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Bhagavad Gita As It Is DAY-28 (6.39-47, 7.1)

Total questions: 35

Worksheet time: 3hrs 5mins

Name
Class
Date
1.

समस्त सन्देहों का पूरा-पूरा उत्तर पाने के लिए किस का निर्णय अन्तिम तथा पूर्ण है क्योंकि वे भूत, वर्तमान तथा भविष्य के ज्ञाता हैं? (6.39)

a)

बड़े-बड़े ऋषि तथा दार्शनिक, जो प्रकृति की कृपा पर निर्भर हैं

b)

कृष्ण तथा कृष्णभावनाभावित व्यक्ति

2.

यदि कोई समस्त भौतिक आशाओं को त्याग कर भगवान् की शरण में जाता है किन्तु सिद्धि प्राप्त नहीं कर पाता, तो क्या परिणाम होगा? (6.40)

a)

भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से क्षति पहुँचती है

b)

पापफल भोगना पड़ता है व इस लोक में और परलोक में भी विनाश होता है

c)

घाटे में नहीं रहता क्योंकि शुभ कृष्णभावनामृत कभी विस्मृत नहीं होता

3.

ठीक से स्वधर्माचरण न करने का फल भोगना पड़ेगा तो ऐसे भक्तियोगी के लिए भागवत पुराण का क्या परामर्श है? (6.40)

a)

भक्ति अगले जन्म में कर लेंगे, अभी तो स्वधर्माचरण करो जैसा कि अनादि काल से अनेक योनियों में करते आये हो

b)

असफल योगी को अत्यंत चिन्ता करने की आवश्यकता है, कहीं निम्नयोनि में जन्म लेना न पड़ जाए

c)

कोई चिंता नहीं, अगले जन्म में निम्नयोनी में भी जन्म लेकर वह पहले की भाँति भक्ति करता है

4.

नियमित विभाग के कल्याण-कारी मार्ग में कौन लोग आते हैं? (6.40)

a)

जो लोग अगले जन्म या मुक्ति के ज्ञान के बिना पाशविक इन्द्रियतृप्ति में लगे रहते हैं

b)

जो लोग शास्त्रों में वर्णित कर्तव्य के सिद्धान्तों का पालन करते हैं और क्रमशः कृष्णभावनामृत को प्राप्त होते हैं

c)

जो सदा ही पशुओं की भाँति आहार, निद्रा, भय तथा मैथुन का भोग करते हुए इस दुखमय संसार में निरन्तर रहते हैं

5.

कल्याण-मार्ग के अनुयायिओं को किन वर्गों में विभाजित किया जाता है? (6.40)

a)

सकामकर्मी

b)

इन्द्रियतृप्ति की इच्छा न करने वाले

c)

मुक्ति पाने के लिए प्रयत्नशील लोग

d)

कृष्णभावनामृत के भक्त

e)

पाशविक वृत्तियों से पूर्ण

6.

किस श्रेणी का असफल योगी पवित्रात्माओं के लोकों में अनेकानेक वर्षों तक भोग करने के बाद या तो सदाचारी पुरुषों के परिवार में या कि धनवानों के कुल में जन्म लेता है? (6.41)

a)

जो बहुत थोड़ी उन्नति के बाद ही भ्रष्ट हो जाते हैं

b)

जो दीर्घकाल तक योगाभ्यास के बाद भ्रष्ट होते हैं

7.

योगाभ्यास का वास्तविक उद्देश्य _____________ है | (6.41)

a)

कृष्णभावनामृत की सर्वोच्च सिद्धि प्राप्त करना

b)

भौतिक प्रलोभनों के कारण असफल होना

c)

भौतिक इच्छाओं की पूर्ति करना

8.

दीर्घकाल तक योग करने के बाद असफल रहे व्यक्ति के योगियों के बुद्धिमान कुल में जन्म लेने की प्रशंसा क्यों की गई है? (6.42)

a)

इस संसार में ऐसा जन्म दुर्लभ है

b)

प्रारम्भ से ही आध्यात्मिक प्रोत्साहन प्राप्त होता है

c)

परम्परा तथा प्रशिक्षण के कारण श्रद्धावान होते हैं

d)

बचपन से ही भगवद्भक्ति करने का प्रशिक्षण दिया जाता है

e)

वे गुरु बनते हैं

9.

