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अध्याय 1 – स्वतंन्त्रता की पूर्व संध्या पर भारतीय अर्थव्यवस्था【L

Authored by Manish Kumar

Social Studies

11th Grade

9 Questions

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अध्याय 1 – स्वतंन्त्रता की पूर्व संध्या पर भारतीय अर्थव्यवस्था【L
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1.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

30 sec • 5 pts

औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत आर्थिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः

1. अंग्रेज़ी शासन की स्थापना से पूर्व भारत की अपनी स्वतंत्र अर्थव्यवस्था थी।

2. औपनिवेशिक शासकों की आर्थिक नीतियाँ शासित देश और वहाँ के लोगों के आर्थिक हितों के संरक्षण और संवर्धन से प्रेरित थीं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

केवल 1

केवल 2

1 और 2 दोनों

न तो 1 और न ही 2

Answer explanation

Explanation

व्याख्याः

अंग्रेज़ी शासन की स्थापना से पूर्व भारत की अपनी स्वतंत्र अर्थव्यवस्था थी, परंतु औपनिवेशिक शासन द्वारा अपनाई गई नीतियों ने भारत की अर्थव्यवस्था के मूल रूप को बदल कर रख दिया। अतः कथन 1 सही है।

औपनिवेशिक शासकों की आर्थिक नीतियाँ शासित देश और वहाँ के लोगों के आर्थिक विकास से नहीं बल्कि इंग्लैण्ड के आर्थिक हितों के संरक्षण और संवर्धन से प्रेरित थीं। उदाहरण स्वरूप बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में भारत की राष्ट्रीय आय की वार्षिक संवृद्धि दर 2 प्रतिशत से कम जबकि प्रतिव्यक्ति उत्पादन वृद्धि दर मात्र आधा प्रतिशत ही थी। अतः कथन 2 गलत है।

2.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

30 sec • 5 pts

औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत कृषि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः

1. ब्रिटिश औपनिवेशिक शासनकाल के अंतर्गत बढ़ते उद्योगों के कारण भारत मूलतः एक कृषि अर्थव्यवस्था से एक औद्योगिक अर्थव्यवस्था में बदल गया।

2. इस काल में एक बड़ी जनसंख्या का व्यवसाय होने के बाद भी कृषि क्षेत्र में गतिहीन विकास की प्रक्रिया चलती रही।

3. इस काल में कृषि क्षेत्र में वृद्धि के कारण कुल कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

केवल 2 और 3

केवल 3

1, 2 और 3

1, 2 और 3

Answer explanation

Explanation

व्याख्याः

ब्रिटिश औपनिवेशिक शासनकाल के अंतर्गत भारत मूलतः एक कृषि अर्थव्यवस्था ही बना रहा। देश की 85 प्रतिशत जनसंख्या गाँवों में बसी थी और प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से आजीविका के लिये कृषि पर ही निर्भर थी। अतः कथन 1 गलत है।

इस काल में एक बड़ी जनसंख्या का व्यवसाय होने के बाद भी कृषि क्षेत्र में गतिहीन विकास की प्रक्रिया चलती रही। इसके साथ ही अनेक अवसरों पर उसमें अप्रत्याशित गिरावट भी आई। हालाँकि इस काल में कृषि क्षेत्र में वृद्धि के कारण कुल कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई, परंतु कृषि उत्पादकता में कमी आती रही। कृषि क्षेत्रक की गतिहीनता का मुख्य कारण औपनिवेशिक शासन द्वारा लागू की गई भू-राजस्व प्रणालियों को ही माना जा सकता है। अतः कथन 2 और 3 सही हैं।

3.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

30 sec • 5 pts

औपनिवेशिक काल में हो रहे वि-औद्योगीकरण के पीछे औपनिवेशिक शासकों के उद्देश्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः

1. वे भारत को इंग्लैंड में विकसित हो रहे आधुनिक उद्योगों के लिये कच्चे माल का निर्यातक बनाना चाहते थे।

2. वे इंग्लैंड में विकसित हो रहे आधुनिक उद्योगों के उत्पादन के लिये भारत को ही एक विशाल बाज़ार बनाना चाहते थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

