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8. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_2.33 – 2.46

Total questions: 51

Worksheet time: 1hrs 14mins

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Class
Date
1.

कृपया यहाँ अपना नाम लिखें ।

4 lines
2.

कृपया यहाँ अपनी आयु लिखें ।

4 lines
3.

कृपया यहाँ अपना मोबाईल न० लिखें ।

4 lines
4.

कृपया यहाँ अपना पता लिखें ।

4 lines
5.

श्लोक संख्या 2.33 में भगवान् श्रीकृष्ण के उपदेशानुसार, यदि कोई मनुष्य स्वधर्म का पालन नहीं करता है तो निश्चित ही उसे कर्तव्य की उपेक्षा (Neglect)करने का पाप लगता है ऐसा क्यों ?

a)

क्योंकि भौतिक जगत् में स्वधर्म का विधान जीव के क्रमिक शुद्धिकरण के लिए हुआ है ।

b)

क्योंकि ऐसा करने से जीवों की परस्पर क्रमिक शुद्धिकरण (Purification) की प्रक्रिया अवरुद्ध हो जाती है ।

c)

क्योंकि यदि अर्जुन स्वधर्म का पालन नहीं करता है तो हमें गीतोपदेश प्राप्त नहीं होते ।

d)

श्रीकृष्ण ने ऐसा केवल अर्जुन को स्वधर्म पालन हेतु प्रेरित करने के लिए कहा ।

6.

शिवजी ने अर्जुन को कौन सा अस्त्र प्रदान किया था ?

a)

पर्वतास्त्र

b)

प्रस्वापास्त्र

c)

पाशुपतास्त्र

d)

ब्रह्मास्त्र

7.

अर्जुन ने स्वर्गलोक में देवताओं की सहायता किस प्रकार की ?

a)

अकेले ही 60,000 असुरों का वध करके ।

b)

स्वर्गलोक की अप्सराओं को नृत्य सिखाकर ।

c)

देवताओं के आपसी झगड़े को सुलझाकर ।

d)

देवताओं और असुरों के झगड़े को सुलझाकर ।

8.

भगवान् श्रीकृष्ण को विजयसखा नाम से क्यों जाना जाता है ?

a)

क्योंकि श्रीकृष्ण अपने द्वारपाल जय-विजय के सखा हैं ।

b)

क्योंकि विजय सदैव श्रीकृष्ण के साथ सखा रूप में रहता है ।

c)

क्योंकि श्रीकृष्ण अर्जुन (विजय) के सखा थे ।

d)

श्रीकृष्ण का ऐसा कोई नाम नहीं था ।

9.

श्रीमद्भागवतम् के श्लोक संख्या 11.5.41 में श्रीकृष्ण को मुकुन्द कहकर क्यों संबोधित किया गया है ?

a)

क्योंकि श्रीकृष्ण एक नाम मुकुन्द भी है जो माता यशोदा ने उन्हें दिया है ।

b)

क्योंकि श्रीकृष्ण ने अपने माता-पिता देवकी व वासुदेव जी को कारागार से मुक्त करवाया था ।

c)

क्योंकि श्रीकृष्ण ने मथुरावासियों को कंस के अत्याचारों से मुक्त करवाया था ।

d)

क्योंकि श्रीकृष्ण अपनी शरण ग्रहण करने वाले को समस्त ऋणों से मुक्त कर देते हैं ।

10.

श्लोक संख्या 2.39 में भगवान् श्रीकृष्ण ने किस ज्ञान के अनुसार कर्म करने की विवेचना की है ? जो मनुष्य को कर्म के बंधनों से मुक्त करवा सकता है ।

a)

आत्मा के वैश्लेषिक अध्ययन का ज्ञान

b)

सांख्य योग से कर्म करने का ज्ञान

c)

निष्काम भाव से कर्म करने का ज्ञान

d)

स्वधर्म के पालन का ज्ञान

11.

भगवान् श्रीकृष्ण श्लोक संख्या 2.39 से 2.53 तक किस विषय में ज्ञान देते हैं ?

a)

बुद्धियोग

b)

सांख्ययोग

c)

विधि योग

d)

कपिल योग

12.

