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Bhagavad Gita As It Is DAY-38 (9.34, 10.1-9)

Total questions: 33

Worksheet time: 3hrs 55mins

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1.

किस श्लोक में भगवान् कहते हैं कि अपने मन को मेरे नित्य चिन्तन में लगाओ, मेरे भक्त बनो, मुझे नमस्कार करो और मेरी ही पूजा करो?

a)

मन्मना भव मद्भ‍क्तो मद्याजी मां नमस्कुरु ।

मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायण: ॥ 9.34 ॥

b)

यो मामजमनादिं च वेत्ति लोकमहेश्वरम् ।

असम्मूढ: स मर्त्येषु सर्वपापै: प्रमुच्यते ॥ 10.3 ॥

c)

अहं सर्वस्य प्रभवो मत्त: सर्वं प्रवर्तते ।

इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विता: ॥ 10.8 ॥

d)

मच्च‍ित्ता मद्ग‍तप्राणा बोधयन्त: परस्परम् ।

कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति च ॥ 10.9 ॥

2.

कृष्णतत्त्व को न जानने के कारण अज्ञानी, भ्रमित व कपटी भाष्यकार कृष्ण को कैसे छिपाते हैं? (9.34)

a)

उनको उनके मन या शरीर से पृथक् बताते हैं

b)

परमेश्वर कृष्ण में तथा उनके शरीर में कोई अन्तर नहीं है

c)

कृष्ण के भक्त बनने का तोड़मरोड़ कर अर्थ करते हैं

3.

निरन्तर कृष्णतत्त्व का अनुशीलन व चिंतन कैसे करना चाहिए? (9.34)

a)

ईर्ष्यावश, जिस तरह कृष्ण का मामा कंस करता था

b)

निरन्तर शत्रु रूप में ताकि सदैव चिन्ताग्रस्त रहें कि न जाने कब कृष्ण वध कर दें

c)

प्रामाणिक गुरु से सीखकर भक्तिमय प्रेम व सेवा द्वारा

4.

कहाँ से कृष्ण का ज्ञान प्राप्त करना लाभदायक होगा? (9.34)

a)

अप्रामाणिक साधन (अभक्त) से

b)

शुद्ध भक्त प्रामाणिक गुरु से

c)

कपटी भाष्यकारों से

d)

कल्पना, योग तथा सकाम कर्म से

5.

प्रारम्भ में कोई भक्त अपने स्तर से आकस्मिक पतन के कारण नीचे गिर जाये, तो उसकी क्या स्थिति माननी चाहिए? (9.34)

a)

एक पापी व्यक्ति से भी अधम अपराधी

b)

कर्मी से श्रेष्ठ, दार्शनिक तथा योगियों से कम

c)

निरंतर कृष्ण भक्ति में रहने के कारण पूर्ण साधुपुरुष

6.

भक्तिपथ से आकस्मिक पतन की स्थिति में उस भक्त के लिए क्या मार्ग है? (9.34)

a)

निरंतर कृष्ण-भक्ति में लगे रहने से क्रमशः उसके आकस्मिक भक्ति-विहीन कार्य कम होते जाएँगे और उसे शीघ्र ही पूर्ण सिद्धि प्राप्त होगी

b)

वास्तव में शुद्ध भक्त के पतन का कभी कोई अवसर नहीं आता, क्योंकि भगवान् स्वयं ही अपने शुद्ध भक्तों की रक्षा करते हैं

7.

भगवान् शब्द की व्याख्या, पूर्ण रूप से षड्ऐश्र्वर्यों से युक्त के रूप में, किसने की है? (10.1)

a)

नारद मुनि

b)

पर्वत मुनि

c)

पराशर मुनि

d)

सत्यव्रत मुनि

e)

अंगिरा मुनि

8.

सम्पूर्ण शक्ति, सम्पूर्ण यश, सम्पूर्ण धन के अतिरिक्त और कौन से तीन ऐश्वर्य हैं जिन्हें प्रदर्शित करने के कारण कृष्ण परम भगवान् के रूप में स्वीकार किये जाते हैं? (10.1)

a)

सम्पूर्ण ज्ञान

b)

सम्पूर्ण सौन्दर्य

c)

सम्पूर्ण त्याग

d)

सम्पूर्ण भोग

e)

सम्पूर्ण अज्ञान

9.

भक्तों की संगति में भगवान् के विषय में सदा श्रवण करने का क्या परिणाम होगा? (10.1)

a)

भक्ति में रमता जाता है

b)

भक्ति बढ़ेगी

c)

अहंकार बढ़ता है

d)

वास्तविक लाभ प्राप्त होता है

e)

समय नष्ट होता है

10.

