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SAMEER SOLANKI

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वेद पाठ प्रस्तुती

निशिता सोलंकी कि तरफ से

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2

​पाठ 2 धर्म के लक्षण

​सामान्यतः हिन्दू मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि को अलग-अलग धर्म के मानने वाले समझ लिया जाता है। वास्तव में यह ठीक नहीं है। हिन्दू का अर्थ है एक देश विशेष (भारत) में रहने वाला और वहाँ की संस्कृति को मानने वाला सिक्ख, बौद्ध, जैन उसी संस्कृति के अन्तर्गत विशेष मत या पन्थ है। इस्लाम और ईसाइयत विदेशी संस्कृतियों से प्रभावित मजहब हैं। कोई व्यक्ति हिन्दू-मुस्लिम या ईसाई होते हुए धार्मिक भी हो सकता है और अधार्मिक भी। धार्मिक का अर्थ है ईमानदार और अधार्मिक का अर्थ है बेईमान धार्मिकता ईमानदारी को कहते हैं और अधार्मिकता बेईमानी की।

जिस प्रकार देश एक है तथा प्रदेश अनेक हैं, उसी प्रकार मानव मात्र का धर्म एक है और मत अर्थात् विचारधाराएँ अनेक हैं। धर्म उन मानवीय गुणों का नाम है जिन्हें धारण करके मनुष्य उन्नति करता है। कुछ मानवीय सद्गुण ऐसे हैं जो संसार के सभी मनुष्यों के लिए उपयोगी हैं, जैसे ईमानदारी, सदाचार आदि। ये ग्रहण करने व आचरण करने के योग्य हैं। मनु महाराज ने धर्म के दस लक्षण बताए हैं, वे सबके सब मनुष्य मात्र के लिए उपयोगी हैं

धृति क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रिय निग्रहः, धीविद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्म लक्षणम् ।

वेद पाठ प्रस्तुती

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