कर्म बंधन क्या होता है और यह कैसे उत्पन्न होता है ?

a)

कर्म करने की विधि ही कर्म बंधन होता है और इसी विधि के निर्णय से उत्पन्न होता है ।

b)

कर्म बंधन का बोध के केवल आलसियों को ही होता है, क्योंकि यह इन्द्रिय बोध से उत्पन्न होता है ।

c)

कर्मफल ही कर्म बंधन होता है और यह कर्मफल को भोगने की इच्छा से उत्पन्न होता है ।

d)

कर्म बंधन आत्मा से भी सूक्ष्म होता है अत: यह अनुभवगम्य नहीं होता है ।

13.

वैदिक शब्दकोश को किस नाम से जाना जाता है ?

a)

अभिव्यक्ति

b)

निरुत्तर

c)

नैष्ठिकी

d)

निरुक्ति

14.

सांख्ययोग का क्या अर्थ है ?

a)

सांख्ययोग अर्थात् भौतिक शरीर तथा आत्मा की वास्तविक प्रकृति का वर्णन ।

b)

सांख्ययोग अर्थात् भौतिक शरीर तथा आत्मा की वास्तविक प्रकृति का वर्णन करने वाला दर्शन ।

c)

सांख्ययोग अर्थात् भौतिक शरीर तथा इन्द्रिय निग्रह वास्तविक प्रकृति का वर्णन करने वाला दर्शन ।

d)

सांख्ययोग अर्थात् भौतिक शरीर तथा इन्द्रिय निग्रह वास्तविक प्रकृति का वर्णन ।

15.

योग का क्या अर्थ है ?

a)

योग अर्थात् शारीरिक व्यायाम पद्धति

b)

योग अर्थात् अंकों का जोड़

c)

योग अर्थात् इन्द्रियों का निग्रह व भगवान् से सम्पर्क

d)

योग अर्थात् अष्टांग योग या हठयोग

16.

यह कैसे सिद्ध होता है कि अर्जुन का युद्ध न करने का प्रस्ताव इन्द्रियतृप्ति पर आधारित था ?

a)

क्योंकि अर्जुन इन्द्र महान पुत्र था इसीलिए इन्द्रियों को महत्त्व दे रहा था ।

b)

क्योंकि अर्जुन महाभारत के युद्ध को अस्त्र-शस्त्रों के बजाय इन्द्रियों से लड़ना चाहता है ।

c)

क्योंकि अर्जुन ने अपने जीवन में इन्द्रियतृप्ति की कभी भी उपेक्षा नहीं की ।

d)

क्योंकि अर्जुन युद्ध के प्रतिफलों का विश्लेषण अपने इन्द्रिय बोध से कर रहा था ।

17.

इन्द्रियतृप्ति की चरम सीमा क्या है ?

a)

भगवान् कृष्ण की शरण ग्रहण करना ।

b)

भौतिक जगत् के असीम आनन्द का उपभोग करना ।

c)

इन्द्रियों की आनंदमयी सूक्ष्म प्रकृति को समझना ।

d)

भगवान् की आनंदमयी बृहद प्रकृति को समझना ।

18.

बुद्धियोग से क्या अभिप्राय है ?

a)

बौद्धिक शक्ति के वर्धन के लिए योगासनों का अभ्यास करना ।

b)

आध्यात्मिक बौद्धिक बल प्राप्त करने के लिए उद्यम (Effort) करना ।

c)

कृष्णभावनामृत में, पूर्ण आनंद तथा भक्ति के ज्ञान में कर्म करना ।

d)

योग की समस्त पद्धतियों का बुद्धि पूर्वक अनुपालन करना ।

19.

बुद्धियोग या कर्मयोग का भक्तियोग में क्या स्थान है ?

a)

बुद्धियोग या कर्मयोग भक्तियोग की प्रथमावस्था है ।

b)

बुद्धियोग या कर्मयोग भक्तियोग का द्वार है ।

c)

बुद्धियोग या कर्मयोग भक्तियोग की नियमावली है ।

d)

बुद्धियोग या कर्मयोग भक्तियोग की रीढ़ अर्थात् अभिन्न अंग है ।

20.

मनुष्य को बुद्धियोग की प्राप्ति कैसे होती है ?

a)

मनुष्य के पूर्व पुण्य कर्मों से

b)

भगवान् की विशिष्ट कृपा से

c)

शुद्ध भक्तों की सकाम सेवा से

d)

भौतिक साहित्य के अध्ययन से

21.

