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27. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_6.30–6.39

Total questions: 47

Worksheet time: 1hrs 15mins

Name
Class
Date
1.

कृपया यहाँ पर अपना नाम लिखें ।

4 lines
2.

कृपया यहाँ पर अपनी आयु लिखें ।

4 lines
3.

कृपया यहाँ पर अपना मोबाईल नं0 लिखें ।

4 lines
4.

कृपया यहाँ पर अपना पता लिखें ।

4 lines
5.

श्लोक संख्या 6.30 निम्न में से क्या प्रदर्शित करता है ?

a)

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति के ज्ञान की पराकाष्ठा को प्रदर्शित करता है ।

b)

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति के कृष्ण प्रेम की पराकाष्ठा को प्रदर्शित करता है ।

c)

कृष्णभावनामृत की सर्वोच्च सिद्धि की पराकाष्ठा को प्रदर्शित करता है ।

d)

ये समस्त कथन सर्वथा सत्य हैं ।

6.

ऐसा व्यक्ति भले ही प्रकृति की पृथक्-पृथक् अभिव्यक्तियों को देखता प्रतीत हो, किन्तु प्रत्येक दशा में इस कृष्णभावनामृत से अवगत रहता है कि प्रत्येक वस्तु कृष्ण की ही शक्ति की अभिव्यक्ति है ।" इस कथन के तात्पर्य को स्पष्ट करें ।

a)

कृष्णभावनामृत के ज्ञान के कारण ऐसा व्यक्ति सत्ता, संपत्ति, प्रतिष्ठा इत्यादि छिन जाने या प्राप्त तो जाने पर विचलित नहीं होता है ।

b)

कृष्णभावनामृत के ज्ञान के कारण ऐसा व्यक्ति व्यापार में लाभ अथवा हानि हो जाने पर विचलित नहीं होता है ।

c)

कृष्णभावनामृत विज्ञान के कारण ऐसा व्यक्ति किसी परिवार में किसी के जन्म अथवा स्वजन की मृत्यु पर विचलित नहीं होता है ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

7.

कृष्णभावनामृत का मूल सिद्धांत क्या है ?

a)

भगवान् श्रीकृष्ण से ही सर्वस्व का अस्तित्व है ।

b)

कृष्णभावनाभावित होना ही मूल सिद्धांत है ।

c)

भगवान् श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा ही मूल सिद्धांत है ।

d)

यह समस्त कथन सत्य हैं ।

8.

वास्तव में कृष्णभावनामृत के योगाभ्यास से किसका विकास होता है ?

a)

कृष्ण-प्रेम

b)

आत्म-प्रेम

c)

आध्यात्म-प्रेम

d)

शुद्ध-प्रेम

9.

निम्न में से मोक्षातीत क्या है ?

a)

कृष्ण-प्रेम

b)

आत्म-प्रेम

c)

आध्यात्म-प्रेम

d)

शुद्ध-प्रेम

10.

भगवान् श्रीकृष्ण तथा भक्त के मध्य अंतरंग संबंध कब स्थापित होता है ?

a)

जब भक्त समभाव होकर भगवान् श्रीकृष्ण की शरण ग्रहण कर भक्तिपथ पर प्रगति की ओर अग्रसर होता है ।

b)

जब भक्त कृष्णभावनामृत की सर्वोच्च अवस्था प्रेममय कृष्ण से पूरित हो जाता है ।

c)

जब भक्त को भगवान् श्रीकृष्ण के अतिरिक्त समस्त वस्तुएँ अर्थहीन लगने लगे ।

d)

यह समस्त कथन सत्य हैं ।

11.

"कृष्ण में तादात्म्य आध्यात्मिक प्रलय है । भक्त कभी भी ऐसी विपदा नहीं उठाता ।" इस कथन से आपका क्या तात्पर्य है ? स्पष्ट करें ।

a)

भक्त ब्रह्म में विलीन होने के विकल्प को इसलिए नहीं चुनता है क्योंकि भक्त के अनुसार ब्रह्म में विलीन होना अध्यात्म एवं समय दोनों का अपव्यय होता है ।

b)

भक्त तो सदैव कृष्ण में ही अपना तादात्म्य चाहता है । परन्तु आध्यात्मिक जगत् को भोगने की इच्छा के कारण स्वयँ को इससे बचाता है ।

c)

भक्त ब्रह्म में विलीन होने के प्रस्ताव को इसलिए ठुकरा देता है । ताकि वह भौतिक जगत् के भोग में निरत रहकर ही भगवद्दर्शनों का निरंतर लाभ उठा सके ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

12.

