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Bhagavad Gita As It Is DAY-45 (11.28-37)

Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa

Life Skills, Philosophy, Special Education

KG - Professional Development

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Bhagavad Gita As It Is DAY-45 (11.28-37)
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1.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

समस्त महान योद्धा भगवान् के विराटरूप के प्रज्जवलित मुखों में किस प्रकार प्रवेश कर रहे हैं? (11.28)

जिस प्रकार नदियों की अनेक तरंगें समुद्र में प्रवेश करती हैं

जिस प्रकार दिल्ली के राजीव चौक पर यात्री मेट्रो में प्रवेश करते हैं

जिस प्रकार किसी हरे कृष्ण उत्सव में आगंतुक प्रसादम की पंक्ति में प्रवेश करते हैं

2.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

अर्जुन किस प्रकार से समस्त लोगों को पूर्ण वेग से विराटरूप के मुख में प्रविष्ट होते देख रहा है? (11.29)

जिस प्रकार पतिंगे अपने विनाश के लिए प्रज्जवलित अग्नि में कूद पड़ते हैं

जिस प्रकार एक क्रिकेटर रन आउट से बचने के लिए अपनी क्रीज़ की ओर भागता है

जिस प्रकार बच्चे छुट्टी की घंटी सुनकर मुख्य द्वार की ओर दौड़ते हैं

3.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

अर्जुन भगवान् कृष्ण के विराटरूप को किस नाम से सम्बोधित कर रहा है जो अपने प्रज्जवलित मुखों से सभी दिशाओं के लोगों को निगल रहे हैं? (11.30)

कृष्ण

विष्णु

गोपीनाथ

द्वारिकाधीश

4.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

देववर कहते हुए अर्जुन ने विराटरूप में भगवान् से क्या कहा? (11.31)

इतने उग्ररूप में आप कौन हैं

आप आदि-भगवान् हैं

आपका प्रयोजन क्या है

कृपा करके मुझ पर प्रसन्न हों

मैं आपको नमस्कार करता हूँ

5.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

अर्जुन के प्रश्नों का उत्तर देते हुए विराटरूप में श्रीभगवान् ने क्या कहा? (11.32)

समस्त जगतों को विनष्ट करने वाला काल मैं हूँ

मैं समस्त लोगों का विनाश करने के लिए आया हूँ

पाण्डवों के सिवा दोनों पक्षों के सारे योद्धा मारे जाएँगे

6.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

किसी भी प्रकार की निराशा से बचने के लिए अर्जुन लड़ने के पक्ष में नहीं था, इस पर विराटरूप के माध्यम से भगवान् कृष्ण ने क्या उत्तर दिया? (11.32)

यदि वह नहीं लड़ता, तो भी सारे लोग उनके ग्रास बनते, क्योंकि यही भगवान् कृष्ण की इच्छा है

मृत्यु रोकी नहीं जा सकती, चाहे वह लड़े या नहीं, यदि अर्जुन नहीं लड़ता, तो वे सब अन्य विधि से मरते

वे पहले से मृत हैं, काल विनाश है और परमेश्वर की इच्छानुसार सारे संसार को विनष्ट होना है

7.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

विराटरूप में भगवान् किस श्लोक में अर्जुन से कहते हैं - तनिक भी विचलित न होओ, केवल युद्ध करो?

कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्त: ।

‍ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे येऽवस्थिता: प्रत्यनीकेषु योधा: ॥ (11.32)

तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व जित्वा शत्रून्भुंक्ष्व राज्यं समृद्धम् ।

मयैवैते निहता: पूर्वमेव निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन् ॥ (11.33)

द्रोणं च भीष्मं च जयद्रथं च कर्णं तथान्यानपि योधवीरान् ।

मया हतांस्त्वं जहि मा व्यथिष्ठा युध्यस्व जेतासि रणे सपत्‍नान् ॥ (11.34)

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