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Worksheetsरस
Total questions: 20
Worksheet time: 10mins
रस को कहा जाता है |
वाक्य
काव्य की आत्मा
व्याकरण की आत्मा
रस के अंग होते है|
9
6
4
रस की संख्या मानी गई है |
9
13
16
स्थायी भाव का अर्थ है |
आलम्बन
विभाव
प्रधान भाव
विभाव के प्रकार होते है|
2
4
6
आलम्बन विभाव के प्रकार होते है|
2
3
4
स्थायी भाव की उत्पत्ति के कारण को कहते है |
विभाव
अनुभाव
संचारी भाव
वाणी तथा अंगों के द्वारा प्रकट भाव कहलाता है|
विभाव
अनुभाव
स्थायी भाव
संचारी भावों की संख्या मानी गई है|
13
33
43
संचारी भाव का दूसरा नाम है |
आलम्बन
अनुभाव
व्यभिचारी भाव
शोक स्ठायी भाव का रस है |
करुण रस
रौद्र रस
शांत रस
वीर रस का स्थायी भाव है |
जुगुप्सा
उत्साह
रति
प्रेमी से सदैव बिछुड़ जाने पर रस उत्पन्न होता है |
श्रृंगार रस
करुण रस
रौद्र रस
रसराज कहा जाता है |
वात्सल्य रस
वीर रस
श्रृंगार रस
जेहि दिसि बैठे नारद फूली |सो दिसि तेहि न विलोकी भूली |पुनि पुनि मुनि उकसहिं अकुलाहीं |देखि दसा हरिगन मुसकाहीं | --पंक्तियों में रस है|
श्रृंगार रस
संयोग श्रृंगार रस
हास्य रस
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों न कोय |- पंक्तियों में रस है|
शांत रस
श्रृंगार रस
भक्ति रस
माँ जब जब तुम अकुलओगी | हम शीश कटाने आएँगे | पंक्तियों में रस है|
करुण रस
वात्सल्य रस
वीर रस
निसिदिन बरसत नयन हमारे,
सदा रहति पावस ऋतु हम पै जब ते स्याम सिधारे॥ पंक्तियों में रस है |
संयोग श्रृंगार
वियोग श्रृंगार
करुण रस
वह खून कहो किस मतलब का जिसमे उबाल का नाम नहीं,
वह खून कहो किस मतलब का आ सके देश के काम नहीं.---पंक्तियों
में रस है |
वीर रस
रौद्र रस
करुण रस
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो।
भोर भयो गैयन के पाछे मधुवन मोहि पठायो।--पंक्तियों में रस है |
वात्सल्य रस
करुण रस
भक्ति रस