योगियों के परिवारों में जन्म लेने का अवसर प्राप्त होने के लिए किस-किसका उदाहरण दिया गया है? (6.42)

a)

वैष्णव सार्वभौम जगन्नाथ दास बाबाजी महाराज

b)

सच्चिदानन्द भक्तिविनोद ठाकुर

c)

साक्षादवैराग्यमूर्ति गौरकिशोर दास बाबाजी महाराज

d)

श्रीश्रीमद्भक्तिसिद्धान्त सरस्वती गोस्वामी महाराज

e)

अभयचरणारविन्द भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद

10.

पूर्व दिव्यचेतना की पुनःप्राप्ति के लिए उत्तम जन्म के उदाहरणस्वरूप कौन हैं? (6.43)

a)

राजा राम

b)

जड़ भरत

c)

महाराज परीक्षित

d)

असुरेन्द्र हिरण्यकशिपु

11.

विश्वभर के सम्राट राजा भरत के कारण इलावृतवर्ष देवताओं के बीच किस नाम से विख्यात हुआ? (6.43)

a)

भारतवर्ष

b)

महाभारतवर्ष

c)

भरतवर्ष

d)

भरतावर्ष

12.

राजा भरत को कौन से जन्म में उत्तम ब्राह्मण कुल में जन्म मिला? (6.43)

a)

5

b)

3

c)

4

d)

7

13.

राजा भरत के हिरण बनने व फिर जड़ भरत के रूप में जन्म लेने से क्या पता चलता है? (6.43)

a)

दिव्य प्रयास अथवा योगाभ्यास कभी व्यर्थ नहीं जाता

b)

दिव्य प्रयास अथवा योगाभ्यास भी कोई काम नहीं आता

14.

दीर्घकाल तक योगाभ्यास किया, असफल होने पर अच्छा जन्म भी प्राप्त किया, पर फिर भी भक्तियोग के प्रति आकृष्ट न हुआ तो? (6.44)

a)

तो क्या कर सकते हैं, बलपूर्वक तो भगवान् भी कुछ नहीं कर सकते

b)

अपने पूर्वजन्म की दैवी चेतना से वह न चाहते हुए भी स्वतः योग के नियमों की ओर आकर्षित होता है

15.

उन्नत योगीजन किस के प्रति अधिक आकृष्ट नहीं होते? (6.44)

a)

शास्त्रों के अनुष्ठानों के प्रति

b)

योग-नियमों के प्रति

16.

श्रीमद्भागवत (3.33.7) के अनुसार उन्नत योगी वैदिक अनुष्ठानों की अवहेलना क्यों करते हैं? (6.44)

a)

वे भगवान् के पवित्र नाम का जप करते हैं

b)

वे अध्यात्मिक जीवन में अत्यधिक प्रगत होते हैं

c)

वे सभी प्रकार के तप और यज्ञ कर चुके होते हैं

d)

वे तीर्थस्थानों में स्नान कर चुके होते हैं

e)

वे समस्त शास्त्रों का अध्ययन कर चुके होते हैं

17.

चाण्डालों के परिवारों में जन्म लेकर भी अध्यात्मिक जीवन में अत्यधिक प्रगत होने के लिए किसका उदाहरण दिया गया है? (6.44)

a)

नामाचार्य ठाकुर हरिदास जो मुस्लिम परिवार से थे

b)

प्रह्लाद महाराज जो असुरकुल में पैदा हुए थे

c)

नारद मुनि जो पूर्व जन्म में दासी के पुत्र थे

d)

राय रामानन्द जो कायस्थ परिवार से थे

18.

