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Worksheetsवीतराग विज्ञान पाठशाला भाग - 2
Total questions: 10
Worksheet time: 5mins
"समयसार जिनदेव हैं, जिन प्रवचन जिनवाणि।
नियमसार निर्ग्रन्थ गुरु, करे कर्म की हानि।।"
-उक्त देव शास्त्र गुरु स्तुति के रचेता कौन है?
श्री जुगलकिशोरजी 'युगल' कोटा
डॉ. हुकमचंदजी भारिल्ल जयपुर
पंडित दौलतरामजी
पंडित अभयजी
देव-शास्त्र-गुरु स्तुति में देव की स्थापना किसमें की गई है?
प्रवचनसार
नियमसार
समयसार
योगसार
देव-शास्त्र-गुरु स्तुति में शास्त्र की स्थापना किसमें की गई है?
योगसार
समयसार
नियमसार
प्रवचनसार
देव-शास्त्र-गुरु स्तुति में गुरु की स्थापना किसमें की गई है?
नियमसार
समयसार
योगसार
प्रवचनसार
आत्मा चौरासी लाख योनियों में चक्कर क्यों काटता है?
अपने शत्रुओं को सही से नहीं पहिचाने के कारण
संसार को सही से नहीं पहिचाने के कारण
अपने परिवार को सही से नहीं पहिचाने के कारण
वीतरागी सर्वज्ञ परमात्मा को सही से नहीं पहिचाने के कारण
भगवान की वाणी कैसी नहीं है?
एकांतमय
स्याद्वादमय
नयमय
अनेकांतमय
जिनवाणी में किसका पोषण किया जाता है?
राग का
कषाय का
वीतरागता का
विकथा का
हमारे गुरु में पाए जानेवाले गुण है-
निर्ग्रंथता
दिगम्बर
समता
ये सभी गुण
दर्शन दाता देव है, -------- सम्यकज्ञान।
चारित्र
आतम
गुरु
आगम
हो नमस्कार --------को, हो नमस्कार जिनवर वाणी
गुरुवर
देव
शुद्धातम
प्रभुवर
