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Total questions: 30
Worksheet time: 12mins
कपड़े में मुँह को छिपाए सिर को घुटनों पर रखकर कौन रो रहा था ?
लेखक
बुढ़िया
भगवाना
पड़ौसिन
समाज में मनुष्य का दर्जा और अधिकार कैसे निश्चित किया जाता है?
खान-पान से
रहन-सहन से
पोशाक से
इनमे से कोई न्ही
बुढ़िया को कोई क्यों उधार नहीं देता ?
उसका पति नहीं था
वह गरीब थी
उसका बेटा मर गया था
इनमे से कोई न्ही
लेखक के अनुसार किसे दुःख मनाने का अधिकार नहीं है ?
बच्चों को
बुढ़िया को
पड़ोसी को
गरीबों को
साँप के काटने पर बुढ़िया किसको बुला लाई ?
डॉक्टर को
ओझा को
गाँव वालों को
पड़ोसी को
बुढ़िया को पुत्र की मृत्यु के अगले ही दिन बाज़ार क्यों आना पड़ा ?
घूमने
सब्ज़ी खरीदने
ख़रबूज़े बेचने
इन में से किसी को नहीं
बुढ़िया के दुःख को देख कर लेखक को किसकी याद आई ?
गाँव की
बच्चों की
अपनी माँ की
संभ्रांत महिला की
लड़के की मृत्यु के दूसरे ही दिन बुढ़िया खरबूजे बेचने क्यों चल दी ?
उसके घर में खाने को कुछ भी नहीं था
उसके पोता-पोति भूख से बिलबिला रहे थे
उसकी बहू बुखार से तप रही थी
उपर्युक्त सभी कथन सत्ये है
भगवाना की मृत्यु कैसे हुई?
बीमार होने के कारण
साँप के डसने के कारण
गरीबी के कारण
ऊंचाई से गिरने के कारण
बुढ़िया का हाल पूछने में लेखक को किस के कारण परेशानी थी?
पड़ोसी के
बच्चों के
दुकानदार के
पोशाक के
भगवाना क्या कार्य करता था?
मज़दूरी करता था
परचून की दुकान चलाता था
कछियारी का कार्य
इनमे से कोई नहीं
हमारा दर्जा कौन निश्चित करता है ?
लोग
समाज
पोशाक
परिवार
पाठ में लोगों ने किसे 'पत्थर दिल' कहा है ?
लेखक को
बुढ़िया को
भगवाना को
पड़ोसिन को
बुढ़िया कहाँ बैठ कर रो रही थी ?
घर में
दुकान में
मंदिर में
फुटपाथ पर
दुख का अधिकार कहानी के लेखक कौन है ?
यशपाल
महादेवी वर्मा
निराला
पंत
लड़का सुबह मुँह-अँधेरे बेलों में से क्या चुन रहा था ?
पके हुए करेले
पके हुए तरबूज़
पके हुए खरबूज़े
पके हुए अंगूर
किसी व्यक्ति की पोशाक देखकर हमें क्या पता चलता है ?
सामाजिक स्थिति और अधिकार
कुछ भी नहीं
अवस्था
दादी ने पोतो को खाने के लिए क्या दिया ?
संतरा
अनाज
खरबूज़े
अंगूर
लेखक के अनुसार सबको किसका अधिकार होना चाहिए ?
खुशी का
आनंद का
दुख मनाने का
अमीर होने का
खरबूज़ों के समीप कौन बैठी थी ? और वह क्या कर रही थी ?
एक जवान औरत और वह गाना गा रही थी ।
एक छोटी लड़की और वह खेल रही थी ।
एक अधेड़ उम्र की औरत और वह रो रही थी ।
बुढ़िया की बहूऔर वह सो रही थी ।
बाज़ार में खड़े लोग स्त्री के बारे में किस भाव से बात कर रहे थे ?
बड़े प्यार भाव से
बड़े शांत भाव से
बड़े गुस्से भाव से
बड़ी घृणा भाव से
बुढ़िया का बेटा कितने बरस का था ? और उसका क्या नाम था ?
बाईस बरस का और नाम भगवाना था ।
बाईस बरस का और नाम भगवान था ।
तेईस बरस का और नाम भगवान था ।
तेईस बरस का और नाम भगवाना था ।
" अरे इन लोगों का है ? ये कमीने लोग रोटी के टुकड़े के लिए जान देते हैं। " ये वाक्य किसने कहे ?
फुटपाथ पर खड़े एक आदमी ने
परचून की दुकान पर बैठे लाला जी ने
दाढ़ी खुजाते एक आदमी ने
उपर्युक्त में से कोई नहीं
जब हम किसी निचली श्रेणियों की अनुभूति को समझना चाहते हे, उस समय क्या बंधन और अड़चन बन जाता हैं?
नाम
वर्ष
पोशाक
सेहत
लालाजी कौन सी दुकान पर बैठे थे?
परचून की
पान की
वड़ा पाव की
कपड़े की
बूढ़ी औरत का लड़का कहा पर कचियारी करता
खुदके खेत में
घर में
शहर के पास डेढ़ भीगा जमीन पर
शहर के पास वाले गांव में
गम मानने के लिए क्या चाहिए?
सेहत
फुरसत
परिवार
सहूलियत
पाठ के अंत में लेखक को क्या समझ में आया?
दुख होना अच्छा होता है और उससे भी अधिक उसे मानने का अधिकार और कोई सुख नहीं
दुख मनाने का भी एक अधिकार होता है और गम मानने की भी एक सहूलियत होती है
बुढ़िया के घर में किसे बुखार हो गया था ?
बहू को
पोता पोती को
बुढ़िया को
बुढिया के घर का धन कैसे समाप्त हो गया ?
भगवाना की विदाई में , ओझा को देकर
गरीबो को देकर
डाक्टर को देखकर
