इच्छाओं में
जलाशय के निकट
ब्रह्माण्ड के सर्वोच्चलोक
आध्यात्मिक जगत् में
वटवृक्ष का पोषण किसके द्वारा होता है?
प्रकृति के तीन गुणों द्वारा
सकाम कर्मों से
इन्द्रियभोग से
इन्द्रियविषय से
असङ्ग–शस्त्रेण का अर्थ बताये।
विरक्ति के हथियार से
अनुसन्धान करने से
असत संग के हथियार सेज्ञान के शस्त्र सेकिस प्रकार कृष्ण इस जगत का पालन करते हैं इसके तीन उदाहरण दिजिये
सूर्य का तेज
चन्द्रमा बनकर समस्त वनस्पतियों को जीवन-रस
पाचन-अग्नि (वैश्वानर)
सभीक्षरः और अक्षरः का क्या अर्थ है?
बद्ध और मुक्त जीव
भौतिक व आध्यात्मिक दुनिया में जीवमुक्त और बद्ध जीव
आध्यात्मिक व भौतिक दुनिया में जीवनिम्न का अर्थ बताये: प्रवृत्ति और निवृति
ठीक से कर्म करना, अनुचित ढंग से कर्म न करना
अनुचित ढंग से कर्म न करना, ठीक से कर्म करना
यम नियमकोई नहींमामप्रप्येव कौन्तेय का अर्थ बताएं।
मुझ तक पहुँच नहीं पाते
मुझ तक पहुँच पाते
अधम गति को प्राप्त होते
श्रेष्ठगति को प्राप्त होते
शरीर की तपस्या के आठ भागो में से सही विकल्प का चुनाव करें?
पवित्रता,
सरलता,
ब्रह्मचर्य
हिंसा
सतोगुण में दिए गए दान के चार लक्षणों में से सही विकल्प का चुनाव करें।
प्रत्युपकार की आशा के बिना
समुचित काल में
समुचित स्थान में
अयोग्य व्यक्ति को
हर क्रिया के पूर्ण होने के पांच कारणों में से सही विकल्प का चुनाव करें।
कर्म का स्थान (शरीर),
कर्ता,
दिमाग
अनेक प्रकार की चेष्टाएँ तथा परमात्मा
उन नौ गुणों में से सही विकल्पों का चुनाव करें जिनके साथ ब्राह्मण कर्म करते हैं।
शान्तिप्रियता, आत्मसंयम,
तपस्या, पवित्रता, सहिष्णुता,
सत्यनिष्ठा, ज्ञान,
विज्ञान तथा धार्मिकता
शरणागति के छह लक्षणों में से सही विकल्पों का चयन करें।
आनुकूल्यस्य वर्जनम्।
प्रातिकूल्यस्य वर्जनम्।
रक्षिष्यतीति विश्वासो
गोप्तृत्वे वरणं तथा।
एक ... को अपने ... के खंड के बारे में सब कुछ पता होता है परंतु एक राजा अपने महल ही नहीं पर
सभी ... की जानकारी रखता है। इसी प्रकार व्यक्ति अपने .... का .... हो सकता है परन्तु
.......सभी .......के स्वामी हैं।
नागरिक, भूमि, नागरिकों की संपत्ति, शरीर, स्वामी, परमेश्वर भगवान, शरीरों
राजा, भूमि, नागरिकों की संपत्ति, शरीर, स्वामी, परमेश्वर भगवान, शरीरों
नागरिक, भूमि, नागरिकों की संपत्ति, शरीर, स्वामी, ईश्वर, जीवों
नागरिक, भूमि, नागरिकों की संपत्ति, शरीर, स्वामी, परमेश्वर भगवान, जीवों
वायु, जल, ..., .... और अन्य सभी वस्तुओं के अंदर जाती है परंतु किसी से .... नहीं। इसी प्रकार, एक
... यूूँ तो विभिन्न .... में होता है, फिर भी उनसे परे होता है….