असफल योगी किस प्रकार अंततः सिद्धि-लाभ करके परम गन्तव्य को प्राप्त करता है? (6.45)

a)

अपने को समस्त भौतिक कल्मष से शुद्ध कर लेता है

b)

दृढ संकल्प करके अधूरे कार्य को करने में लगता है

c)

अनेकानेक जन्मों के अभ्यास के पश्चात्

d)

मोहमय द्वन्द्वों से पूर्णतया मुक्त होकर

19.

"योगी पुरुष तपस्वी से, ज्ञानी से तथा सकामकर्मी से बढ़कर होता है | अतः हे अर्जुन! तुम सभी प्रकार से योगी बनो |" - यहां अर्जुन को कौन सा योगी बनने के लिए कहा जा रहा है? (6.46)

a)

कर्मयोगी

b)

ज्ञानयोगी

c)

ध्यानयोगी

d)

भक्तियोगी

20.

इनमें से क्या सही है? (6.46)

a)

अपनी चेतना को परमसत्य के साथ जोड़ना योग कहलाता है

b)

मुख्यतः सकामकर्मों से सम्बन्धित योगपद्धति कर्मयोग है

c)

चिन्तन से सम्बन्धित योगपद्धति ज्ञानयोग कहलाती है

d)

भगवान् की भक्ति से सम्बन्धित योगपद्धति भक्तियोग है

e)

आत्मा का परमात्मा में एकाकार हो जाना योग है

21.

भक्तियोग के बिना संपन्न की गयी अन्य विधियों में क्या समस्या है? (6.46)

a)

आत्मज्ञान के बिना तपस्या अपूर्ण है

b)

परमेश्वर के प्रति समर्पित हुए बिना ज्ञानयोग अपूर्ण है

c)

सकामकर्म कृष्णभावनामृत के बिना समय का अपव्यय है

22.

कैसे कह सकते हैं कि भगवान् ने अर्जुन को अन्य योगियों के बजाय भक्तियोगी बनने के लिए उत्साहित किया? (6.46)

a)

भगवान् ने कहा योगी तपस्वी से बढ़कर होता है

b)

भगवान् ने कहा योगी ज्ञानी से बढ़कर होता है

c)

भगवान् ने कहा योगी सकामकर्मी से बढ़कर है

d)

भगवान् ने योगी को भक्तियोगी से श्रेष्ठ नहीं कहा

e)

इस योगी को भक्तियोगी के रूप में (6.47) बताया है

23.

श्रीभगवान् के अनुसार समस्त योगियों में से सर्वोच्च कौन है? (6.47)

a)

जो योगी अत्यन्त श्रद्धापूर्वक मेरे परायण है

b)

अपने अन्तःकरण में मेरे विषय में सोचता है

c)

मेरी दिव्य प्रेमाभक्ति करता है

d)

मुझसे परम अन्तरंग रूप में युक्त रहता है

24.

जो मनुष्य अपने जीवनदाता आदि-भगवान् की सेवा नहीं करता और अपने कर्तव्य में शिथिलता बरतता है, उसका वैदिक साहित्य में किस प्रकार वर्णन किया जाता है? (6.47)

a)

वह थोड़ा अशिष्ट है, इससे अधिक कुछ नहीं

b)

उसकी तो पूरी तरह भर्त्सना की जाती है

c)

वह निश्चित रूप से अपनी स्वाभाविक स्थिति से नीचे गिरता है

25.

"भजन्ति" और "पूजन" शब्दों में क्या अंतर है? (6.47)

a)

भजते भज् धातु से बना है जिसका अर्थ है - सेवा करना

b)

पूजन से केवल पूजा करना व सम्मान करना सूचित होता है

c)

भजन्ति का प्रयोग परमेश्वर के लिए ही किया जा सकता है

d)

पूजन का प्रयोग देवताओं या अन्य जीव के लिए होता है

26.

आत्म-साक्षात्कार के लम्बे मार्ग का आरम्भ क्या है? (6.47)

a)

निष्काम कर्मयोग

b)

ज्ञानयोग

c)

अष्टांगयोग

d)

भक्तियोग

27.