भक्तों के हृदय में भगवान् श्रीकृष्ण किस रूप में स्थित होते हैं ?

a)

श्यामसुंदर रूप में

b)

चतुर्भुज नारायण रूप में

c)

परमात्मा रूप में

d)

ब्रह्म रूप में

13.

योगियों के हृदय में भगवान् श्रीकृष्ण किस रूप में स्थित होते हैं ?

a)

श्यामसुन्दर रूप में

b)

चतुर्भुज नारायण रूप में

c)

ब्रह्मा के रूप में

d)

ब्रह्म ज्योति के रूप में

14.

जो योगी भगवान् श्रीकृष्ण तथा परमात्मा को अभिन्न जानते हुए परमात्मा की भक्तिपूर्वक सेवा करता है । निम्न में से उसकी स्थिति स्पष्ट करें ।

a)

100% कृष्णभावनाभावित

b)

75% कृष्णभावनाभावित

c)

50% कृष्णभावनाभावित

d)

25% कृष्णभावनाभावित

15.

ब्रह्मा एवं देवताओं तथा हम जीवों के हृदयों में विद्यमान् परमात्माओं के मध्य अन्तर को स्पष्ट करें ।

a)

कोई अंतर नहीं होता है । समस्त जीवात्माओं के हृदय में कृष्ण एक समान रूप में विद्यमान् रहते हैं ।

b)

अलग-अलग लोकों में उपस्थित जीवात्माओं के हृदयों में कृष्ण के परमात्मा रूपी विस्तार के भिन्न-भिन्न आयाम होते हैं ।

c)

भिन्नता है, तभी तो देवताओं, मनुष्य तथा निम्न योनियों में विद्यमान् जीवात्माओं के ज्ञान तथा शक्तियों में विविधता है ।

d)

यह सभी कथन मिथ्या हैं ।

16.

योगाभ्यास में समाधि की सर्वोच्च अवस्था क्या है ?

a)

कृष्णभावनामृत

b)

मन की स्थिरता

c)

इंद्रियों का निग्रह

d)

आध्यात्मिक शांति

17.

भगवान् श्रीकृष्ण की अचिन्त्य शक्ति से आपका क्या अभिप्राय है ?

a)

जीवों को ब्रह्म में विलीन करने वाली शक्ति ।

b)

भौतिक जगत् का संचालन करने वाली शक्ति ।

c)

आध्यात्मिक जगत् का संचालन करने वाली शक्ति ।

d)

ऐसी शक्ति जो सर्वथा प्रत्येक अवस्था में जीवों की समझ से परे है ।

18.

"वह पूर्ण योगी है जो अपनी तुलना से समस्त प्राणियों की उनके सुखों तथा दुखों में वास्तविक समानता का दर्शन करता है ।" संक्षेप में इसका तात्पर्य स्पष्ट करें ।

a)

एक पूर्ण योगी अपने वास्तविक ज्ञान एवं विज्ञान के आधार पर सुख-दुख की अवस्था में संलिप्त जीवात्माओं को भगवदंश के रूप में एक समान रूप से देखता है ।

b)

एक पूर्ण योगी को अपनी वर्तमान स्थिति के तुलनात्मक अन्य जीवों के सुखों तथा दुखों की मात्रा का स्पष्ट बोध हो जाता है ।

c)

एक पूर्ण योगी अपने जीवन में घटित घटनाओं के आधार पर अन्य जीवों के भविष्य का स्पष्ट अनुमान लगा लेता है ।

d)

यह सभी कथन इसके तात्पर्य को स्पष्ट नहीं करते हैं ।

19.

इनमें से कौन स्वान्तःसुखाय सिद्धि चाहता है ?

a)

ज्ञानी

b)

योगी

c)

भक्त

d)

कर्मी

20.

