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Worksheetsअर्थ के आधार पर वाक्य
Total questions: 31
Worksheet time: 16mins
' संदेहवाचक वाक्य' का उदहारण है
वह नहीं लिख रहा है।
अब तक फ़सल कट चुकी होगी।
दिल्ली देश की राजधानी है।
आप बैठिये।
'आज्ञावाचक वाक्य' का उदहारण है -
दीवारों को साफ़ कर दो।
वह पत्र लिख रहा है।
अब तकट्रेन आ चुकी होगी।
मैं चाहता हूँ कि सभी स्वस्थ हों।
'भगवान तुम्हे दीर्घायु करे।' - कैसा वाक्य है ?
विधानवाचक
निषेधवाचक
प्रश्नवाचक
इच्छावाचक
अर्थ के आधार पर वाक्य के कितने भेद होते हैं ?
4
5
6
8
'अरे! कितना विशाल मैदान है।' - कैसा वाक्य है ?
विधानवाचक
निषेधवाचक
प्रश्नवाचक
विस्मयवाचक
वाक्य के कितने अंग होते हैं ?
1
2
3
4
निम्नलिखित में कौन-सा 'प्रश्नवाचक वाक्य' है?
सोहन पुस्तक नहीं पढ़ता है।
आपका क्या नाम है?
चुप रहो।
सुरेश एक अच्छा खिलाड़ी है।
'कोरोना एक भयंकर महामारी है।' - कैसा वाक्य है ?
संकेतवाचक
विधानवाचक
निषेधवाचक
प्रश्नवाचक
'हरियाणा एक राज्य है।' - कैसा वाक्य है ?
विधानवाचक
निषेधवाचक
प्रश्नवाचक
इच्छावाचक
' संकेतवाचक वाक्य' का उदहारण है
वह नहीं लिख रहा है।
अब तक फ़सल कट चुकी होगी।
दिल्ली देश की राजधानी है।
अगर परिश्रम करोगे तो अवश्य सफल होओगे।
'किताब के पेज मत फाड़ो।' कौन-सा वाक्य है ?
प्रश्नवाचक वाक्य
संकेतवाचक वाक्य
आज्ञावाचक वाक्य
संकेतवाचक वाक्य
'मैं झूठ नहीं बोलता हूँ।' - कैसा वाक्य है ?
निषेधवाचक
प्रश्नवाचक
संदेहवाचक
विस्मयादिबोधक
निम्नलिखित में कौन-सा 'निषेधवाचक वाक्य' है?
सोहन पुस्तक नहीं पढ़ता है।
आपका क्या नाम है?
चुप रहो।
सुरेश एक अच्छा खिलाड़ी है।
निम्नलिखित में कौन-सा 'इच्छावाचक वाक्य' है?
ईश्वर सबकी कोरोना से रक्षा करें।
परीक्षा-परिणाम आने वाला है।
बाहर जाओ।
वाह! क्या बात है।
'ईश्वर करे, आप खूब उन्नति करें।' कौन-सा वाक्य है
आज्ञावाचक वाक्य
इच्छावाचक वाक्य
संकेतवाचक वाक्य
संदेहवाचक वाक्य
दो वर्णों के मेल से होनेवाले विकार को कहते हैं
संधि
समास
उपसर्ग
प्रत्यय
संधि कितने प्रकार के होते हैं?
1
3
2
4
दयानन्द में प्रयुक्त संधि का नाम है –
गुण संधि
दीर्घ संधि
व्यंजन संधि
यण संधि
कपीश में प्रयुक्त संधि का नाम है –
(a) वृद्धि संधि
(b) दीर्घ संधि
(c) यण संधि
(d) विसर्ग संधि
सदैव में प्रयुक्त संधि का नाम है
व्यंजन संधि
स्वर संधि
विसर्ग संधि
इनमें से कोई नहीं
इनमें कौन स्वर संधि का उदाहरण है?
संयोग
मनोहर
नमस्कार
पवन
निम्न में से दीर्घ संधि युक्त पद कौन-सा है ?
महर्षि
देवेन्द्र
सूर्योदय
दैत्यारि
पवित्र में प्रयुक्त संधि का नाम है –
यण संधि
गुण संधि
अयादि संधि
वृद्धि संधि
इत्यादि का सही संधि-विच्छेद है
इत् + यादि
इति + यादि
इत् + आदि
इति + आदि
निरर्थक का सही संधि विच्छेद है।
निर + अर्थक
निरः + अर्थक
निः + अर्थक
निरा+अर्थक
धरेश का सही संधि विच्छेद है –
धराः + अश
धर + ईश
धरा + ईश
धरा + इश
निराशा का सही संधि-विच्छेद है –
निरा + आशा
निर् + आशा
निः + आशा
निरः + आशा
महोष्ण का सही संधि विच्छेद है-
महु + उष्ण
महा + उष्ण
महो + उष्ण
महा + ऊष्ण
आशीर्वाद का सही संधि-विच्छेद है –
आशीर + वाद
आशीः + वाद
आर्शी + वाद
इनमें से कोई नहीं
महेश का सही संधि-विच्छेद है
महो + ईश
महा + ईश
मही+ ईश
महि + ईश
सन्मति का सही संधि-विच्छेद है –
सम् + मति
सन् + मति
सद् + मति
सत् + मति