केवल 1

केवल 2

1 और 2 दोनों

न तो 1 और न ही 2

Answer explanation

Explanation

व्याख्याः उपर्युक्त दोनों कथन सही हैं।

भारत में हो रहे वि-औद्योगीकरण के पीछे विदेशी अथवा औपनिवेशिक शासकों का दोहरा उद्देश्य था। एक तो वे भारत को इंग्लैंड में विकसित हो रहे आधुनिक उद्योगों के लिये कच्चे माल का निर्यातक बनाना चाहते थे। दूसरे वे इंग्लैंड में विकसित हो रहे उन्हीं आधुनिक उद्योगों के उत्पादन के लिये भारत को ही एक विशाल बाज़ार भी बनाना चाहते थे। इस प्रकार, उन उद्योगों के प्रसार के सहारे वे अपने देश के लिये अधिकतम लाभ सुनिश्चित करना चाहते थे।

उल्लेखनीय है कि भारत के औद्योगिक क्षेत्रक में यद्यपि उन्नीसवीं शताब्दी के उतरार्द्ध और बीसवीं शताब्दी के आरम्भिक वर्षों में कुछ आधुनिक उद्योगों की स्थापना हुई परंतु भारत में भावी औद्योगीकरण को प्रोत्साहित करने हेतु पूंजीगत उद्योगों का प्रायः अभाव ही बना रहा। पूंजीगत उद्योग वो होते हैं जो तात्कालिक उपभोग में कम आने वाली वस्तुओं के उत्पादन के लिये मशीनों तथा कलपुर्जों का निर्माण करते हैं।

4.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

30 sec • 5 pts

औपनिवेशिक शासनकाल में विदेशी व्यापार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः

1. औपनिवेशिक सरकार द्वारा अपनाई गई वस्तु उत्पादन, व्यापार तथा सीमा शुल्क की प्रतिबंधकारी नीतियों का भारत के विदेशी व्यापार की संरचना, स्वरूप और आकार पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

2. इस काल में भारतीय आयत-निर्यात में निर्यात का आकर आयत के आकार से बड़ा बना रहा।

3. इस काल में निर्यात अधिशेष का देश में सोने और चांदी के प्रवाह पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

केवल 1 और 2

केवल 2

केवल 1 और 3

1, 2 और 3

Answer explanation

Explanation

व्याख्याः उपर्युक्त सभी कथन सही हैं।

औपनिवेशिक सरकार द्वारा अपनाई गई वस्तु उत्पादन, व्यापार तथा सीमा शुल्क की प्रतिबंधकारी नीतियों का भारत के विदेशी व्यापार की संरचना, स्वरूप और आकार पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। जिसके कारण भारत कच्चे उत्पाद जैसे रेशम, कपास, ऊन, चीनी, नील और पटसन आदि का निर्यातक होकर रह गया और यह सूती, रेशमी, ऊनी वस्त्रों जैसी अंतिम उपभोक्ता वस्तुओं और इंग्लैंड के कारखानों में बनी हल्की मशीनों आदि का आयातक भी बन गया।

इस काल में भारतीय आयत-निर्यात में निर्यात का आकर आयत के आकार से बड़ा बना रहा अर्थात् निर्यात अधिशेष की स्थिति बनी रही, परंतु इस अधिशेष से भारतीय अर्थव्यवस्था को भारी हानि हुई। इससे देश में सोने और चांदी के प्रवाह पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा। असल में इसका प्रयोग तो अंग्रेज़ों की भारत पर शासन करने के लिये गाढ़ी गई व्यवस्था का खर्च उठाने में ही हो जाता था।

अन्य शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि विदेशी व्यापार तो केवल इंग्लैंड की औद्योगिक क्रांति को पोषित कर रहा था।

5.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

30 sec • 5 pts

औपनिवेशिक शासनकाल में भारत में जनांकिकीय परिस्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

वर्ष 1921 के पूर्व का भारत जनांकिकीय संक्रमण के प्रथम सोपान में था।

इस समय भारत की जनसंख्या की संवृद्धि दर विस्फोटक अवस्था में थी।

इस काल में जीवन प्रत्याशा स्तर 35 वर्ष से भी कम था।

इस काल में सकल मृत्यु दर बहुत ऊँची थी।

Answer explanation

Explanation

व्याख्याः

औपनिवेशिक शासनकाल में भारत की जनसंख्या का विस्तृत ब्योरा सबसे पहले 1881 की जनगणना से एकत्र किया गया। वर्ष 1921 के पूर्व का भारत जनांकिकीय संक्रमण के प्रथम सोपान में था। द्वितीय सोपान का आरंभ 1921 के बाद से माना जाता है। इस समय तक भारत की जनसंख्या न तो बहुत विशाल थी न ही उसकी संवृद्धि दर बहुत अधिक थी। अतः कथन (a) सही परंतु (b) गलत है।

