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Worksheets3. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_1.24 – 1.38
Total questions: 51
Worksheet time: 54mins
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कृपया यहाँ अपनी आयु लिखें ।
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गुड़ाका शब्द से आपका क्या अभिप्राय है ?
अज्ञान
मूर्खता
निद्रा
असभ्य
भक्त का मुख्य लक्षण क्या होता है ?
वह समस्त जीवों के प्रति सदैव दयालु होता है ।
वह अपने स्वामी कृष्ण को कभी नहीं भूलता है ।
वह वैष्ण्वों की आज्ञा का पालन करता है ।
वह वैदिक विधि विधानों में पारंगत होता है ।
श्रील प्रभुपाद के अनुसार, भक्त नींद व अज्ञान पर कैसे विजय प्राप्त कर सकता है ?
वरिष्ठ भक्तों का संग प्राप्त करके
गुरु पदाश्रय प्राप्त करके
कृष्ण के अनवरत् चिन्तन द्वारा
चिकित्सीय सहायता द्वारा
श्रीमद्भगवद्गीता आदि दिव्य ग्रंथों को समझने के लिए क्या करना चाहिए ?
भगवान् से कृपावृष्टि के लिए विनम्र प्रार्थना करना ।
भगवद् स्वरूप दिव्य ग्रंथों से कृपावृष्टि के लिए विनम्र प्रार्थना करना ।
आध्यात्मिक गुरु से कृपावृष्टि के लिए विनम्र प्रार्थना करना ।
श्रील व्यासदेव जी से कृपावृष्टि के लिए विनम्र प्रार्थना करना ।
श्रीकृष्ण को अर्जुन के मंतव्य का अनुमान कैसे लग गया ?
क्योंकि वह ऋषिकेश हैं ।
क्योंकि वह गोविन्द हैं ।
क्योंकि वह हृषिकेश हैं ।
क्योंकि वह मुकुंद हैं ।
कलियुग के युग धर्म हरिनाम संकीर्तन के श्रीकृष्ण महामंत्र को पहचानें ।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे । हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।।
हरे कृष्ण हरे राम हरे कृष्ण हरे राम हरे हरे । हरे कृष्ण हरे राम हरे कृष्ण हरे राम हरे हरे ।।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण राम राम हरे हरे । हरे राम हरे राम कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।।
महीक्षिताम् शब्द का क्या अर्थ है ?
संसार भर के राजा
संसार भर के योद्धा
संसार भर के विद्वान्
संसार भर के पक्षी
श्रीमद्भगवद्गीता में 1.25 श्लोक का क्या महत्त्व है ?
इस श्लोक में, श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा "हे पार्थ! यहाँ एकत्र सारे कुरुओं को देखो ।"
इस श्लोक में, श्रीकृष्ण ने अर्जुन के रथ को दोनों सेनाओं के मध्य खड़ा कर दिया ।
इस श्लोक में, श्रीकृष्ण ने अर्जुन के ज्ञान को आच्छादित करके उसे मोहित कर दिया ।
इस श्लोक में, श्रीकृष्ण ने भगवद्गीता के उपदेश के लिए आधार तैयार किया है ।
श्रीमद्भगवद्गीता में 1.25 श्लोक के वास्तविक वक्ता कौन हैं ?
संजय
श्रीभगवान्
अर्जुन
धृतराष्ट्र
श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक 1.26 के अनुसार अर्जुन युद्ध क्षेत्र में अपने किन शुभचिंतकों को देख सका ?
विचित्रवीर्य
कृतवर्मा
दुर्योधन
जयद्रथ
अब्रवीत शब्द का क्या अर्थ है ?
सुनना
चीखना
बोलना
वाक्पटुता
एक भक्त का वो क्या विशिष्ट गुण है जो उसे कर्मियों, ज्ञानियों व योगियों से पृथक करता है ?
कृष्णैक शरणं
कृष्णैक ईर्ष्यां
कृष्णैक विस्मृतिं
कृष्णैक श्रद्धां
अर्जुन किसकी विभिन्न श्रेणियों को देखकर करुणा से अभिभूत हो गया ?
योद्धाओं की
सेनानायकों की
सम्बन्धियों की
शुभचिंतकों की
अर्जुन के अंगों के कांपने और उसके मुख के सूखने का क्या कारण था ?
उसके हृदय की दुर्बलता
उसके हृदय की कोमलता
उसके हृदय की असहजता
उसके हृदय की असमर्थता
भौतिक शिक्षा तथा आध्यात्मिक ज्ञान में क्या प्रमुख भेद है ?
सहिष्णुता और असहिष्णुता का
अभाव और प्रभाव का
न्यूनता और अधिकता का
क्षुण्ण्ता और अक्षुण्णता का
श्रीमद्भागवतम् में कहा गया है कि "वह मानसिक धरातल पर मँडराता रहता है और जवलंत माया के द्वारा अवश्य ही आकृष्ट होता है ।" यह कथन किसके विषय में कहा गया है ?
