
Shri Raam lakshman parshuraam samvaad Part 3
Authored by Rajdev Singh
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10th Grade
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1.
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30 sec • 1 pt
तुम्ह तौ कालु हांक जनू लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा।। इन पंक्तियों का अर्थ होगा_
लक्ष्मण जी ने परशुराम जी से कहा कि आप काल को जबरदस्ती हांक कर मेरी ओर ला रहे हो और इस काम में सहायता के लिए बार बार मुझे भी बुला रहे हैं।
लक्ष्मण जी परशुराम जी से कहते हैं कि,आप तो मेरे लिए मृत्यु को आवाज लगाकर बुला रहे हैं।
परशुराम जी कहते हैं कि हे लक्ष्मण तुम लगता है जैसे जबरदस्ती मेरा काल बुलाना चाहते हों
इनमें से कोई नहीं।
2.
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30 sec • 1 pt
सुनत लखन के बचन कठोरा।। परसू सुधारी धरेऊ कर घोरा।। इस का अर्थ होगा_
लक्ष्मण जी के कठोर वचनों को सुनकर परशुराम ने अपने फरसे को सीधा कर लक्ष्मण को मारने के लिए तैयार किया ।
परशुराम के कठोर वचन सुनकर लक्ष्मण जी ने उनका फरसे की ओर देखा,जिसे उन्होंने अपने हाथ में लेकर रख लिया।
लक्ष्मण जी के कठोर वचन सुनकर सभी राजाओं ने अपने अपने फरसे अपने हाथों में पकड़ लिए
परशुराम जी के साथ आए सैनिकों ने लक्ष्मण जी के कठोर वचन सुनकर अपने फरसे भी परशुराम जी के हाथों में दे दिए।
3.
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30 sec • 1 pt
अब जनि देइ दोसु मोहि लोगु। कटुबादी बालकु बधजोगू।। इन पंक्तियों का अर्थ होगा_
परशुराम जी ने सारी सभा से कहा कि अब इस बालक के वध के लिए मुझे अगर आप सब दोष भी देंगे तो क्या?? यह बालक अब मारे जाने लायक ही है।
परशुराम जी ने सारी सभा से कहा कि अब इस बालक के वध के लिए मुझे दोष मत देना, यह बालक अपने कड़वे वचनों के कारण अब वध के योग्य हो गया है।
लक्ष्मण जी ने सारी सभा से कहा कि बालक के समान मुझे और श्री राम को ना पहचानने वाले ये परशुराम जी अब वध के योग्य हो गए हैं।
सैनिकों ने एक दूसरे से कहा कि अब हमे दोष ना देना,अब हम जरूर कोई ना कोई कदम उठाने को विवश हैं।
4.
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30 sec • 1 pt
बाल बीलोकि बहुत मै बांचा। अब येहु मरनिहार भा सांचा।। इस का अर्थ होगा_
परशुराम जी कहते हैं कि मै तो बालक समझकर इसे बहुत बचाता रहा,अब यह वास्तव में मरने योग्य हो गया है।
लक्ष्मण जी परशुराम जी से कहते हैं कि बस अब बहुत हो चुका।अब जो कुछ भी मै करूंगा उसके लिए मुझे दोष मत देना।
सारे राजा महाराजा कहते है कि परशुराम जी के सफेद बालों के कारण हमने अभी तक इनका सम्मान किया है पर अब ऐसा नहीं होगा।
इनमें से कोई नहीं।
5.
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30 sec • 1 pt
कौसिक कहा छमिआ अपराधू।।बाल दोष गुन गनही न साधू।। इन पंक्तियों का अर्थ होगा_
परशुराम के क्रोध को भड़कता देख विश्वामित्र जी ने उनसे कहा कि परशुराम जी साधू लोग तो बालों के गुण दोष की अच्छी तरह जानते हैं।
परशुराम जी से विश्वामित्र मुनि कहते हैं कि हे परशुराम जी आप तो साधु हैं और साधु लोग बालकों के गुण दोष को नहीं गिना करते,वे तो बालक को क्षमा कर देते हैं।
लक्ष्मण जी ने परशुराम जी से कहा कि अगर आप साधु हैं तो हमारे गुण दोष मत देखिए और हमे क्षमा कीजिए क्योंकि साधु का यही पहचान होती है।
राजसभा में उपस्थित सभी लोगों ने परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए कहा कि आप साधु के गुणों को ध्यान में रखते हुए लक्ष्मण जी को क्षमा करें।
6.
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30 sec • 1 pt
खर कुठार मै अकरुण कोही।आगे अपराधी गुरुद्रोही।। इन पंक्तियों का अर्थ होगा_
लक्ष्मण जी सभी से कहते हैं मेरे पास भी यह फरसा है,और गुरु समान मेरे भाई का अपमान करने वाला मेरे सामने खड़ा है।
लक्ष्मण जी परशुराम जी से कहते हैं कि आप के पास फरसा है तो क्या हुआ,मै भी निर्दयी और क्रोध से भरा हूं।।मेरे गुरु समान भाई का अपराधी भी मेरे सामने खड़ा है।
परशुराम जी विश्वामित्र से कहते हैं कि हे विश्वामित्र,तुम जानते हो मै कितना निर्दयी, क्रोधी और तेज फरसे को धारण करने वाला हूं।मेरे सामने मेरे गुरू का अपमान करने वाला भी खड़ा है।
इनमें से कोई नहीं।
7.
MULTIPLE SELECT QUESTION
30 sec • 1 pt
उतर देत छोड़ों बिनु मारे।केवल कौसिक सील तुम्हारे।। इसका अर्थ होगा_
यह(लक्ष्मण)मेरे साथ बहुत वाद विवाद भी कर रहा है।इस पर भी मै इसका वध नहीं कर रहा हूं। ऐसा विश्वामित्र मै केवल तुम्हारे सदाचारी स्वभाव के कारण कर रहा हूं।
लक्ष्मण जी कहते हैं कि मै बिना उत्तर लिए किसी को मारूंगा नहीं।और मै अगर ऐसा करूंगा तो केवल परशुराम जी के सम्मान के सम्मान के कारण।
परशुराम जी कहते है कि मै बिना उत्तर लिए किसी को भी नहीं मारूंगा।विश्वामित्र जी आप चाहे कुछ भी क्यों न कहें
इनमें से कोई नहीं।
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