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान् श्रीकृष्ण नास्तिक-कपिल द्वारा प्रतिपादित अनीश्वरवादी सांख्य-योग का खण्डन किस प्रकार करते हैं ?

a)

शरीर तथा आत्मा का सांख्य-दर्शन द्वारा विस्तृत ज्ञान

b)

बुद्धियोग या कर्मयोग का सांख्य-दर्शन द्वारा विस्तृत ज्ञान

c)

योग का सांख्य-दर्शन द्वारा वैश्लेषिक अध्ययन

d)

स्वधर्म योग का सांख्य-दर्शन द्वारा वैश्लेषिक अध्ययन

22.

सांख्ययोग और भक्तियोग में क्या सम्बन्ध है ?

a)

सांख्ययोग और भक्तियोग एक-दूसरे से भिन्न हैं ।

b)

सांख्ययोग भक्तियोग का सम्पूरक है ।

c)

सांख्ययोग और भक्तियोग एक-दूसरे से अभिन्न हैं ।

d)

भक्तियोग सांख्ययोग का सम्पूरक है ।

23.

इनमें से कौन सा लक्ष्ण कृष्णभावनाभावित व्यक्ति का नहीं है ?

a)

वह भगवान् की तुष्टि के लिए कर्म करता है, चाहे वह कर्म कितना भी कठिन क्यों न हो ।

b)

वह अपने समस्त कर्म निष्काम भाव से केवल भगवान् की सेवा हेतु ही करता है ।

c)

उसे दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हेतु कोई अतिरिक्त श्रम नहीं करना होता है ।

d)

वह पारिवारिक या भौतिक सुख प्राप्त करने की इन्द्रियतृप्ति हेतु कड़ा परिश्रम करता है ।

24.

श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक संख्या 2.40 में भगवान् श्रीकृष्ण ने किस प्रयास को इंगित किया है ? जिसमें न तो हानि होती है और न ही जिसका ह्रास होता है ।

a)

कृष्णभावनामृत में कर्म करना ।

b)

स्वधर्म का पालन करना ।

c)

कौरवों के संहार के लिए युद्ध करना ।

d)

भौतिक इन्द्रियों की तृप्ति के कर्म करना ।

25.

कृष्णभावनामृत क्या है ?

a)

ज्ञानयोग अर्थात् सायुज्य मुक्ति का पथ कृष्णभावनामृत कहलाता है ।

b)

ध्यानयोग अर्थात् इन्द्रिय निग्रह का पथ कृष्णभावनामृत कहलाता है ।

c)

भगवान् श्रीकृष्ण से पुनःयोग का पथ कृष्णभावनामृत कहलाता है जिसे भक्तियोग भी कहते हैं ।

d)

भौतिक इन्द्रियों की चरमावस्था तक तृप्ति का पथ कृष्णभावनामृत कहलाता है ।

26.

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार इस जीवन में मेरे द्वारा अर्जित भौतिक ज्ञान या उसकी उपाधियाँ को मैं अपने अगले मनुष्य जीवन में प्रयोग नहीं कर सकता हूँ । ऐसा क्यों ?

a)

क्योंकि भौतिक ज्ञान अवैज्ञानिक, अपूर्ण, अवास्तविक, क्षुण्ण (Destructible) होता है ।

b)

क्योंकि यह जीवात्मा के आध्यात्मिक स्वरुप का अवयव (Constituent) नहीं होता है ।

c)

क्योंकि जीवात्मा इन उपाधियों को देहान्तरण की प्रक्रिया में अपने साथ नहीं रख सकता है ।

d)

क्योंकि जीवात्मा बहुत आलसी होता है अत: वह सब कुछ भूल जाता है ।

27.

कृष्णभावनामृत में प्रारम्भ किया जाने वाला कोई भी कार्य अधूरा रहकर भी स्थायी प्रभाव डालता है । ऐसा क्यों ?

a)

क्योंकि कृष्णभावनामृत वैज्ञानिक, पूर्ण, वास्तविक, अक्षुण्ण (Indestructible) होता है ।

b)

क्योंकि कृष्णभावनामृत वैष्णवाचार्यों द्वारा स्थापित एक व्यवहारिक (Practical) विधि है ।

c)

क्योंकि कृष्णभावनामृत भौतिक इन्द्रिय तृप्ति का परम पवित्र साधन है ।

d)

क्योंकि कृष्णभावनामृत जीवात्मा के आध्यात्मिक स्वरूप का मुख्य अवयव (Constituent) होता है ।

28.

