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WorksheetsBhagavad Gita As It Is DAY-29 (7.2-11)
Total questions: 35
Worksheet time: 3hrs 5mins
भगवान् अर्जुन को कैसा ज्ञान देने जा रहे हैं? (7.2)
पूर्णज्ञान, जिसे जान लेने पर जानने के लिए और कुछ भी शेष नहीं रहेगा
आंशिक ज्ञान, क्योंकि अर्जुन अभी इतना ही समझ सकता है और वक्ता की योग्यता भी महत्त्वपूर्ण है
अर्जुन को दिए गए पूर्णज्ञान में क्या-क्या सम्मिलित है? (7.2)
प्रत्यक्ष जगत्
प्रत्यक्ष जगत् के पीछे काम करने वाला आत्मा
जगत और आत्मा दोनों का उद्गम
यांत्रिक अभियांत्रिकी
भगवान् अर्जुन को ही पूर्ण दिव्यज्ञान क्यों बताना चाहते हैं? (7.2)
क्योंकि अर्जुन अत्यधिक अज्ञानी है जो इतना शोक कर रहा है
क्योंकि अर्जुन उनका विश्वस्त भक्त तथा मित्र है
अर्जुन को तो साक्षात भगवान् से सुनने का अवसर प्राप्त हुआ पर एक भगवद्भक्त कैसे पूर्णज्ञान का लाभ प्राप्त कर सकता है? (7.2)
भगवान् से प्रारम्भ होने वाली गुरु-परम्परा से
किसी भी झोले वाले साधु बाबा से
विश्विद्यालय के संस्कृत प्राध्यापक से
लाखों अंधभक्तों द्वारा पूजित तथाकथित गुरुजी से
किसी भी प्रकाशन की गीता पर अप्रमाणिक टीका से
बुद्धिमान मनुष्य को क्या जानना चाहिए जिसके बाद कुछ भी अज्ञेय नहीं रह जाता? (7.2)
समस्त ज्ञान का उद्गम
समस्त कारणों का कारण
समस्त योगों में ध्यान का एकमात्र लक्ष्य
पैसा कमाने का तरीका
कई ______ मनुष्यों में से कोई एक सिद्धि के लिए प्रयत्नशील होता है और इस तरह सिद्धि प्राप्त करने वालों में से विरला ही कोई मुझे वास्तव में जान पाता है | (7.3)
सैकड़ों
हजार
लाख
करोड़
अरब
मनुष्यों की विभिन्न कोटियों में से क्या जानने में रूचि रखने वाला मनुष्य विरला नहीं माना जाता? (7.3)
आत्मा क्या है
शरीर क्या है
परमसत्य क्या है
आहार, निद्रा, भय तथा मैथुन क्या है
गीता के प्रथम छह अध्याय क्या जानने में रूचि रखने वाले लोगों के लिए हैं? (7.3)
दिव्यज्ञान
आत्मा, परमात्मा
ज्ञानयोग, ध्यानयोग द्वारा अनुभूति की क्रिया
पदार्थ से आत्मा का पार्थक्य
यद्यपि महानतम निर्विशेषवादी (मायावादी) शंकराचार्य ने अपने गीता– भाष्य में स्वीकार किया है कि कृष्ण भगवान् हैं, किन्तु उनके अनुयायी व ज्ञानी, योगीजन इसे स्वीकार क्यों नहीं करते? (7.3)
निर्विशेष ब्रह्म-अनुभूति कृष्ण को जानने की अपेक्षा सुगम है
कृष्ण केवल कृष्णभावनाभावित व्यक्तियों द्वारा ज्ञेय हैं
कृष्ण परमपुरुष हैं, वे ब्रह्म तथा परमात्मा-ज्ञान से परे हैं
ब्रह्म अनुभूति पर भी कृष्ण को जान पाना अत्यन्त कठिन है
अभक्तगणों द्वारा भक्तिमार्ग को सुगम घोषित किये जाने के विषय में क्या तर्क सही है? (7.3)
वे कठिन मार्ग को क्यों ग्रहण करते हैं?
