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Bhagavad Gita As It Is DAY-53 (13.33-35, 14.1-7)

Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa

Life Skills, Philosophy, Special Education

KG - Professional Development

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Bhagavad Gita As It Is DAY-53 (13.33-35, 14.1-7)
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1.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

जीव कैसे विभिन्न प्रकार के शरीरों में स्थित होकर भी अपनी सूक्ष्म प्रकृति के कारण उनसे पृथक बना रहता है? (13.33)

जैसे वायु जल, कीचड़, मल तथा अन्य वस्तुओं में प्रवेश करती है, फिर भी वह किसी वस्तु से लिप्त नहीं होती

जिस प्रकार यद्यपि आकाश सर्वव्यापी है, किन्तु अपनी सूक्ष्म प्रकृति के कारण, किसी वस्तु से लिप्त नहीं होता

2.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

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परमात्मा समस्त शरीरों में किस प्रकार स्थित है? (13.34)

आत्मा का शत्रु

आत्मा का सखा

आत्मा का दास

आत्मा का क्रूर स्वामी

3.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

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क्या प्रमाण है कि शरीर के भीतर आत्मा रहता है? (13.34)

जब शरीर में आत्मा उपस्थित है, तो सारे शरीर में चेतना रहती है, किन्तु ज्योंही शरीर से आत्मा चला जाता है त्योंही चेतना लुप्त हो जाती है

जब शरीर से आत्मा चला जाता है, तो सारे शरीर में चेतना आ जाती है, किन्तु ज्योंही शरीर में आत्मा उपस्थित होता है त्योंही चेतना लुप्त हो जाती है

4.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

आत्मा का सूक्ष्म रूप कण शरीर के हृदय में स्थित रहकर चेतना द्वारा शरीर को आलोकित करता है - इसके लिए भगवान् ने क्या उदाहरण दिया है? (13.34)

जिस प्रकार सूर्य अकेले इस सारे ब्रह्माण्ड को प्रकाशित करता है

जिस प्रकार भौतिक काम हृदय में स्थित रहकर पूरे शरीर को क्रियान्वित रखता है

5.

MULTIPLE SELECT QUESTION

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परमचेतना तथा व्यष्टि-चेतना में क्या अन्तर है? (13.34)

एक शरीर की व्यष्टि चेतना दूसरे शरीर से सम्बन्धित नहीं होती

परमात्मा, परमचेतना रूप में, समस्त शरीरों के प्रति सचेष्ट रहते हैं

परमचेतना तथा व्यष्टि-चेतना गुणात्मक रूप से भिन्न हैं

6.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

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चेतना के विषय में क्या सही है? (13.34)

चेतना पदार्थ के संयोग से नहीं बनी होती

चेतना पदार्थ के संयोग से उत्पन्न होती है

चेतना जीव का लक्षण है

चेतना ही आत्मा का प्रमाण है

7.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

शरीर तथा शरीर के ज्ञाता के अन्तर को देखने के लिए भगवान् कृष्ण किन चक्षुओं की संस्तुति करते हैं? (13.35)

ज्ञानचक्षुषा

चर्मचक्षुषा

मनचक्षुषा

भ्रमचक्षुषा

कामचक्षुषा

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