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Worksheetsभारतीय पुरातत्व और तकनीक
Total questions: 13
Worksheet time: 32mins
मार्शल, पुरास्थल के स्तर विन्यास को पूरी तरह अनदेखा कर पूरे टीले में समान परिमाण वाली नियमित क्षैतिज इकाइयों के साथ-साथ उत्खनन करने का प्रयास करते थे। इसका यह अर्थ हुआ कि अलग-अलग स्तरों से संबद्ध होने पर भी एक इकाई विशेष से प्राप्त सभी पुरावस्तुओं को सामूहिक रूप से वर्गीकृत कर दिया जाता था। परिणामस्वरूप इन खोजों के संदर्भ के विषय में बहुमूल्य जानकारी हमेशा के लिए लुप्त हो जाती थी।
1944 में भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के डायरेक्टर जनरल बने आर. ई. एम. व्हीलर ने इस समस्या का निदान किया। व्हीलर ने पहचाना कि एकसमान क्षैतिज इकाइयों के आधार पर खुदाई की बजाय टीले के स्तर विन्यास का अनुसरण करना अधिक आवश्यक था।
हड़प्पा सभ्यता की भौगोलिक सीमाओं का आज की राष्ट्रीय सीमाओं से बहुत थोड़ा या कोई संबंध नहीं है। लेकिन उपमहाद्वीप के विभाजन तथा पाकिस्तान के बनने के पश्चात् सभ्यता के प्रमुख स्थल अब पाकिस्तान के क्षेत्र में हैं।
उपमहाद्वीप के विभाजन तथा पाकिस्तान के बनने के पश्चात् सभ्यता के प्रमुख स्थल कहाँ हैं?
भारत
पाकिस्तान
नेपाल
भूटान
कच्छ में हुए व्यापक सर्वेक्षणों से क्या प्रकाश में आया?
हड़प्पाई बस्तियाँ
सांस्कृतिक उपक्रम
धौलावीरा
कालीबंगन
1980 के दशक से हड़प्पाई पुरातत्व में क्या बढ़ती रही है?
रुचि
अन्वेषण
उत्खनन
सर्वेक्षण
पुरातत्वविदों ने भारत में पुरास्थलों को चिह्नित करने का प्रयास क्यों किया?
कुछ पुरातत्वविद विशेष पुरास्थलों की भौगोलिक स्थिति के पीछे निहित कारणों को समझने का प्रयास करते हैं।
इस अध्याय में दिए गए विषयों में से कौन से कनिंघम को रुचिकर लगते ?
1947 के बाद से कौन-कौन से प्रश्न रोचक माने गए हैं?
के समीप स्थित एक विश्राम गृह तक पहुँचा। अपने चिंतित सहकर्मी की इस चेतावनी, कि हमें अपना निरीक्षण अगली सुबह 5.30 बजे आरंभ कर 7.30 बजे तक समाप्त कर देना चाहिए, जिसके पश्चात बहुत अधिक गर्मी हो जाती है, के बाद प्रवेशद्वार में काली आकृति के पंखे वाले को धीरतापूर्वक बैठा छोड़ तथा पड़ोस की बीहड़ से अनगिनत सियारों की रात की हवा को चीरती हुई आवाज़ के बीच हम सोने चले गए।
अगली सुबह ठीक 5.30 बजे हमारे छोटे से काफ़िले ने बालू के टीले की ओर बढ़ना आरंभ किया। दस मिनट के भीतर ही मैं रुका और सबसे ऊँचे टीले को देखते हुए, अपनी दृष्टि पर अविश्वास के साथ अपनी आँखे मलने लगा।
छह घंटे बाद भी मेरे घबराए हुए कर्मचारीगण तथा मैं सूर्य की तेज़ रोशनी में कुदालियों और चाकुओं के साथ कठिन परिश्रम कर रहे थे, मुझे डर है कि मेरे सहयोगी काम के मेरे जुनून के कारण मुझे सनकी न समझ लें।
