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Bhagavad Gita As It Is DAY-60 (16.21-24, 17.1-6)

Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa

Life Skills, Philosophy, Special Education

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Bhagavad Gita As It Is DAY-60 (16.21-24, 17.1-6)
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1.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

किन्हें भगवान् ने नरक के द्वार बताया है जिन्हें तुरंत त्याग देना चाहिए क्योंकि ये आत्मा का हनन इस हद तक कर देते हैं कि इस भवबन्धन से मुक्ति की सम्भावना नहीं रह जाती? (16.21)

काम

निर्धनता

क्रोध

कुरूपता

लोभ

2.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

तीनों नरक-द्वारों के लिए भगवान् ने क्या शब्द कहा है? (16.22)

सतोद्वार

रजोद्वार

तमोद्वार

गुरुद्वार

3.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

मानव-जीवन के तीन शत्रुओं – काम, क्रोध तथा लोभ – के परित्याग से क्या लाभ है? (16.22)

व्यक्ति जितना इनसे मुक्त होगा, उतना जीवन शुद्ध होगा

वैदिक साहित्य के विधि-विधानों का पालन कर सकता है

आत्म-साक्षात्कार के उच्चपद तक उठ सकता है

आत्म-साक्षात्कार की पूर्णता, भक्ति में मुक्ति निश्चित है

4.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

"मनमाने ढंग से कार्य करता है" - किन शब्दों से सूचित होता है? (16.23)

यः शास्त्रविधिमुत्सृज्य

वर्तते कामकारतः

न स सिद्धिमवाप्नोति

न सुखं न परां गतिम्

5.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

मानव समाज के विभिन्न आश्रमों तथा वर्णों को किस प्रकार कार्य करने से सिद्धि, सुख तथा परमगति की प्राप्ति हो पाती है? (16.23)

काम, क्रोध और लोभवश स्वेच्छा से

शास्त्र के विधि-विधानों तथा नैतिक सिद्धान्तों का पालन

6.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

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कैसा व्यक्ति स्वेच्छाचारी कहलाता है? (16.23)

जो व्यक्ति जान बूझ का नियमों का अतिक्रमण करता है, वह काम के वश में होकर कर्म करता है

जो जानता है कि ऐसा करना मना है, लेकिन फिर भी वह ऐसा करता है

यह जानते हुए भी कि अमुक काम करना चाहिए, फिर भी जो उसे नहीं करता है

7.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

भगवान् चैतन्य महाप्रभु ने शास्त्र विधि को अत्यन्त सरल बनाते हुए सभी को क्या करने के लिए कहा? (16.24)

केवल हरे कृष्ण महामन्त्र जपने

भगवान् की भक्ति में प्रवृत्त होने

अर्चविग्रह को अर्पित भोग का उच्चिष्ठ खाने

प्रति माह 15 लाख रुपये दान देने

अपने मनगढंत सिद्धांत बनाने

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