इस भौतिक जगत् में जीव के लिए सबसे महान भय क्या है ?

a)

भौतिक शरीर के छूटने का भय

b)

स्वजनों के मरने का भय

c)

भौतिक सम्पत्ति के चोरी होने का भय

d)

भगवान् से पुनः योग का भय

29.

व्यवसायात्मिका बुद्धि क्या होती है ?

a)

भौतिक व्यवसाय के अनुरूप कार्यशैली प्रदर्शित करने वाली बुद्धि, व्यवसायात्मिका बुद्धि कहलाती है ।

b)

यह दृढ़ श्रद्धा कि कृष्णभावनामृत द्वारा मनुष्य जीवन की सर्वोच्च सिद्धि प्राप्त कर सकेगा, व्यवसायात्मिका बुद्धि कहलाती है ।

c)

भौतिक इन्द्रियतृप्ति के व्यवसायों को सुव्यवस्था से क्रियान्वित करने वाली बुद्धि, व्यवसायात्मिका बुद्धि कहलाती है ।

d)

भौतिक सुरक्षा विषयक ज्ञान अर्जित करने वाली बुद्धि, व्यवसायात्मिका बुद्धि कहलाती है ।

30.

अव्यवसायात्मिका बुद्धि का हमारे जीवन में क्या प्रभाव होता है ?

a)

हमारा जीवन में आध्यात्मिकता का संचार होता है ।

b)

हमारा जीवन भौतिकताओं से ओत-प्रोत होता है ।

c)

हमारा जीवन अशान्त होता है ।

d)

हमारा जीवन शान्त होता है ।

31.

कृष्णभावनामृत की मुख्य कसौटी क्या है ?

a)

व्यवसायात्मिका बुद्धि

b)

बुद्धि का विभाजन

c)

अव्यवसायात्मिका बुद्धि

d)

भगवद् प्रेम

32.

कृष्णभावनाभावित मनुष्य के दृढ़ निश्चय का क्या आधार होता है ?

a)

भौतिक ज्ञान ही मूल आधार होता है ।

b)

आध्यात्मिक ज्ञान ही मूल आधार होता है ।

c)

प्राकृतिक ज्ञान ही मूल आधार होता है ।

d)

स्वाभाविक ज्ञान ही मूल आधार होता है ।

33.

कृष्णभावनामृत की सर्वोच्च सिद्धि क्या है ?

a)

व्यवसायात्मिका बुद्धि का त्याग

b)

आध्यात्मिका बुद्धि का त्याग

c)

मानसिक बुद्धि का त्याग

d)

देहात्मिक बुद्धि का त्याग

34.

कृष्णभावनामृत की सर्वोच्च सिद्धि की प्राप्ति के लिए क्या मनुष्य को अतिरिक्त विधियों प्रयास करना होता है ?

a)

हाँ, अष्टाँगयोग कृष्णभावनामृत की सर्वोच्चता के लिए अपरिहार्य (Inevitable) विधि है ।

b)

नहीं, कृष्णभावनामृत का अनुशीलन करते-करते मनुष्य की समस्त अभिलाषाएँ समाप्त हो जाती हैं ।

c)

नहीं, कृष्णभावनामृत स्वत: ही सर्वसक्षम (Fully capable) विधि है ।

d)

हाँ, ज्ञानयोग कृष्णभावनामृत की सर्वोच्चता के लिए अपरिहार्य विधि है ।

35.

कृष्णभावनाभावित होने पर मनुष्य प्रत्येक प्राणी की अर्थात् अपनी, परिवार की, समाज की, मानवता की सर्वोच्च सेवा किस प्रकार कर सकता है ?

a)

क्योंकि कृष्णभावनाभावित होने पर मनुष्य इन्द्रियभोग की प्रतिस्पर्धा (Competition) में अपनी प्रतिद्वंद्वता (Rivalry) समाप्त कर देता है ।

b)

क्योंकि कृष्णभावनाभावित व्यक्ति समाज को जीवन की सर्वोच्च सिद्धि (Highest perfection of life) की ओर प्रेरित करता है ।

c)

क्योंकि कृष्णभावनाभावित व्यक्ति समाज की गन्दगी का मार्जन कर उन्हें एक सभ्य जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है ।

d)

क्योंकि कृष्णभावनाभावित व्यक्ति समाज में इन्द्रियभोग की प्रतिस्पर्धा को सुव्यवस्थित करता है ।

36.

