
Bhagavad Gita As It Is DAY-12 (2.65-72, 3.1-2)
Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa
Education, Life Skills, Philosophy
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1.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
5 mins • 1 pt
श्लोक पहचानें - जो पुरुष समुद्र में निरन्तर प्रवेश करती रहने वाली नदियों के समान इच्छाओं के निरन्तर प्रवाह से विचलित नहीं होता और जो सदैव स्थिर रहता है, वही शान्ति प्राप्त कर सकता है, वह नहीं, जो ऐसी इच्छाओं को तुष्ट करने की चेष्ठा करता हो |
इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते |
तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि || 2.67 ||
या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी |
यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः || 2.69 ||
आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत् |
तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे स शान्तिमाप्नोति न कामकामी || 2.70 ||
विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्र्चरति निःस्पृहः |
निर्ममो निरहङकारः स शान्तिमधिगच्छति || 2.71 ||
2.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
5 mins • 1 pt
"अहैतुकी भगवत्कृपा की प्राप्ति" किसका अर्थ है? (2.65)
प्रसादे
सर्वदुःखानां
प्रसन्नचेतसो
पर्यवतिष्ठते
3.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
5 mins • 1 pt
कैसे व्यक्ति की बुद्धि शीघ्र ही स्थिर हो जाती है और संसार के तीनों ताप नष्ट हो जाते हैं? (2.65)
कृष्णभावनामृत में तुष्ट व्यक्ति
कृष्णभावनामृत से असंतुष्ट व्यक्ति
4.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
जो कृष्णभावनाभावित नहीं है, उसके विषय में क्या सही है? (2.66)
उसकी बुद्धि दिव्य होती है
उसका मन स्थिर होता है
उसके मन का कोई अन्तिम लक्ष्य नहीं होता
वह निश्चय ही सदा दुखी और अशान्त रहेगा
वह शान्तिमयी अवस्था में है
5.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
5 mins • 1 pt
मन की चंचलता का एकमात्र कारण अन्तिम लक्ष्य का ________ है |(2.66)
भाव
महाभाव
अभाव
अनुभाव
6.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
5 mins • 1 pt
जिस पर मन केंद्रित है, ऐसी विचरणशील इन्द्रिय बुद्धि को किस प्रकार हर लेती है? (2.67)
जैसे शेर कुत्तों के झुण्ड को खदेड़ता है
जैसे प्रचंड वायु नाव को बहा ले जाती है
जैसे एक वायरस शहर को खाली कर देता है
जैसे वैक्यूम क्लीनर कूड़ा खींचता है
7.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
5 mins • 1 pt
भक्ति के प्रगति-पथ से विपथ करने के लिए कितनी इन्द्रियों को अपनी तृप्ति में लगे रहने की आवश्यकता है? (2.67)
समस्त
कम से कम एक
एक से अधिक
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