भक्त
अभक्त
शरणागत्
सेवक
इन्द्रप्रस्थ पहले क्या था ?
माण्डव वन
पाण्डव वन
काण्डव वन
खाण्डव वन
शरीर में भौतिक कम्पन का क्या कारण होता है ?
आर्थिक भय
सामाजिक भय
तांत्रिक भय
भौतिक भय
अर्जुन को युद्ध के फलस्वरूप किसके कारण दिखाई दे थे ?
मंगल के कारण
अमंगल के कारण
सर्वनाश के कारण
रिश्तों के हनन के कारण
अर्जुन की आत्मविस्मृति का क्या कारण था ?
मन की दुर्बलता
मन की कोमलता
मन की असहजता
मन की असमर्थता
अर्जुन के विषाद् योग का प्रमुख कारण क्या था ?
दुर्बुद्धि
आत्मबुद्धि
देहात्मबुद्धि
गुह्यात्मबुद्धि
इनमें से देहात्मबुद्धि का कौन सा लक्ष्ण नहीं है ?
स्वयँ को आत्मा न मानकर, शरीर समझना ।
स्वयँ को शरीर से जुड़ी जड़ और चेतन हर वस्तु का स्वामी समझना ।
स्वयँ को कर्मों का कर्त्ता एवं कर्मफलों का भोक्ता जानना ।
स्वयँ से अथातो ब्रह्म जिज्ञासा सम्बन्धित प्रश्न करना ।
भय तथा मानसिक असन्तुलन किन व्यक्तियों में उत्पन्न होता है ?
मानसिक रोगियों में
भौतिकतावादियों में
आध्यात्मवादियों में
रूढ़िवादियों में
प्राणी की परमात्मा में रूचि क्यों नहीं होती है ?
शून्यता में अत्याधिक रूचि के कारण
भौतिक विषयों में आसक्ति के कारण
वैदिक ज्ञान के प्रति अनासक्ति के कारण
वैदिक शास्त्रों के प्रति अनभिज्ञता के कारण
अर्जुन का अपने स्वार्थ के प्रति अज्ञान का क्या कारण था ?
भगवान् की अवज्ञा
भगवान् की अवहेलना
भगवान् की इच्छा
भगवान् की शरण
हम भौतिक वस्तुओं के अर्जन के लिए इतना कठिन परिश्रम क्यों करते हैं ?
ताकि हम अपने वर्चस्व का दिखावा कर सकें ।
ताकि हम सुख सुविधा सम्पन्न इन्द्रियभोग कर सकें ।
ताकि हम सबसे अधिक सम्पत्ति संग्रहित कर सकें ।
ताकि हम अपना आधिपत्य बढ़ा सकें ।
श्लोक संख्या 1.32-35 में, अर्जुन भगवान् श्रीकृष्ण को किन-किन नामों से सम्बोधित करता है ?
गोविन्द, मधुसूदन, जनार्दन
गोविन्द, माधव, जनार्दन
गोविन्द, मुकुन्द, जनार्दन
गोविन्द, कृष्ण, जनार्दन
श्लोक संख्या 1.32-35 में, अर्जुन भगवान् श्रीकृष्ण को क्या संकेत कर रहा था ?
उसके स्वजनों की युद्ध में रक्षा करने का
उसके रथ का उचित सञ्चालन करने का
उसकी इन्द्रियों को तृप्त करने का
उसके स्वामित्व की भावना को समझने का
श्रील प्रभुपाद ने श्लोक संख्या 1.32-35 में किस रहस्य का उद्घाटन किया है ?
गोविन्द का कर्त्तव्य है हमारी हर इच्छा को पूरा करना ।
गोविन्द हमारी इन्द्रियों को तुष्ट करने के लिए नहीं हैं ।
गोविन्द इन्द्रियों को तुष्ट करने वाले स्वामी हैं ।
गोविन्द हमारे स्वामी हैं और हम उनके सेवक हैं ।
श्रील प्रभुपाद ने श्लोक संख्या 1.32-35 में, मनुष्य की इन्द्रियों को तुष्ट करने के लिए किस वास्तविक विधि की संस्तुति की है ?
भगवान् की इन्द्रियों की प्रकृति को समझ कर
भगवान् की इन्द्रियों को तृप्त करके
भगवान् की इन्द्रियों में ध्यान केन्द्रित करके
भगवान् की इन्द्रियों से ईर्ष्या करके
भगवद्भक्त भगवान् की सेवा किस भाव से करता है ?
सकाम भाव से
योग भाव से
सर्वज्ञ के भाव से
निष्काम भाव से
अर्जुन की महाभारत के युद्ध में क्या भूमिका थी ?
वह महारथी था।
वह कुशल योद्धा था।
वह केवल निमित्त मात्र था।
वह शुद्ध भक्त था।
महाभारत के युद्ध के पीछे भगवान् की क्या योजना थी ?
