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Total questions: 17
Worksheet time: 10mins
अक्रूर जी को मथुरा से वृंदावन कौन भेजता है?
वसुदेव जी
देवकी माता
उग्रसेन
कंस
कंस ने भगवान श्रीकृष्ण और बलराम को मारने के लिए किस हाथी को मदिरा पिलाकर द्वार पर छोड़ा था?
कूट
गज
कुवलयापीड
ऐरावत
कंस ने भगवान श्रीकृष्ण और बलराम से युद्ध करने के लिए किन दो मल्लों को बुलाया था?
कूट और तोषण
कुम्भकर्ण और बाणासुर
चाणूर और मुष्टिक
जरासंध और शिशुपाल
भगवान श्रीकृष्ण ने अपने गुरु सान्दीपनि मुनि के आश्रम में कितने दिन रहे? ओर चारों वेद कितनी बार सुनकर सीख लिए
कई बार
64 दिन
32 दिन
एक ही बार
भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु-दक्षिणा में क्या दिया?
धन
आश्रम
मृत पुत्र को यमलोक से वापस लाए
रथ
भगवान श्रीकृष्ण ने अपने गुरु सान्दीपनि मुनि को गुरु-दक्षिणा में उनके मृत पुत्र को “पञ्चजनोदरात्” से वापस लाकर दिया। इस श्लोक में “पञ्चजनोदरात्” शब्द का अर्थ क्या है?
पाँच जनों (पाँच ब्राह्मणों) के समूह से
राक्षस पञ्चजन के पेट से
समुद्र के पाँच द्वीपों से
पाण्डवों में से किसी एक के शरीर से
यहाँ “पञ्चजनोदरात्” का अर्थ है — “पञ्चजन नामक राक्षस के पेट से।”
भगवान श्रीकृष्ण अपने गुरु के मृत पुत्र को खोजने के लिए समुद्र में गए और पञ्चजन राक्षस का (a) किया। बाद में यमलोक जाकर उस बालक को वापस लाकर अपने गुरु को सौंपा।
यदि स्वयं भगवान भी अपने गुरु को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं, तो हम साधारण जीवों को अपने गुरु के प्रति कैसा भाव रखना चाहिए?
केवल यथोचित आदर
आज्ञा पालन और सेवा भाव से पूर्ण समर्पण
केवल नाममात्र की सम्मान
गुरु की गलती बताने का अधिकार
सान्दीपनि मुनि ने असंभव कार्य गुरु-दक्षिणा में क्यों माँगा?
क्योंकि उन्हें धन नहीं चाहिए था
अपने पुत्र को प्रेम करते थे
कोई विशेष कारण नहीं
क्योकि वे जानते थे भगवान् श्रीकृष्ण के अलावा कोई नहीं कर सकता है
अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ के ....... होने के कारण, एवं.............श्रील प्रभुपाद का प्रत्येक इस्कॉन भक्त के साथ अनोखा सम्बन्ध है।
सभी सही विकल्प चुनें
सर्वोच्च प्राधिकारी
संस्थापकाचार्य
पूर्व प्रतिष्ठित शिक्षा गुरु
दादा गुरु
भगवान श्रीकृष्ण स्वयं सर्वज्ञ हैं — उन्हीं से ब्रह्मा जी ने सृष्टि-ज्ञान प्राप्त किया।
फिर भी जब भगवान सान्दीपनि मुनि से वेद-वेदांग और 64 कलाएँ सीखते हैं, तो यह किस गहरे सिद्धांत को प्रकट करता है?
किसी एक विकल्प को चुनिए
भगवान ज्ञान के अभाव को दूर करने के लिए शिक्षा लेते हैं
भगवान केवल अपने ऐश्वर्य का प्रदर्शन करना चाहते हैं
भगवान आदर्श स्थापित करते हैं कि कोई भी गुरु से शिक्षा ग्रहण किए बिना पूर्ण नहीं होता
भगवान ने यह केवल लीला के रूप में मनोरंजन हेतु किया
गुरु की वास्तविक स्थिति क्या है
सभी सही विकल्प चुनें
सभी के शुभचिंतक
भगवान के सेवक
श्रीमती राधा रानी के पार्षद
नित्यानंद प्रभु के प्रतिनिधि
भगवान श्रीकृष्ण ने अपने गुरु सान्दीपनि मुनि से शिक्षा कहाँ प्राप्त की थी?
द्वारका में
अवंतिका में
वृंदावन में
हस्तिनापुर में
सान्दीपनि आश्रम में आज भी कौन-सी पवित्र वस्तु देखी जा सकती है?
सान्दीपनि मुनि का सिंहासन
भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा का अध्ययन स्थल
रुक्मिणी मंदिर
यमराज की मूर्ति
क्या हमने कभी अपने गुरु या शिक्षक को प्रसन्न करने के लिए ऐसा कुछ किया है जो हमारी सीमाओं से परे हो?
कभी नहीं, यह आवश्यक नहीं
केवल विशेष अवसरों पर
हाँ, सच्चा शिष्य हमेशा गुरु को प्रसन्न करने का प्रयास करता है
गुरु की प्रसन्नता भगवान के समान नहीं होती
भगवान श्रीकृष्ण के इस कार्य से हमें “कृतज्ञता” के कौन से रूप सीखने को मिलते हैं?
चारो में से आप कौन सा विकल्प चुनना चाहेंगे
A. केवल धन्यवाद कहना ही पर्याप्त है
B. कृतज्ञता कर्म और सेवा से व्यक्त करनी चाहिए
C. केवल भावनाओं में रहना पर्याप्त है
D. गुरु को कुछ न देना ही भक्ति का रूप है
क्या हमारे जीवन में भी कोई “गुरु-दक्षिणा” देने योग्य कार्य है — जो हम अपने गुरु के प्रति प्रेम और सेवा से कर सकें?
नहीं, गुरु को किसी चीज़ की आवश्यकता नहीं
हाँ, हमारे सेवा, प्रचार और समर्पण के रूप में गुरु-दक्षिणा हो सकती है
केवल धन देना ही गुरु-दक्षिणा है
गुरु-दक्षिणा केवल वेदकाल तक सीमित थी