वेदों को कौन से विभागों में बाँटा गया है ?

a)

कर्म काण्ड, ज्ञान काण्ड, उपासना काण्ड

b)

कर्म काण्ड, ध्यान काण्ड, उपासना काण्ड

c)

कर्म काण्ड, योगा काण्ड, उपासना काण्ड

d)

कर्म काण्ड, विज्ञान काण्ड, उपासना काण्ड

37.

श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक संख्या 2.42 के अनुसार वेदों में वर्णित अलंकारिक शब्दों से क्या अभिप्राय है ?

a)

वेदों में वर्णित वो विधि-विधान जिनके द्वारा देवता हमें अलंकार प्रदान करते हैं ।

b)

वेदों में वर्णित वो विधि-विधान जो मनुष्यों को सकाम कर्म के लिए आकर्षित करते हैं ।

c)

वेदों में वर्णित अलौकिक भाषा के शब्दों को अलंकारिक शब्द कहते हैं ।

d)

वेदों में वर्णित वो विधि-विधान जिनसे देवताओं को दिव्य अलंकार मिलते हैं ।

38.

यदि भगवान् का उद्देश्य जीव को भक्ति में ही लगाना है तो फिर वेदों में सकाम कर्मों का विधान क्यों किया गया है ?

a)

ताकि जीव की स्वर्गलोकों के उत्कृष्ट इन्द्रियभोगों को भोगने की इच्छा पूर्ण हो सके ।

b)

ताकि जीव इस दुखालयम् अशाश्वतं में सुख सुविधा संपन्न जीवन का भरपूर आनंद ले सके ।

c)

ताकि भगवान् अमीर और गरीब मनुष्यों में आनंदोपभोग की वस्तुओं के द्वारा पक्षपात कर सके ।

d)

ताकि जीव भौतिकभोग की चरम सीमा को प्राप्त होकर, अथातो ब्रह्म जिज्ञासा करके, आत्मा-साक्षत्कार की ओर उन्मुख हो सके ।

39.

इनमें से कौन हैं जो धार्मिक अनुष्ठानों में ही संलिप्त रहते हैं ?

a)

ज्ञानी

b)

योगी

c)

सकाम कर्मी

d)

भक्त

40.

श्रीमद्भगवद्गीता हम सामान्य मनुष्यों को क्या सिखाती है ?

a)

हमें सुनियोजित इन्द्रिय भोग करना सिखाती है ।

b)

यह कि हमारी भौतिक योजनाएँ क्यों ध्वस्त होती हैं ।

c)

हमें एक सभ्य भौतिक जीवन जीना सिखाती है ।

d)

हमें देवताओं के महत्त्व के विषय में ज्ञान देती है ।

41.

समाधि किसे कहते हैं ?

a)

अष्टांग योग की आठवीं अवस्था समाधि कहलाती है ।

b)

भूमिगत होना समाधि कहलाता है ।

c)

मौनव्रत धारण करना समाधि कहलाता है ।

d)

जब मन आत्मा को समझने में स्थिर रहता है ।

42.

यदि जीव अपने मनुष्य जीवन में वेदों के निर्णय भक्ति योग को नहीं अपनाता है तो उसका जीवन कैसा होता है ?

a)

पाश्विक

b)

पारम्परिक

c)

वैश्विक

d)

आण्विक

43.

“एक छोटे से कूप का सारा कार्य एक विशाल जलाशय से तुरन्त पूरा हो जाता है” इस कथन में कूप और विशाल जलाशय के द्वारा किसे इंगित किया गया है ?

a)

वेद और व्यवसायात्मिका बुद्धि

b)

बुद्धियोग और कृष्णभावनामृत

c)

वेद और कृष्णभावनामृत

d)

कर्मकाण्ड और वेद

44.

