
Bhagavad Gita As It Is DAY-18 (4.10-19)
Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa
Life Skills, Philosophy, Special Education
KG - Professional Development
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1.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
भौतिकतावादी व्यक्ति, जो देहात्मबुद्धि में आसक्त होते हैं, उनके लिए क्या समझ पाना असम्भव सा है? (4.10)
परमात्मा व्यक्ति भी हो सकता है
ऐसा भी दिव्य शरीर है जो नित्य तथा सच्चिदानन्दमय है
मुक्ति के बाद भी अपना स्वरूप बनाये रखने के विचार से डरते हैं
पुनः व्यक्ति बनने से भयभीत हो उठते हैं
2.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
भौतिक जगत् के प्रति आसक्ति की अवस्थाएं कौन सी हैं? (4.10)
आध्यात्मिक जीवन की उपेक्षा
आध्यात्मिक साकार रूप का भय
जीवन की हताशा से उत्पन्न शून्यवाद की कल्पना
आध्यात्मिक जगत में भी भगवान् की सेवा की चाह
3.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
भौतिक जगत् के प्रति आसक्ति की तीनों अवस्थाओं से छुटकारा पाने के लिए क्या आवश्यक है? (4.10)
प्रामाणिक गुरु का निर्देशन
भगवान् की शरण ग्रहण करना
भक्तिमय जीवन के नियम तथा विधि-विधानों का पालन
भौतिक व्यक्तिओं, वस्तुओं आदि से घृणा
4.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
भक्तिरसामृतसिन्धु के अनुसार भगवत्प्रेम तक के नौ सोपान कौन से हैं? (4.10)
श्रद्धा-साधुसंग-भजनक्रिया
संग-काम-क्रोध
अनर्थ निवृत्ति-निष्ठा-रूचि
सम्मोह-स्मृति विभ्रम-बुद्धिनाश
आसक्ति-भाव-प्रेम
5.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
दिव्य जगत् में कृष्ण अपने शुद्ध भक्तों के साथ दिव्य भाव से किस प्रकार विनिमय करते हैं? (4.11)
परम स्वामी के रूप में
सखा के रूप में
पुत्र के रूप में
प्रेमी के रूप में
शत्रु के रूप में
6.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
निर्विशेषवादी कौन हैं? (4.11)
जो जीवात्मा के अस्तित्व को मिटाकर आध्यात्मिक आत्मघात करना चाहते हैं
जो सच्चिदानन्द भगवान् को स्वीकार नहीं करते
जो निर्विशेष ब्रह्मज्योति तेज में लीन होना चाहते हैं
7.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
5 mins • 1 pt
मनुष्य चाहे निष्काम हो या फल का इच्छुक या मुक्ति का इच्छुक ही क्यों न हो, उसे पूरे सामर्थ्य से क्या करना चाहिए? (4.11)
भगवान् की सेवा
भगवान् की नक़ल
भगवान् की निंदा
भगवान् की अवहेलना
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