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श्री जैन सिद्धान्त प्रवेशिका - पर्याय और भेद - प्रभेद

Authored by Shreyans Shingavi

Philosophy

KG - Professional Development

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श्री जैन सिद्धान्त प्रवेशिका - पर्याय और भेद - प्रभेद
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1.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

1 min • 1 pt

जब व्यंजन पर्याय शुद्ध (स्वभावरूप) होती है, तब अर्थपर्याय _____

शुद्ध ही होती है

शुद्ध भी होती है, अशुद्ध भी होती है

अशुद्ध ही होती है

2.

MULTIPLE SELECT QUESTION

1 min • 1 pt

किन द्रव्यों की व्यंजन पर्याय समान होती है? (एक से अधिक उत्तर संभव)

परमाणु

कालाणु

धर्मद्रव्य

आकाशद्रव्य

3.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

1 min • 1 pt

ऐसा कोनसा द्रव्य है जिसकी व्यंजन पर्याय और अर्थपर्याय दोनों सादिसान्त है?

पुद्गल

जीव

काल

धर्म

आकाश

4.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

1 min • 1 pt

_____ के कारणभूत पदार्थ की किसी अवस्थाकी नित्यता को ध्रौव्य कहते हैं।

कुमतिज्ञान

प्रत्यभिज्ञान

श्रुतज्ञान

अवधिज्ञान

केवलज्ञान

5.

MULTIPLE SELECT QUESTION

1 min • 1 pt

निम्न में से कौनसे द्रव्यों कि व्यंजन और अर्थ पर्याय हमेशा शुद्ध रहती है? ( एक से अधिक उत्तर संभव)

धर्मद्रव्य

अधर्मद्रव्य

आकाशद्रव्य

कालद्रव्य

पुद्गलद्रव्य

6.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

1 min • 1 pt

क्षायोपशमिक सम्यक्त्व ______ पर्याय है।

स्वभाव अर्थ

विभाव अर्थ

विभाव व्यंजन

स्वभाव व्यंजन

7.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

1 min • 1 pt

भव्य जीव की कुमति - कुश्रुतज्ञान की पर्यायें _____ पर्याय और _____ होती हैं।

विभाव व्यंजन, अनादिअनंत

विभाव अर्थ, अनादिसान्त

विभाव व्यंजन, सादिअनंत

विभाव अर्थ, सादिसान्त

विभाव व्यंजन, अनादिअनंत

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