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Assessment

Presentation

Other

6th Grade

Practice Problem

Hard

Created by

Ruby Chaturvedi

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सुप्रभात

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संदर्भ:- प्रस्तुत पद्यांश हिन्दी की पाठ्यपुस्तक के पाठ १३- ‘बालवर्णन’ नामक कविता से लिया गया है। उपर्युक्त पक्तियाँ महाकवि ‘सूरदास जी’ द्वारा रचित है |

प्रसंग:- प्रस्तुत पदों में महाकवि सूरदास ने श्रीकृष्ण की लीलाओं का नितांत स्वाभाविक एवं बालसुलभ चंचलता से पूर्ण चित्र उकेरा है। दाऊ बलराम का उन्हें खिजाना, उनके श्यामल वर्ण पर व्यंग्य करना, ग्वाल-बालों का चुटकी दे-देकर नचाना एवं मुसकाना आदि कृष्ण को नहीं सुहाता। महाकवि सूरदास ने प्रस्तुत पद ब्रज भाषा में बड़े ही सुंदर ढंग से उभारे हैं।

व्याख्या:- श्रीकृष्ण कहते हैं, "मैया! दाऊ दादा ने मुझे बहुत चिढ़ाया है। मुझसे कहते हैं "तू मोल लिया हुआ है, यशोदा मैया ने भला तुझे कब उत्पन्न किया।" क्या करूँ, इसी क्रोध के मारे मैं खेलने नहीं जाता। वे बार-बार कहते हैं "तेरी माता कौन है? तेरे पिता कौन हैं? नंदबाबा तो गोरे हैं, यशोदा भी गोरी है, तू साँवले रंग वाला कैसे?" चुटकी देकर फुसलाकर ग्वाल-बाल मुझे नचाते हैं, फिर सब हँसते और मुसकराते हैं। तूने तो मुझे ही मारना सीखा है, दाऊ दादा को कभी डाँटती भी नहीं।" सूरदास कहते हैं मोहन के मुँह से गुस्से भरी बातें बार-बार सुनकर माता यशोदा जी अंदर-ही-अंदर ख़ुश हो रही हैं। वे कहती हैं, कान्हा! सुनो, बलराम तो चुगल-ख़ोर है, वह जन्म से ही धूर्त है।" सूरदास कहते हैं कि माता यशोदा अपने बालक श्रीकृष्ण को विश्वास भरे शब्दों में कह रही हैं कि "कृष्ण, मुझे गायों की शपथ, मैं ही तुम्हारी माता हूँ, और तुम मेरे बेटे हो।

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संदर्भ:- प्रस्तुत पद्यांश हिन्दी की पाठ्यपुस्तक के पाठ १३- ‘बालवर्णन’ नामक कविता से लिया गया है। उपर्युक्त पक्तियाँ महाकवि ‘सूरदास जी’ द्वारा रचित है |

प्रसंग:- प्रस्तुत पदों में महाकवि सूरदास ने श्रीकृष्ण और उनकी माँ यशोदा के बीच हुए संवाद को भुत ही सरल और सुंदर शब्दों में वर्णित किया है | चोरी करके माखन खाना, ग्वाल-मित्रों द्वारा ज़बरदस्ती मुँह पर माखन लगाने की शिकायत माता यशोदा से करना जैसे सरस प्रसंग सूरदास ने ब्रज भाषा में बड़े ही सुंदर ढंग से उभारे हैं।

व्याख्या:- श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा से कहते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया हैं। वह बताते हैं कि भोर होते ही वह गायों के पीछे मधुबन भेज चले जाते है। यहाँ उनकी मासूमियत और बचपना दिखाया गया है, जो यह साबित करता है कि वे माखन चोरी करने के लिए वहाँ नहीं थे। श्रीकृष्ण यह बताते हैं कि उन्होंने चार पहर (12 घंटे) तक बंसीवट में भटकते हुए समय बिताया और शाम को घर लौटे। यह उनके दिनचर्या का वर्णन करता है, जिसमें वे गायों को चराने में व्यस्त थे। यहाँ श्रीकृष्ण अपनी माँ से कहते हैं कि वे छोटे बालक हैं, और उनकी छोटी-छोटी बाँहें हैं, जिससे वह माखन तक पहुँच नहीं सकते। श्रीकृष्ण कहते हैं कि उनके अन्य साथी ग्वाल-बाल उनसे बैर रखते हैं और जबरदस्ती माखन उनके मुँह पर लगा देते हैं। यहाँ श्रीकृष्ण अपनी माँ से कहते हैं कि वे ग्वाल-बालों की बातों में आ गई हैं। श्रीकृष्ण यहाँ कहते हैं कि माता, तुम्हारे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझता है। श्रीकृष्ण अपनी माँ को अपनी लकुटी कमरिया (गाय चराने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली चीज़) देने का आग्रह करते हैं। वह कहते हैं कि गायों के पीछे भाग-भाग के वः परेशान हो गए है | अंत में कवि सूरदास लिखते हैं कि यशोदा ने हँसते हुए श्रीकृष्ण को अपने गले लगा लिया। यह एक ममता भरा पल है, जिसमें माँ अपने बेटे की नटखटता और मासूमियत को देखकर उसे प्यार से गले लगाती है।

सुप्रभात

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