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Bhagavad Gita As It Is DAY-58 (16.1-10)

Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa

Life Skills, Philosophy, Special Education

KG - Professional Development

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Bhagavad Gita As It Is DAY-58 (16.1-10)
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1.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

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भगवद्गीता यथारूप के सोलहवें अध्याय का क्या शीर्षक है?

प्रकृति के तीन गुण

पुरुषोत्तम योग

दैवी तथा आसुरी स्वभाव

श्रद्धा के विभाग

उपसंहार – संन्यास की सिद्धि

2.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

अभयं से लेकर नातिमानिता तक दैवी प्रकृति से सम्पन्न देवतुल्य पुरुषों में पाये जाने कितने दिव्य गुणों का उल्लेख किया गया है? (16.1-3)

20

23

24

25

26

3.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

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कैसे कार्यों को दैवी प्रकृति कहा जाता है? (16.1-3)

सतोगुण में किये गये सारे कार्य

रजो तथा तमोगुण में रहकर किये गये कार्य

जो मुक्तिपथ में प्रगति के लिए शुभ माने जाते हैं

जिनमें मुक्ति की कोई सम्भावना नहीं रहती

जिससे इसी जगत में निम्न योनियों में जाना पड़ता है

4.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

वैदिक शास्त्रों के अनुसार, सामाजिक जीवन में मनुष्यों के लिए पालन किये जाने वाले दस संस्कारों में से एक, दिव्यगुणों से युक्त सन्तान उत्पन्न करने को क्या कहा जाता है? (16.1-3)

जातकर्म संस्कार

अन्नप्राशन संस्कार

सीमन्तोनयन संस्कार

पुंसवन संस्कार

गर्भाधान संस्कार

5.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

मैथुन-जीवन गर्हित नहीं है, यदि इसका कृष्णभावनामृत में प्रयोग किया जाय - कैसे? (16.1-3)

अच्छी कृष्णभावनाभावित सन्तान उत्पन्न करने के निमित्त मैथुन-जीवन साक्षात् कृष्ण है

कृष्णभावनाभावित लोगों को कुत्ते-बिल्लियों की तरह सन्तानें उत्पन्न नहीं करनी चाहिए

कृष्णभावनामृत में तल्लीन माता-पिता से उत्पन्न सन्तानों को इतना लाभ तो मिलना ही चाहिए

6.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

वर्णाश्रमधर्म नामक सामाजिक संस्था किस आधार पर समाज को सामाजिक जीवन के चार विभागों एवं काम-धन्धों अथवा वर्णों के चार विभागों में विभाजित करती है? (16.1-3)

जन्म के अनुसार

शैक्षिक योग्यताओं के आधार पर

7.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

समाज में शान्ति तथा सम्पन्नता बनाये रखने के निमित्त वर्णाश्रम संस्था में किसे समस्त सामाजिक वर्णों तथा आश्रमों में प्रधान या गुरु माना जाता है? (16.1-3)

ब्राह्मण

संन्यासी

क्षत्रिय

गृहस्थ

ब्रह्मचारी

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