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Bhagavad Gita As It Is DAY-46 (11.38-47)

Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa

Life Skills, Philosophy, Special Education

KG - Professional Development

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Bhagavad Gita As It Is DAY-46 (11.38-47)
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1.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

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"परं निधानम्" का क्या अर्थ है? (11.38)

भगवान् कृष्ण का कभी निधन नहीं होता

ब्रह्म तेज समेत सारी वस्तुएँ भगवान् कृष्ण पर आश्रित हैं

भगवान् कृष्ण इस दृश्यजगत के परम आश्रय हैं

2.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

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अर्जुन भगवान् को क्या-क्या कहकर सम्बोधित करता है? (11.39)

शशाङ्क:

वायुः

यमः

अग्निः

वरुणः

3.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

अर्जुन कृष्ण को प्रपितामह (परबाबा) कहकर सम्बोधित क्यों करता है? (11.39)

क्योंकि वे वज्रनाभ के पितामह के पिता हैं

क्योंकि वे विश्व के प्रथम जीव ब्रह्मा के पिता हैं

4.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

कृष्ण के प्रेम से अभिभूत उनका मित्र अर्जुन सभी दिशाओं से उनको नमस्कार करते हुए उनके विषय में क्या स्वीकार करता है? (11.40)

कृष्ण अनन्त पराक्रम के स्वामी हैं

कृष्ण सर्वव्यापी हैं, अतः कृष्ण सब कुछ हैं

कृष्ण समस्त बल तथा पराक्रम के स्वामी हैं

युद्धभूमि में एकत्र समस्त योद्धाओं से कहीं अधिक श्रेष्ठ हैं

5.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

अर्जुन कृष्ण को उनकी महिमा न जानने के कारण किये अपराधों के लिए क्या कहकर क्षमा मांगता है? (11.41-42)

हे कृष्ण

हे यादव

हे सखा

हे अच्युत

6.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

अर्जुन किन-किन अवसरों पर मूर्खतावश या प्रेमवश, भगवान् का अनादर करने के अपने अपराधों के लिए क्षमा मांगता है? (11.41-42)

आराम करते समय

एकसाथ लेटे हुए

साथ-साथ खाते या बैठे हुए

कभी अकेले

कभी अनेक मित्रोंके समक्ष

7.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

भक्त तथा भगवान् के बीच दिव्य प्रेम का आदान-प्रदान किस प्रकार का होता है? (11.41-42)

कृष्ण इतने कृपालु हैं कि इतने ऐश्वर्यमण्डित होने पर भी अर्जुन से मित्र की भूमिका निभाते रहे

अर्जुन विराट रूप का ऐश्वर्य देख चुका है, किन्तु वह कृष्ण के साथ अपनी मैत्री नहीं भूल सकता

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