सामाजिक विकास के विभिन्न सूचक भी बहुत उत्साहवर्धक नहीं थे। साक्षरता दर 16 प्रतिशत से कम जबकि महिला साक्षरता दर नगण्य केवल 7 प्रतिशत थी। इस काल में जीवन प्रत्याशा स्तर केवल 32 वर्ष ही कम था। अतः कथन (c) सही है।

इस काल में सकल मृत्यु दर बहुत ऊँची थी, विशेष रूप से शिशु मृत्यु दर तो चौंकाने वाली थी। पर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, बार-बार प्राकृतिक आपदाओं और अकाल ने जनसामान्य को बहुत ही निर्धन बना दिया और इसके कारण उच्च मृत्यु दर का सामना करना पड़ा। अतः कथन (d) भी सही है।

6.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

30 sec • 5 pts

औपनिवेशिक शासनकाल में व्यावसायिक और आधारिक संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः

1. इस काल में सेवा क्षेत्रक विनिर्माण क्षेत्रक की तुलना में अधिक रोज़गार उपलब्ध करता था।

2. औपनिवेशिक शासनकाल के अंतर्गत देश में रेलों, पत्तनों, जल परिवहन और डाक-तार जैसी सेवाओं का विकास जन-सामान्य को अधिक सुविधाएँ देने के उद्देश्य से किया गया।

3. भारत में रेल की शुरुआत ने लोगों को भूक्षेत्रीय एवं सांस्कृतिक व्यवधानों को कम कर आसानी से लंबी यात्राएँ करने के अवसर दिये।

4. भारत में रेल की शुरुआत से भारतीय कृषि के व्यावसायीकरण को बढ़ावा मिला।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

केवल 1, 2 और 3

केवल 2 और 4

केवल 1, 3 और 4

1, 2, 3 और 4

Answer explanation

Explanation

व्याख्याः

कृषि सबसे बड़ा व्यवसाय था जो 70 से 75 प्रतिशत जनसंख्या को रोज़गार देता था, जबकि विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्रकों में क्रमशः 10 प्रतिशत और 15 से 20 प्रतिशत जन-समुदाय को रोज़गार मिल पा रहा था। अतः कथन 1 सही है।

औपनिवेशिक शासनकाल के अंतर्गत देश में रेलों, पत्तनों, जल परिवहन और डाक-तार जैसी सेवाओं का विकास हुआ परंतु इसका उद्देश्य जन-सामान्य को अधिक सुविधाएँ देना नहीं बल्कि औपनिवेशिक हितों को साधना था। सड़कों तथा रेलों, आतंरिक व्यापार और समुद्री जलमार्गों का विकास सेनाओं के आवागमन एवं कच्चे माल को बंदरगाह तक पहुँचाने के लिये किया गया जबकि तार व्यवस्था का विकास कानून व्यवस्था को मज़बूती प्रदान करने के लिये किया गया। अतः कथन 2 गलत है।

रेलों की शुरुआत भले ही जनमानस को सविधा देने के लिये नहीं की गई थी परंतु फिर भी इसने भारत की अर्थव्यवस्था की संरचना को दो महत्त्वपूर्ण तरीकों से प्रभावित किया। एक तो इसने लोगों को भूक्षेत्रीय एवं सांस्कृतिक व्यवधानों को कम कर आसानी से लंबी यात्राएँ करने के अवसर दिये। दूसरे इससे भारतीय कृषि के व्यावसायीकरण को बढ़ावा मिला। किंतु व्यावसायीकरण का भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के स्वरूप पर विपरीत प्रभाव पड़ा। भारत में निर्यात का स्तर तो बढ़ा परंतु इसका लाभ भारतवासियों को नहीं मिला। अतः सांस्कृतिक लाभ व्यापक होते हुए भी ये देश की आर्थिक हानि की भरपाई में सक्षम नहीं थे। अतः कथन 3 और 4 सही हैं।

7.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

30 sec • 5 pts

भारत में ब्रिटिश शासन के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान साक्षरता दर उच्च थी

भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान शिशु मृत्यु दर अधिक थी

भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान जीवन प्रत्याशा दर उच्च थी

भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान महिला साक्षरता दर उच्च थी

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