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एक बोना और लकड़हारा भाग 2

एक बोना और लकड़हारा भाग 2

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4th Grade

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SADAT ALLI

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3 Slides • 10 Questions

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एक बोना और लकड़हारा भाग 2

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एक बोना और लकड़हारा भाग 2

दोपहर हुई, तो लकड़हारे ने खाना पकाने की तैयारी की। इधर-उधर से दो पत्थर उठाकर उसने  चूल्हा बनाया। उसके पास हांडी थी, आग सुलगाकर उसे चूल्हे पर रखा। उसमें आलू उबलने के लिए रख दिए। लकड़ी गीली थी, इसलिए आग बार-बार ठंडी हो जाती थी। लकड़हारा मुँह से फूँककर उसे तेज करता था। बौने ने सोचा 'अब यह फिर फूँकता है। क्या इसके मुंह से आग निकलती है?' पर वह चुपचाप देखता रहा। लकड़हारे को सख्त भूख लगी थी, इसलिए उसने एक आलू निकाल लिया। आलू काफ़ी गरम था। उसने उसे खाना चाहा। इसलिए वह उसे फूंक मारकर ठंडा करने लगा। उसे ऐसा करते देखकर बौने को फिर आश्चर्य हुआ। उसने सोचा-'अब ये फँक क्यों मारता है? अब क्या आलू को फूंककर जलाएगा?' पर आलू जला नहीं। लकड़हारे ने फूंक मार-मारकर उसे ठंडा कर लिया और गप-गप खाने लगा। 


3

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Open Ended

लकड़हारे ने दोपहर होने पर कया किया?

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Open Ended

खाना बनाने के लिए सबसे पहले उसने क्या किया?

6

Open Ended

उसने चूल्हे पर क्या रखा?

7

Open Ended

उसने हाँडी में क्या डाला?

8

Open Ended

आग बार-बार ठंडी क्यों हो जाती थी?

9

Open Ended

लकड़हारा आलू को क्यों खा नहीं पाया?

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Open Ended

गरम आलू को उसने ठंडा कैसे किया?

11

Open Ended

बौना दूर से क्या देखता रहा?

12

Open Ended

लकड़हारा आलू को कैसे खाने लगा?

13

Open Ended

एक विशेषण शब्द बताओ।

एक बोना और लकड़हारा भाग 2

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