निम्न में से किसकी योग पद्धति सर्वश्रेष्ठ है और क्यों ?

a)

ज्ञानी की योग पद्धति सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि वह सर्वथा ब्रह्म में अपने-अपने तादात्म्य हेतु प्रयासरत रहते हैं ।

b)

योगी की योग पद्धति सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि वह एकान्त स्थान में जाकर ध्यान योग द्वारा अपनी-अपनी मुक्ति के लिए प्रयासरत रहते हैं ।

c)

भक्त की योग पद्धति सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि वह अपने साथ-साथ अन्य जीवों को भी कृष्णभावनाभावित बनने के लिए प्रेरित करता है ।

d)

कर्मी की योग पद्धति सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि वह विशेष प्रयोजन हेतु धार्मिक अनुष्ठान करके अन्य को भी पुण्य अर्जित करने के लिए प्रेरित करता है ।

21.

भगवान् श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय में अष्टाँगयोग का वर्णन किस श्लोक शृंखला में किया है ?

a)

6.11 - 6.22

b)

6.11 - 6.32

c)

6.10 - 6.32

d)

6.12 - 6.25

22.

अर्जुन ने अष्टाँग योगपद्धति को अव्यवहारिक तथा असहनीय क्यों कहा ?

a)

क्योंकि अर्जुन किसी भी दृष्टि से अष्टाँगयोग को क्रियान्वित करने में पूर्णतः असमर्थ था ।

b)

अर्जुन तो अष्टाँगयोग के लिए पूर्णतः समर्थ था, परन्तु वह कलियुग में जीवों की समस्त परिस्थितियों से भिज्ञ था ।

c)

क्योंकि अर्जुन कलियुग के जीवों के लिए उनकी जीवनशैली के अनुरूप एक सुगम, सरल एवं दिव्य योगपद्धति के बारे में जानने का इच्छुक था ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

23.

जीवों का अभीष्ट लक्ष्य क्या है ?

a)

मनुष्य योनि का सदुपयोग कर भगवत्प्रेम प्राप्ति करना ।

b)

मनुष्य योनि का सदुपयोग कर भगवद्धाम वापस लौट जाना ।

c)

मनुष्य योनि का सदुपयोग कारण भगवान श्री कृष्ण की दिव्य प्रेममयी भक्ति रूपी सेवा प्राप्त करना ।

d)

यह सभी कथन जीवों के अभीष्ट लक्ष्य को प्रस्तुत करते हैं ।

24.

निम्न में से कौन सी विशेषता संयमित मन की है ?

a)

उच्छृंखल

b)

हठीला

c)

चंचल

d)

शान्त

25.

अर्जुन ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक संख्या 6.34 में मन के संदर्भ में क्या उपमा दी है ?

a)

मन को वश में करना वायु को वश में करने से अधिक कठिन है ।

b)

मन को वश में करना वाणी को वश में करने से अधिक कठिन है ।

c)

मन को वश में करना आयु को वश में करने से अधिक कठिन है ।

d)

मन को वश में करना विद्युत को वश में करने से अधिक कठिन है ।

26.

कठोपनिषद् के आधार पर निम्नलिखित में से उचित विवेचना को पहचानें ।

a)

भौतिक शरीर (रथ) - इंद्रियाँ (घोड़े) - मन (लगाम) - बुद्धि (सारथी) - आत्मा (सवारी)

b)

इंद्रियाँ (रथ) - भौतिक शरीर (घोड़े) - मन (लगाम) - बुद्धि (सारथी) - आत्मा (सवारी)

c)

भौतिक शरीर (रथ) - इंद्रियाँ (घोड़े) - मन (लगाम) - बुद्धि (सवारी) - आत्मा (सारथी)

d)

भौतिक शरीर (रथ) - इंद्रियाँ (घोड़े) - बुद्धि (लगाम) - मन (सारथी) - आत्मा (सवारी)

27.

कठोपनिषद के अनुसार जीवात्मा को किसके द्वारा मन का नियंत्रण करना चाहिए ?

a)

बुद्धि

b)

इंद्रियाँ

c)

भौतिक शरीर

d)

शारीरिक बल

28.