भगवान् कृष्ण किन शब्दों में स्वयं को समस्त बड़े से बड़े देवताओं का भी उद्गम बताते हैं? (10.2)

a)

न मे विदु: सुरगणा:

b)

प्रभवं न महर्षय:

c)

अहमादिर्हि देवानां

d)

महर्षीणां च सर्वश:

11.

किसी शासन करने वाली शक्ति या निर्विशेष ब्रह्म रूप से परे परम भगवान् श्रीकृष्ण को जानने के लिए क्या आवश्यक है? (10.2)

a)

विद्वत्ता, कल्पना व मूर्खतापूर्ण चिन्तन

b)

भगवद्गीता तथा श्रीमद्भागवत में उनके वचनों को पढ़ें

c)

दिव्य स्थिति में होना

d)

अपरा शक्ति में होना

e)

कृष्ण की अहैतुकी कृपा

12.

कौन सबसे अधिक सफल अध्यात्मज्ञानी है जो समस्त पापकर्मों से मुक्त हो पाता है? (10.3)

a)

जिन्हें आत्म-साक्षात्कार का ज्ञान नहीं होता

b)

जो अपनी आध्यात्मिक स्थिति को समझने के लिए प्रयत्नशील होते हैं

c)

जो यह जान लेता है कि कृष्ण ही भगवान्, प्रत्येक वस्तु के स्वामी तथा अजन्मा हैं

13.

भगवान् और जीव, दोनों को अज अर्थात् अजन्मा कहा गया है तो फिर दोनों में क्या अंतर है? (10.3)

a)

भगवान् भौतिक आसक्तिवश जन्म लेते तथा मरते रहते हैं

b)

भगवान् अपना शरीर बदलते रहते हैं, किन्तु बद्धजीव का शरीर परिवर्तनशील नहीं है

c)

भगवान् अपनी अन्तरंगा शक्ति के कारण अपराशक्ति माया के अधीन नहीं हैं, अपितु पराशक्ति में रहते हैं

14.

इस भौतिक जगत् में कुछ भी शुभ कैसे नहीं है? (10.3)

a)

इस जगत् में शुभ या अशुभ वस्तुओं का बोध मनोधर्म है

b)

क्योंकि प्रकृति स्वयं ही अशुभ है

c)

हम इसे शुभ मानने की कल्पना मात्र करते हैं

d)

परमेश्वर की आज्ञा से कर्म करना ही शुभ है, अन्य नहीं

15.

परमेश्वर की आज्ञा कहाँ से प्राप्त की जा सकती है? (10.3)

a)

श्रीमद्भागवत तथा भगवद्गीता जैसे शास्त्रों से

b)

भगवान् के प्रतिनिधि, प्रामाणिक गुरु से

c)

शुद्ध भक्त साधु से

d)

ज्योतिषी से

e)

डाक्टरों, वैज्ञानिकों से

16.

वास्तव में कौन संन्यासी तथा योगी होता है? (10.3)

a)

जो अपने कर्मफलों की शरण ग्रहण नहीं करता

b)

जो भगवान् के निर्देशानुसार कर्म करता है

c)

जो केवल संन्यासी या छद्म योगी के वेश में रहता है

d)

कर्म करते हुए जिसकी दिव्य मनोवृत्ति वैराग्य की होती है

17.

जीवों के कौन से अच्छे या बुरे गुण कृष्ण द्वारा उत्पन्न हैं? (10.4-5)

a)

बुद्धि, ज्ञान, संशय तथा मोह से मुक्ति

b)

क्षमाभाव, सत्यता, इन्द्रियनिग्रह, मननिग्रह

c)

सुख तथा दुख, जन्म, मृत्यु, भय, अभय

d)

अहिंसा, समता, तुष्टि

e)

तप, दान, यश तथा अपयश

18.

बुद्धि का क्या अर्थ है? (10.4-5)

a)

नीर-क्षीर विवेक करने वाली शक्ति

b)

आत्मा तथा भौतिक पदार्थ के अन्तर को जानना

c)

भौतिक तत्त्वों तथा शारीरिक आवश्यकताओं पर ध्यान

d)

संशय तथा मोह से मुक्ति

e)

आँख मूँदकर कुछ भी स्वीकार करना

19.

सत्य की क्या परिभाषा है? (10.4-5)

a)

तथ्यों को तोड़ना मरोड़ना

b)

तथ्यों को सही रूप से अन्यों के लाभ के लिए प्रस्तुत करना

c)

वही सत्य बोलना चाहिए जो अन्यों को प्रिय लगे

20.

शमः का क्या अर्थ है? (10.4-5)

a)

इन्द्रियों के अनावश्यक उपयोग पर नियन्त्रण रखना

b)

मन पर अनावश्यक विचारों के विरुद्ध संयम रखना

c)

धन-अर्जन के चिन्तन में ही सारा समय लगाना

d)

कृष्णभावनामृत के अनुशीलन में असुविधा

21.