मिट्टी, विष्ठा, मिलती, जीव, शरीरों
मिट्टी, आकाश, मिलती, जीव, शरीरों
मिट्टी, विष्ठा, मिलती, जीव, योनियों
मिट्टी, अग्नि, मिलती, जीव, योनियों
अगर कोई भगवान्–......... में स्थित नहीं है तब वह ...... की सेवा नहीं कर सकता। एक ..... का
व्यक्तिक सहायक बनने के लिये .... की आवश्यकता होती है।
कोई नहीं
सम दिव्य स्थिति, राजा ,भगवान्, योग्यताओं
विषम दिव्य स्थिति, भगवान्, राजा, योग्यताओं
विषम दिव्य स्थिति, भगवान्, राजा, गुणों
राजा का एक ... लगभग राजा के ही स्तर का.. भोग करता है। और इसीलिए ... और .... सुख
एवं, .... जीवन भक्तिमय सेवा के साथ ही आते हैं। इसीलिए ब्रह्मा–साक्षात्कार, या नित्यता, या अविनाशिता
भक्तिमय सेवा में ही सम्मिलित हैं।
सेवक, आनंद, नित्य, अविनाशी, नित्य
सेवक, ऐश्वर्य, नित्य, अविनाशी, नित्य
सहायक, आनंद, नित्य, अमर, नित्य
सेवक, आनंद, शाश्वत, अविनाशी, नित्य
हमारी ... मूल रूप से ... की तरह शुद्ध है। परंतु अगर जल में हल्का सा कोई ... मिला दिया जाए तो वह
बदल जाता है। इसी प्रकार, ... शुद्ध होती है क्योंकि .. शुद्ध है। परंतु चेतना .... गुणों के संग के
अनुसार बिल जाती है।
चेतना, अग्नि, रंग, चेतना, आत्मा, भौतिक
चेतना, जल, रंग, प्रकृति, आत्मा, भौतिक
चेतना, जल, रंग, चेतना, आत्मा, आध्यात्मिक
कोई नहीं
हर .... त्रुटि से ढका होता है, ठीक जिस प्रकार ... धुंए से। इसीलिए व्यक्ति को अपने ...कार्य
करना नहीं छोड़ना चाहिए, भले ही यह कार्य (कमश) त्रुटिपूर्ण क्यों न हो।
प्रयास, आग, स्वभावानुसार
कार्य, आग, स्वभावानुसार
प्रयास, हवा, स्वभावानुसार
कोई नही
एक जीव भौतिक संसार में एक शरीर से दुसरे में जाते हुए विभिन्न .. धारणाओं को इस प्रकार ले जाता है जैसे
... विभिन्न ... को। इसी तरह वह ... शरीर छोड़ता है ... स्वीकार करने के
लिए।
देहात्म, वायु, गंधों, एक, दूसरा
देहात्म, वायु, गंधों, नया, पुराना
आत्म, वायु, गंधों, एक, दूसरा
आत्म, वायु, गंधों, नया, पुराना
... का अर्थ है कि व्यक्ति अपना ... बरकरार रखते हुए परम भगवान् के धाम में प्रवेश कर सकता है और
उनका संग करते हुए उनकी ...कर सकता है। उदाहरण, एक ... एक वृक्ष में प्रवेश करता है, तब वह वृक्ष
से ..... नहीं हो जाता अपितु वृक्ष के ... का आनंद लेता है।
विशते, व्यक्तित्व, सेवा, हरा पक्षी, एकाकार, फलो
विशते, व्यक्तित्व, सेवा, हरा पक्षी, लीन, फलो
तत्वतः, व्यक्तित्व, सेवा, हरा पक्षी, एकाकार, फलो
तत्त्वतः, व्यक्तित्व, सेवा, हरा पक्षी, लीन, फलो
एक व्यक्ति जो तेज़ रफ़्तार गाडी में बैठा है वह धीमी गति वाले वाहन से तेज़ चलता है भले ही दोनों वाहनों के
... एक ही हों। इसी प्रकार ... के आदेश से भौतिक जगत, जीव के लिये एक विशेष ...बना देता है
जिससे कि वह अपनी पिछली ... के अनुसार कर्म कर सके।
चालक, परमात्मा, भ्रम, इच्छाओं
मालिक, परमात्मा, वाहन, इच्छाओं
चालक, परमात्मा, वाहन, सेवाओं
कोई नहीं
एक ... चावल के ढेर में अंडे देता है और कई बार ऐसा कहा जाता है कि बिच्छु ... से उत्पन्न होता है। परंतु
... बिच्छु का कारण नहीं हैं। वास्तव में अंडे मादा ने दिए थे । फिर इस प्रकार, ... जीवों के जन्म का
कारण नहीं है। इसका ... परम परमेश्वर भगवान् द्वारा दिया गया है और केवल देखने में ही वे भौतिक प्रकृति के ... हैं।
बिच्छू, चावल, चावल, भौतिक प्रकृति, बीज, उत्पाद
बिच्छू, चावल, चावल, आध्यात्मिक प्रकृति, बीज, उत्पाद
बिच्छू, चावल, प्रकृति, भौतिक प्रकृति, बीज, उत्पाद
बिच्छू, चावल, धान, भौतिक प्रकृति, मूल, उत्पाद