श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु ने मन को वश में करने के लिए कौनसा सरलतम उपाय सुझाया है ?

a)

"हरे कृष्ण" महामंत्र का समस्त दैन्यता के साथ कीर्तन करना ।

b)

"हरे कृष्ण" महामंत्र का समस्त विद्वता के साथ कीर्तन करना ।

c)

"हरे कृष्ण" महामंत्र का समस्त मान्यता के साथ कीर्तन करना ।

d)

"हरे कृष्ण" महामंत्र का समस्त आक्रोश के साथ कीर्तन करना ।

29.

भगवान् की नवधा भक्ति इनमें से किस में व्यवहृत होती है ?

a)

कृष्णभावनामृत में

b)

अष्टांगयोग में

c)

ज्ञानयोग में

d)

तीर्थवास में

30.

मन को क्रमशः वश में करने के लिए प्रथम विधि कौन सी है ?

a)

श्रवणं

b)

कीर्तनं

c)

अर्चनं

d)

वंदनं

31.

वैराग्य का क्या अर्थ है ?

a)

पदार्थ से विरक्ति और मन का आत्मा में प्रवृत्त होना ।

b)

अपने नियत कर्मों को त्याग कर सन्यास ग्रहण करना ।

c)

अपने नियत कर्मों को त्याग कर एकांत वास करना ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

32.

मन को कृष्ण के कार्यकलापों में लगाने से अधिक कठिन क्या है ?

a)

निर्विशेष आध्यात्मिक विरक्ति

b)

मन की आत्मा के प्रति अभिव्यक्ति

c)

अष्टाँग योगपद्धति

d)

जीवात्मा की आत्मानुभूति

33.

नवधा भक्ति से उत्पन्न परमात्मा के प्रति आसक्ति क्या कहलाती है ?

a)

परेशानुभूति

b)

आत्मानुभूति

c)

विज्ञानानुभूति

d)

ज्ञानानुभूति

34.

भगवान् श्रीकृष्ण के मतानुसार किसकी सफलता ध्रुव है ?

a)

जिसका मन संयमित है और जो समुचित उपाय करता है ।

b)

जिसका मन असंयमित है और जो आत्म-साक्षात्कार के लिए कठिन से कठिन उपाय करता है ।

c)

जिसका मन निष्क्रिय होता है वह भगवान् को पहले से ही प्राप्त किए हुए रहता है ।

d)

जो वेगवान् वायु को भी वश में कर सकता है ।

35.

"अग्नि में जल डालकर उसे प्रज्वलित करने का प्रयास करना ।" श्रील प्रभुपाद जी द्वारा प्रयुक्त इस तुलनात्मक संवाद से आप क्या समझते हो ? स्पष्ट करें ।

a)

भौतिक भोग में मन को लगाकर योगाभ्यास करना ।

b)

योगाभ्यास के लिए व्यर्थ ही परिश्रम करना ।

c)

योगाभ्यास में अपने समय का अपव्यय करना ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

36.

मन को वश में करने के लिए समुचित उपाय क्या है ?

a)

कृष्णभावनामृत का अनुशीलन

b)

अष्टाँगयोग का अभ्यास

c)

ज्ञानयोग का अभ्यास

d)

हठयोग का अभ्यास

37.

आत्म-साक्षात्कार का मूलभूत नियम क्या है ?

a)

मैं यह शरीर नहीं आत्मा हूँ ।

b)

मैं यह सुंदर शरीर हूँ ।

c)

मैं वास्तव में व्यष्टि मनुष्य हूँ ।

d)

मैं भी भगवान् बन सकता हूँ ।

38.

"आत्म-साक्षात्कार की खोज ज्ञान द्वारा की जाती है ।" कृपया यह बताएँ कि कौन से ज्ञान द्वारा की जाती है ?

a)

मानसिक चिंतन द्वारा प्राप्त ज्ञान से ।

b)

गुरु-परंपरा द्वारा प्राप्त ज्ञान से ।

c)

ध्यान योग अथवा भक्ति योग के योगाभ्यास द्वारा प्राप्त ज्ञान से ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

39.

योगी के असफल होने का मुख्य कारण क्या है ?

a)

योगी के हृदय में व्याप्त भौतिक भोग की इच्छाएँ ।

b)

योग की विधि विधानों का उचित पालन न कर पाना ।

c)

अपनी मानसिक कल्पना के आधार पर योग का क्रियान्वयन करना ।

d)

यह सभी योग में असफलता के मूल कारण हैं ।

40.