“इसी प्रकार वेदों के आन्तरिक तात्पर्य को जानने वाले के सारे प्रयोजन सिद्ध हो जाते हैं” इस कथन में सारे प्रयोजन से क्या अभिप्राय है ?

a)

पाताल लोक से लेकर ब्रह्मलोक तक कर्मियों की इन्द्रियभोग की समस्त इच्छाएँ

b)

इन्द्रिय तृप्ति से लेकर आत्म-साक्षात्कार की सर्वोच्च अवस्था तक

c)

इस ब्रह्माण्ड के समस्त योगियों की सिद्धि प्राप्ति की इच्छाएँ

d)

इस ब्रह्माण्ड के समस्त ज्ञानियों की ज्ञानार्जन की इच्छाएँ

45.

वेदों के अध्ययन का क्या ध्येय है ?

a)

भौतिक इन्द्रियभोग की समस्त विधियों को जानना है ।

b)

इस भौतिक जगत की संरचना व कार्य-कलापों को जानना है ।

c)

आध्यात्मिक इन्द्रियभोग की समस्त विधियों को जानना है ।

d)

समस्त गोचरागोचर के आदि कारण भगवान् श्रीकृष्ण को जानना है ।

46.

वैदिक ज्ञान की सर्वोच्च पूर्णावस्था क्या है ?

a)

प्रत्येक जीव के भीतर इन्द्रिय तृप्ति की भावना को चरम तक पहुँचाना है ।

b)

प्रत्येक जीव को योग विधियों का ज्ञान प्रदान करना है ।

c)

प्रत्येक जीव के भीतर सुप्त कृष्णभावनामृत को जागृत करना है ।

d)

प्रत्येक जीव को ज्ञान की अलंकारमयी भाषा से सुसज्जित करना है ।

47.

भगवान् श्रीकृष्ण के पवित्र नामों के जप को अंगीकार करने का सर्वोत्कृष्ट लाभ क्या है ?

a)

जीव को आत्म-साक्षात्कार के सर्वोच्च पद अर्थात् भगवत्प्रेम की प्राप्ति होती है ।

b)

जीव को आत्म-साक्षात्कार के सर्वोच्च पद अर्थात् भावावस्था की प्राप्ति होती है ।

c)

जीव को आत्म-साक्षात्कार के सर्वोच्च पद अर्थात् मानसिक शान्ति प्राप्त होती है ।

d)

जीव को आत्म-साक्षात्कार के सर्वोच्च पद अर्थात् मुक्तावस्था की प्राप्ति होती है ।

48.

वास्तविक बुद्धिमत्ता क्या होती है ?

a)

वेदों की भाषा को समझना ।

b)

वेदों के विधि-विधानों को समझना ।

c)

वेदों के अलंकारों को समझना ।

d)

वेदों के लक्ष्य को समझना ।

49.

क्या भगवान् श्रीकृष्ण के पवित्र नामों के जप को अंगीकार करने वाले व्यक्ति को कर्मयोग, ज्ञानयोग, तपयोग या ध्यानयोग इत्यादि पद्धतियों के निष्पादन (Execution) की आवश्यकता होती है ?

a)

हाँ, अन्यथा ऐसे जप से आत्म-साक्षात्कार के सर्वोच्च पद को प्राप्त करना असंभव है ।

b)

नहीं, क्योंकि पवित्र नामों के जप की कोई अतिरिक्त सहायक पद्धति नहीं है ।

c)

नहीं, ऐसा व्यक्ति पूर्ववत् ही इन सब क्रियाओं को संपन्न किया हुआ रहता है ।

d)

हाँ, व्यक्ति यदि उचित समझे तो इन पद्धतियों का भी पालन कर सकता है ।

50.

कलियुग की पतित जीवात्माओं के लिए भगवन्नाम कीर्तन की संस्तुति किसने की है ?

a)

भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु जी ने

b)

भगवान् श्री आदि शंकराचार्य जी ने

c)

भगवान् श्री महात्मा बुद्ध जी ने

d)

भगवान् श्री गुरु नानक देव जी ने

51.

सबसे बड़ा वेदान्ती व वैदिक ज्ञान की पराकाष्ठा (Culmination) प्राप्त महात्मा कौन है ?

a)

जो भगवान् द्वारा प्रदत्त वेदों के अध्ययन में आनन्द लेता है ।

b)

जो वेदों द्वारा प्रदत्त ज्ञानयोग में ही आनन्द लेता है ।

c)

जो भगवान् श्रीकृष्ण के पवित्र नामों का जप करने में आनंद लेता है ।

d)

जो वेदों में वर्णित विधि-विधानों को जानने में ही आनन्द लेता है ।