सर्वोच्च योगी श्रीभगवान् के किन गुणों से पूर्णतया अभिज्ञ रहता है? (6.47)

a)

वे पूर्ण बालक, पूर्ण पति, पूर्ण सखा तथा पूर्ण स्वामी हैं

b)

वे समस्त ऐश्र्वर्यों तथा दिव्य गुणों से ओतप्रोत हैं

c)

वे कृष्ण, गोविन्द तथा वासुदेव के नाम से जाने जाते हैं

d)

वे राम, नृसिंह, वराह जैसे विभिन्न रूपों में अवतरित होते हैं

e)

उनके अंगों की ज्योति ब्रह्मज्योति कहलाती है

28.

श्वेताश्वतर उपनिषद के अनुसार किनमें वैदिक ज्ञान का सम्पूर्ण तात्पर्य स्वतः प्रकाशित हो जाता है? (6.47)

a)

जिन महात्माओं के हृदय में श्रीभगवान् तथा गुरु में परम श्रद्धा होती है

b)

जो किसी गुरु पर श्रद्धा किये बिना स्वतंत्र रूप से मनोधर्म से शास्त्राध्ययन करते रहते हैं

29.

भगवद्गीता के सातवें अध्याय में क्या वर्णन हुआ है? (7.1)

a)

कृष्णभावनामृत की प्रकृति

b)

चार प्रकार के भाग्यशाली व्यक्ति

c)

चार प्रकार के भाग्यहीन व्यक्ति

d)

कृष्ण के समस्त ऐश्वर्यों का प्राकट्य

30.

भगवद्गीता के पहले छः अध्यायों में क्या वर्णन है? (7.1)

a)

जीवात्मा को अभौतिक आत्मा के रूप में वर्णित किया गया है

b)

विभिन्न प्रकार के योगों द्वारा आत्म-साक्षात्कार संभव है

c)

कृष्णभावनामृत से ही परमसत्य को पूर्णतया जान सकते हैं

d)

विभिन्न प्रकार के योग तो मार्ग के सोपान सदृश हैं

e)

ब्रह्मज्योति या परमात्मा अनुभूति परमसत्य का पूर्णज्ञान है

31.

छठे अध्याय के अन्तिम श्लोक के अनुसार परमेश्वर कृष्ण पर ध्यान की एकाग्रता को किसके द्वारा संभव बनाया जा सकता है? (7.1)

a)

नवधा भक्ति

b)

षट्चक्र योग

c)

हठयोग

d)

संस्कृत पाण्डित्य

32.

पूर्णतया कृष्णभावनाभावित होने के लिए सौभाग्यशाली व्यक्ति को किस से श्रवण करके सीखना चाहिए? (7.1)

a)

साक्षात् कृष्ण से

b)

कृष्ण के शुद्धभक्त से

c)

अपनी शिक्षा का अभिमान करने वाले अभक्त से

33.

वैदिक साहित्य से श्रीकृष्ण के विषय में सुनने का क्या प्रभाव होता है? (7.1)

a)

श्रीकृष्ण शुभेच्छु मित्र की भाँति कार्य करते हैं

b)

श्रोता को भगवान् श्रीकृष्ण शुद्ध कर देते हैं

c)

भक्त भगवद्भक्ति में स्थिर होता जाता है

d)

भक्त रजो तथा तमो गुणों से मुक्त हो जाता है

e)

भक्त भगवत्-तत्त्व को पूरी तरह जान लेता है

34.

श्रीमद्भागवत के प्रथम स्कंध के दूसरे अध्याय के अनुसार भौतिक मोह की कठिन ग्रंथि को कौन भेदता है? (7.1)

a)

कर्मयोग

b)

ज्ञानयोग

c)

ध्यानयोग

d)

भक्तियोग

35.

पिछले जन्मों का तो आपको याद नहीं होगा कि अल्पकालिक भक्तियोग का पालन किया है, या दीर्घकालिक या फिर इसी जीवन में भक्तों की कृपा से कृष्ण के संपर्क में आये हैं | पर आगे कृष्णभावनामृत विधि को पूरा करने में आपकी कितने जन्मों की योजना है और उसके लिए क्या प्रयास हैं?

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