अर्जुन श्लोक संख्या 6.37 में अपने प्रश्न के माध्यम से भगवान् श्रीकृष्ण द्वारा पूर्वकथित द्वितीय अध्याय के किस श्लोक की पुनर्पुष्टि करवाना चाहते हैं ?

a)

2.20

b)

2.40

c)

2.50

d)

2.70

41.

यदि मैं ऐसा कहूँ कि योग का एक दूसरा पहलू भी है अर्थात् माया के साथ संघर्ष - तो क्या आप इसे स्वीकार करेंगे ?

a)

हाँ - भौतिक आसक्तियों से विरक्त होने के लिए कठोर संघर्ष वास्तव में माया के साथ संघर्ष होता है ।

b)

नहीं - माया तो अत्यंत दयालु वह तो योगी को भौतिक पदार्थ से विरक्ति प्राप्त करने में सहायता करती है ।

c)

हाँ - माया के पाश से छूटने का प्रयास करने वाले योगी का माया अपने विविध प्रलोभनों द्वारा पराभव करती है । इन प्रलोभनों से बचने के लिए योगी को कड़ा संघर्ष करना पड़ता है ।

d)

नहीं - माया तो योगी को बिना किसी अतिरिक्त प्रयत्न के समस्त भौतिक आसक्तियों से स्वयँ ही मुक्त कर देती है ।

42.

योगाच्चलितमानसः का क्या अर्थ है ?

a)

योग के पथ से विचलित होना ।

b)

योग के पथ पर चलने वाला मनुष्य ।

c)

योग का प्रचार करने वाला मनुष्य ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

43.

श्लोक संख्या 6.38 के माध्यम से अर्जुन अपने किस संशय को प्रकट करता है ?

a)

यह कि पथभ्रष्ट योगी के लिए न तो आध्यात्मिक और न ही भौतिक जगत् में कोई स्थान रहता होगा ।

b)

यह कि पथभ्रष्ट योगी के लिए न तो स्वर्गलोक और न ही मृत्युलोक में कोई स्थान रहता होगा ।

c)

यह कि पथभ्रष्ट योगी के लिए न तो स्वर्गलोक और न ही पाताललोक में कोई स्थान रहता होगा ।

d)

यह कि पथभ्रष्ट योगी के लिए न तो आध्यात्मिक जगत् के ब्रह्मांडों में और न ही भौतिक जगत् के ब्रह्मांडों में कोई स्थान रहता होगा ।

44.

ब्रह्मण: पथि ब्रह्म-साक्षात्कार का मार्ग किसे प्राप्त होता है ?

a)

जो जीवात्मा स्वयँ को भगवान् का अभिन्न अंश जान लेता है ।

b)

जो जीवात्मा स्वयँ को भगवान् के समतुल्य मान लेता है ।

c)

जो जीवात्मा स्वयँ को भगवान् क प्रतिद्वंद्वी मान लेता है ।

d)

जो जीवात्मा स्वयँ को परम भोक्ता के रूप में जान लेता है ।

45.

निम्न में से कौन सा योगी न तो आध्यात्मिक जगत् के सुख और न ही भौतिक जगत् के सुख के योग्य रहता है ?

a)

ब्रह्मवादी

b)

परमात्मावादी

c)

भक्त

d)

सकाम कर्मी

46.

श्लोक संख्या 6.39 से निम्न में से क्या स्पष्ट होता है ?

a)

अर्जुन का भगवान् श्रीकृष्ण विषयक पूर्ण ज्ञान ।

b)

अर्जुन का भगवान् श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण ।

c)

अर्जुन की भगवान् श्रीकृष्ण के साथ मित्रता की पराकाष्ठा ।

d)

अर्जुन का अष्टाँगयोग के विषय में ज्ञान ।

47.

भगवान् श्रीकृष्ण ने भगवद्गीता के प्रारंभ में क्या कहा है ?

a)

यह कि सारे जीव व्यष्टि रूप में भूतकाल में विद्यमान् थे ।

b)

यह कि सारे जीव व्यष्टि रूप में वर्तमान में भी विद्यमान् हैं ।

c)

यह कि सारे जीव भवबंधन से मुक्त होने पर भविष्य में भी व्यष्टि रूप में विद्यमान् रहेंगे ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।