भगवान् समस्त धर्मियों का नाश कर, अधर्म की पुनः स्थापना करना चाहते थे।
भगवान् समस्त अधर्मियों का नाश कर, धर्म की पुनः स्थापना करना चाहते थे।
भगवान् समस्त अधर्मियों का नाश कर, पाण्डवों को राज्य देना चाहते थे।
भगवान् समस्त अधर्मियों का नाश कर, अपनी इन्द्रियतृप्ति करना चाहते थे।
यद्यपि भगवद्भक्त दुष्टों के अत्याचारों को सहन कर लेते हैं, किन्तु भगवान् भक्तों पर दुष्टों के उत्पीड़न को क्यों नहीं सहन कर पाते हैं ?
भक्त आलस्यता के कारण
भक्त वत्सलता के कारण
भक्त सहनशीलता के कारण
भक्त विनम्रता के कारण
भगवान् तो सभी दुराचारियों वध करने के लिए उद्यत थे, परन्तु अर्जुन उन्हें क्षमा करना चाहता था। क्यों ?
क्योंकि वह भगवान् का मित्र था।
क्योंकि वे उसके स्वजन थे ।
क्योंकि वह भगवान् का शुद्ध भक्त था।
क्योंकि वह भगवान् का शिष्य था।
वह कौन सी शक्ति थी जो प्रह्लाद महाराज का उनके पिता हिरण्यकशिपु के अत्याचारों से संरक्षण करती थी ?
पितृ भक्ति की शक्ति
मातृ भक्ति की शक्ति
भगवद्भक्ति की शक्ति
शारीरिक शक्ति
वैदिक आदेशानुसार आततायी कितने प्रकार के होते हैं ?
5
6
7
8
इनमें से कौन आततायी नहीं है ?
घातक हथियार से आक्रमण करने वाला
दूसरे की भूमि हड़पने वाला
पराई स्त्री का अपहरण करने वाला
कृष्णभावनामृत का अनुशीलन करने वाला
यद्यपि राज्य के प्रशासन के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को.................प्रकृति का होना चाहिए, किन्तु उसे................. नहीं होना चाहिए।
साधु, निर्भीक
साधु, कायर
साधु, विनम्र
साधु, दबंग
भगवान् राम ने कितने वर्षों तक राज्य किया था ?
24000 वर्षों तक
36000 वर्षों तक
40000 वर्षों तक
44000 वर्षों तक
भगवान् श्रीराम की तुलना में, महाभारत के युद्ध में अर्जुन का प्रसंग क्यों विशिष्ट था ?
क्योंकि रावण बहुत आततायी था।
क्योंकि आयोध्या की प्रजा आततायी थी।
क्योंकि हिरण्यकशिपु आततायी था।
क्योंकि उसके स्वजन ही आततायी थे।
इनमें से कौन सा अर्जुन के विषाद योग का कारण नहीं है ?
दया
मानसिक अशान्ति
आनंद में अवरोध
पापकर्मों से भय
अर्जुन ने किन पक्ष-विपक्षों पर विचार कर युद्ध न करने का निर्णय किया ?
पाप-पुण्य
जय-पराजय
यश-अपयश
परिणाम-दुष्परिणाम
इनमें से अर्जुन ने युद्ध न करने के लिए श्रीकृष्ण के समक्ष कौन सा तर्क प्रस्तुत नहीं किया ?
भले ही बदले में मुझे तीनों लोक ही क्यों न मिलते हों।
भले ही क्यों न मुझे उनके चरणों में गिरकर उन्हें मनाना पड़े।
भला धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें कौन सी प्रसन्नता मिलेगी।
भले ही वे मुझे क्यों न मार डालें ?
जैसाकि आप जानते हैं कि भौतिक शरीर पञ्चमहाभूतों से निर्मित होते हैं, तो यह बताएँ कि वृक्ष योनि में कौन सा महाभूत प्रधान होता है।
अग्नि
वायु
पृथ्वी
काष्ठ
इनमें से कोई एक उन दो प्रकार के मनुष्यों में से है जो परम शक्तिशाली तथा जाज्वल्यमान सूर्यमण्डल में प्रवेश करने के योग्य होते हैं।
सन्यासी जो सामाजिक सेवाओं में लगा रहता है।
सन्यासी जो आध्यात्मिक अनुशीलन में लगा रहता है।
सन्यासी जो राजकीय सेवाओं में लगा रहता है।
सन्यासी जो आर्थिक सेवाओं में लगा रहता है।
अर्जुन ने भगवान् कृष्ण को लक्ष्मीपति कह कर क्यों सम्बोधित किया ?
ताकि कृष्ण उसे ऐसा काम करने के लिए प्रेरित न करें, जिससे अभिष्ट हो।
ताकि कृष्ण उसे ऐसा काम करने के लिए प्रेरित न करें, जिससे अशिष्ट हो।
ताकि कृष्ण उसे ऐसा काम करने के लिए प्रेरित न करें, जिससे अनिष्ट हो।
ताकि कृष्ण उसे ऐसा काम करने के लिए प्रेरित न करें, जिससे उच्छिष्ट हो।