वास्तव में भक्तिमार्ग सुगम नहीं है
दृढ़तापूर्वक अभ्यास में वे च्युत हो जाते हैं
अनाधिकारियों का तथाकथित भक्तिमार्ग सुगम दिखता है
प्रामाणिक ग्रंथों की अवहेलना वाली भक्ति उत्पात फैलाती है
कौन लोग भगवान् श्रीकृष्ण को यशोदा-नन्दन या पार्थासारथी के रूप में तत्त्वतः न जानकर सदा भ्रमित रहते हैं? (7.3)
ब्रह्मवेत्ता निर्विशेषवादी
परमात्मावेत्ता योगी
बड़े-बड़े देवता
महान विद्वान् या दार्शनिक
शुद्ध भक्त
भक्तिरसामृत सिन्धु के अनुसार भक्त भगवान् को कैसे समझ पाते हैं? (7.3)
कुंठित इन्द्रियों के द्वारा
भक्त अपनी सेवा द्वारा भगवान् को विवश कर देते हैं
भक्तों द्वारा की गई दिव्यसेवा से प्रसन्न होकर वे दयावश उन्हें आत्मतत्त्व प्रकाशित करते हैं
भगवान् की भिन्ना (अपरा) प्रकृतियाँ कितने प्रकार की हैं? (7.4)
3
5
8
13
किस तंत्र से भगवान् कृष्ण के स्वांश का तीन विष्णु रूपों - पुरुष अवतारों - महाविष्णु, गर्भोदकशायी विष्णु व क्षीरोदक्षायी विष्णु का उल्लेख दिया गया है? (7.4)
पंचतंत्र
राजतंत्र
गणतंत्र
षड्यंत्र
सात्वत तंत्र
ईश्वर तत्त्व (कृष्ण) को न जानने वाले नास्तिक किस झूठे निष्कर्ष पर पहुँच जाते हैं? (7.4)
यह संसार जीवों के भोग के लिए है
सारे जीव भौतिक शक्ति के कारण, नियन्ता तथा भोक्ता पुरुष हैं
भौतिक जगत् भगवान् की शक्तियों में से एक का क्षणिक प्राकट्य है
इनमें से क्या सही है? (7.4)
आध्यात्मिक जगत् में परमात्मा अभिव्यक्ति शाश्वत रूप से है
ब्रह्मज्योति भगवान् के रूप से भी बढ़कर विविधताओं से परिपूर्ण है
यथार्थ परमसत्य तो पूर्ण शक्तिमान पुरुष श्रीभगवान् कृष्ण हैं
भौतिक शक्ति के आठ प्रधान रूपों में कौन स्थूल अथवा विराट सृष्टियाँ कहलाती हैं? (7.4)
मन, बुद्धि तथा अहंकार
पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु तथा आकाश
महत्तत्व नामक समग्र भौतिक सृष्टि
शब्द, स्पर्श, रूप, रस, तथा गंध
भगवान् की आठ विभिन्न शक्तियों से प्रकट जगत् के चौबीस तत्त्व क्या हैं, जो नास्तिक सांख्यदर्शन के विषय हैं? (7.4)
पाँच स्थूल तत्त्व – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु तथा आकाश
पाँच इन्द्रियविषय – शब्द, स्पर्श, रूप, रस, तथा गंध
तीन सूक्ष्म तत्त्व - मन, बुद्धि तथा अहंकार
दस इन्द्रियाँ
महत्तत्व नामक समग्र भौतिक सृष्टि
जीव परमेश्वर की कौन सी प्रकृति (शक्ति) है? (7.5)
अपरा
परा
जीवों के विषय में क्या वक्तव्य सही नहीं है? (7.5)
जीव परमेश्वर की परा प्रकृति (शक्ति) है
जीव सदैव भगवान् द्वारा नियन्त्रित होते हैं
दृश्यजगत् में कार्य करने की शक्ति जीव द्वारा आती है
जीवों का अपना कोई स्वतन्त्र अस्तित्व नहीं है
भगवान् और जीव सभी प्रकार से एक दूसरे के समान हैं
गीता के अनुसार पराशक्ति (जीव) कैसे भौतिक जगत में बद्ध हो जाता है? (7.5)
वास्तविक मन तथा बुद्धि की विस्मृति
जड़ प्रकृति का प्रभाव
अहंकारवश सोचना - “मैं ही पदार्थ हूँ और सारी भौतिक उपलब्धि मेरी है”
जितनी वस्तुएँ विद्यमान हैं, वे पदार्थ तथा आत्मा के प्रतिफल हैं परन्तु इनमें से क्या सही है? (7.6)
पदार्थ आत्मा द्वारा उत्पन्न किया जाता है
आत्मा पदार्थ द्वारा उत्पन्न किया जाता है
भौतिक विकास की अवस्था में आत्मा उत्पन्न होती है
