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WorksheetsMatrubhumi ka maan
Total questions: 10
Worksheet time: 5mins
अभयसिंह ने राव हेमू को राजपूतों की शक्ति के बारे में क्या सलाह दी?
राजपूतों को अपनी शक्ति अलग-अलग रखनी चाहिए।
राजपूतों को एक केंद्र के अधीन एकजुट होना चाहिए।
राजपूतों को विदेशी शक्तियों से दोस्ती करनी चाहिए।
राजपूतों को अपनी शक्ति का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए।
राव हेमू के अनुसार, बूंदी राज्य मेवाड़ के प्रति कैसा संबंध रखना चाहता था?
मेवाड़ की अधीनता स्वीकार करना।
मेवाड़ के साथ युद्ध करना।
स्वतंत्र रहकर महाराणाओं का आदर करना।
मेवाड़ के साथ व्यापारिक संबंध बनाना।
महाराणा लाखा ने दरबार में जाने से क्यों मना कर दिया?
वे बीमार थे।
वे बूंदी के राव हेमू से पराजित होकर भागने के कारण शर्मिंदा थे।
वे किसी महत्वपूर्ण कार्य में व्यस्त थे।
वे सभासदों से नाराज थे।
महाराणा लाखा ने क्या प्रतिज्ञा की थी?
जब तक बूंदी के गढ़ को जीत न लेंगे, अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे।
बूंदी के राव हेमू से मित्रता करेंगे।
अपने राज्य का विस्तार नहीं करेंगे।
राजपूतों को एकजुट करने का प्रयास नहीं करेंगे।
महाराणा लाखा की प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए चारणी ने क्या उपाय सुझाया?
बूंदी के राव हेमू से माफी मांगने का।
एक नकली बूंदी दुर्ग बनाकर उसका विध्वंस करने का।
प्रतिज्ञा तोड़ने का।
बूंदी पर तुरंत आक्रमण करने का।
वीरसिंह ने नकली बूंदी के किले को क्या बताया?
एक साधारण किला
जन्मभूमि बूंदी का दुर्ग
महाराणा की प्रतिज्ञा का प्रतीक
एक मिट्टी का ढेर
वीरसिंह के साथियों ने महाराणा के विरुद्ध तलवार उठाने पर क्या आपत्ति जताई?
वे युद्ध नहीं करना चाहते थे।
उनका शरीर महाराणा के नमक से बना था।
नकली बूंदी के लिए लड़ना व्यर्थ था।
वे बूंदी के प्रति वफादार नहीं थे।
वीरसिंह ने अपने साथियों से क्या प्रतिज्ञा करने को कहा?
महाराणा की आज्ञा का पालन करने की।
नकली दुर्ग पर मेवाड़ की पताका फहराने की।
प्राणों के रहते नकली दुर्ग पर मेवाड़ की पताका स्थापित न होने देने की।
युद्ध से पीछे हटने की।
वीरसिंह के बलिदान के बाद महाराणा को क्या एहसास हुआ?
नकली बूंदी को जीतना आसान था।
ऐसी वीर जाति को अधीन करने की अभिलाषा करना पागलपन है।
वीरसिंह ने उनके विरुद्ध हथियार उठाकर गलती की।
उनकी प्रतिज्ञा पूरी हो गई थी।
राव हेमू ने राजपूतों के बारे में क्या कहा?
राजपूतों में कोई राजा या महाराजा नहीं होता।
सभी राजपूत देश, जाति और वंश की मानरक्षा के लिए प्राण देने वाले सैनिक हैं।
राजपूतों की तलवारें अपने ही स्वजनों पर नहीं उठनी चाहिए।
उपरोक्त सभी।