विराट ब्रह्माण्ड का स्रष्टा भी जीवात्मा है
भगवद्गीता, ब्रह्मसंहिता, श्वेताश्वतरोपनिषद आदि वैदिक ग्रन्थ परम सत्य के विषय में क्या पुष्टि करते हैं? (7.7)
साकार, आदिपुरुष श्रीकृष्ण हैं जो समस्त कारणों का कारण हैं
निराकार, निर्विशेष इन्द्रियातीत ब्रह्म
निर्विशेषवादियों द्वारा बल दिए जाने वाले अरूपम् शब्द का क्या अर्थ है? (7.7)
निराकार, जिसका कोई रूप नहीं होता
दिव्य सच्चिदानन्द स्वरूप
भगवान् इसके लिए क्या उदाहरण देते हैं कि उनसे श्रेष्ठ अन्य कोई नहीं है, सब कुछ उन्हीं पर आश्रित है और वे अपनी विविध परा-अपरा शक्तियों के द्वारा सर्वव्यापी हैं? (7.7)
जिस प्रकार मोती धागे में गुँथे रहते हैं
जिस प्रकार मुट्ठी में रेत के कण रहते हैं
जिस प्रकार उद्दण्ड छात्रों की कक्षा का लाचार अध्यापक
भगवान् चैतन्य का शुद्ध सिद्धान्त क्या कहलाता है? (7.8)
सगुणवाद, जो साकार के उपासक हैं और निराकार को नहीं स्वीकारते
निर्विशेषवाद या निर्गुणवाद जो भगवान् को निराकार मानते हैं और उनके रूप को काल्पनिक भौतिक कृति मानते हैं
अचिन्त्य भेदाभेद-तत्त्व, जो स्वीकार करता है कि प्रत्येक वस्तु में एकसाथ सगुणबोध तथा निर्गुणबोध निहित होता है
क्या प्रमाण है कि प्रत्येक वस्तु में एकसाथ सगुणबोध तथा निर्गुणबोध निहित होता है और इनमें कोई विरोध नहीं है? (7.8)
निराकार सूर्यप्रकाश व सूर्यदेवता एक पुरुष है
जल का निराकार शुद्ध स्वाद और उसे प्रदान करने वाले सगुण भगवान्
कृष्ण का शब्द स्वरूप ॐकार और उसकी निराकार दिव्य ध्वनि
सही वाक्य चुनें | (7.8)
कृष्ण का ज्ञान मुक्ति है और उनके प्रति अज्ञान बन्धन है
कृष्ण का ज्ञान बन्धन है और उनके प्रति अज्ञान मुक्ति है
भगवान् श्रीकृष्ण अपनी किन विभूतियों का उल्लेख करते हैं? (7.8)
जल का स्वाद
सूर्य तथा चन्द्रमा का प्रकाश
वैदिक मन्त्रों में ओंकार
आकाश में ध्वनि
मनुष्य में सामर्थ्य
कृष्ण की उपस्थिति का कहाँ कहाँ और कैसे कैसे अनुभव किया जा सकता है? (7.9)
विभावसु अग्नि कृष्ण है और अग्नि का तेज भी कृष्ण ही है
समस्त वस्तुओं में व्याप्त अदूषित आद्य सुगंध कृष्ण हैं
मनुष्य की आयु भी कृष्ण के कारण है
समस्त जीवों का जीवन तथा तपस्वियों का तप
कहाँ बताया गया है कि कृष्ण समस्त पदार्थों के बीज हैं? (7.10)
बीजं मां सर्वभूतानां
विद्धि पार्थ सनातनम्
बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि
तेजस्तेजस्विनामहम्
ब्रह्म और परब्रह्म के विषय में क्या सही है? (7.10)
ब्रह्म तो निर्विशेष है, किन्तु परब्रह्म साकार है
ब्रह्म तो साकार है, किन्तु परब्रह्म निर्विशेष है
ब्रह्म और परब्रह्म दोनों निराकार निर्विशेष हैं
भगवान् कैसे बल का प्रतिनिधित्व करते हैं? (7.11)
जो कामनाओं तथा इच्छा से रहित है
जो दुर्बलों के ऊपर लगाया जाए
जो व्यक्तिगत आक्रमण के लिए उपयोग में लिया जाए
भगवान् कौन से काम के प्रतिनिधि हैं? (7.11)
जो धर्म के विरुद्ध हो
जो सन्तानोन्पति के लिए बिलकुल न हो
जिसमें माता-पिता अपनी सन्तान को कृष्णभावनाभावित बनाएँ
भगवान् की सारी विभूतियाँ (जल का स्वाद, अग्नि की ऊष्मा आदि) तक निराकार हैं, आप कैसे किसी को बताएँगे कि परमसत्य एक व्यक्ति हैं, आदि पुरुष श्रीकृष्ण?