भय तथा चिंता का कारण व उससे मुक्ति का सर्वोत्तम उपाय क्या है? (10.4-5)

a)

कृष्ण को जाने तथा कृष्णभावनामृत में निरन्तर स्थित रहें

b)

भय भविष्य की चिन्ता व मायापाश में फँस जाने से होता है

c)

अभयम् तभी सम्भव है जब कृष्णभावनामृत में रहा जाए

d)

जो आश्वस्त हैं कि वे शरीर नहीं हैं, उन्हें कोई भय नहीं रहता

22.

अहिंसा का क्या अर्थ होता है? (10.4-5)

a)

अन्यों को कष्ट न पहुँचाया जाय

b)

मानवदेह आत्म-साक्षात्कार हेतु उपयोग होने का प्रशिक्षण

c)

मनुष्यों के भावी आध्यात्मिक सुख में वृद्धि

d)

अधिकाधिक वस्तुएँ एकत्र करने के लिए उत्सुक

23.

कृष्णभावनामृत कार्यों में लगे व्यक्ति को अपनी आय का 50% दान में देना क्यों सर्वोत्तम है? (10.4-5)

a)

चूँकि कृष्ण अच्छे हैं इसीलिए उनका कार्य (निमित्त) भी अच्छा है

b)

सदैव आध्यात्मिक कार्य में रत रहने से उन्हें जीविकोपार्जन के लिए समय नहीं मिल पाता

c)

वे द्वार-द्वार जाकर गृहस्थों को अज्ञान की निद्रा से जगाते हैं

24.

कौन-कौन ब्रह्माण्ड के समस्त जीवों के धर्म-पथप्रदर्शक कहलाते हैं? (10.6)

a)

चार महर्षि – सनक, सनन्दन, सनातन तथा सनत्कुमार

b)

सारे 14 मनु

c)

सात महर्षि

25.

ब्रह्मा परमेश्वर की किस शक्ति से उत्पन्न आदि जीव हैं? (10.6)

a)

हिरण्यगर्भ

b)

क्षीरोदक्षायी विष्णु

c)

बहिरंगा शक्ति

26.

भगवान् महान हैं, इतना ही पर्याप्त क्यों नहीं है? भक्ति करने के लिए ये जानना क्यों आवश्यक है कि वे कैसे और कितने महान हैं? (10.7)

a)

भगवान् के ऐश्र्वर्यों को ठीक से समझ लेने पर शरणागत होने के अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प नहीं रह जाता

b)

अटूट विश्वास होने पर ही व्यक्ति अत्यन्त श्रद्धा समेत तथा संशयरहित होकर कृष्ण को स्वीकार करके भक्ति करता है

c)

कृष्ण की महानता को समझने में उपेक्षा न बरतें, क्योंकि इसे जानने पर ही एकनिष्ठ होकर भक्ति की जा सकती है

27.

अथर्ववेद, गोपालतापनी उपनिषद्, नारायण उपनिषद्, महा उपनिषद्, मोक्षधर्म, वराह पुराण के सन्दर्भों के आधार पर इनमें से कौन-कौन भगवान कृष्ण या उनके अंशों (नारायण आदि) से उत्पन्न होते हैं और उनकी माया से मोहित होकर विस्मृत भी हो जाते हैं? (10.8)

a)

ब्रह्मा

b)

प्रजापति

c)

शिव

d)

इन्द्र

e)

आठ वासु, ग्यारह रूद्र, बारह आदित्य

28.

इतने शास्त्रीय प्रमाण होने पर भी केवल मूर्ख ही कृष्ण को सामान्य व्यक्ति समझेगा, अतः एक कृष्णभावनाभावित व्यक्ति को क्या करना चाहिए? (10.8)

a)

कभी मूर्खों द्वारा मोहित न हो

b)

भगवद्गीता की समस्त अप्रामाणिक टीकाओं एवं व्याख्याओं से दूर रहना चाहिए

c)

दृढ़तापूर्वक कृष्णभावनामृत में अग्रसर होना चाहिए

29.

इनमें से कौन सा वाक्यांश इस श्लोक से नहीं है? (10.8)

a)

मत्तः सर्वं प्रवर्तते

b)

मम यो वेत्ति तत्त्वत:

c)

इति मत्वा भजन्ते मां

d)

अहं सर्वस्य प्रभवो

e)

बुधा भावसमन्विताः

30.

भगवान् के शुद्ध भक्त किस प्रकार परमसन्तोष तथा आनन्द का अनुभव करते हैं? (10.9)

a)

शुद्ध भक्तों के विचार भगवान् में वास करते हैं - मच्च‍ित्ता

b)

उनके जीवन भगवान् की सेवा में रहते हैं - मद्ग‍तप्राणा

c)

वे एक दूसरे को ज्ञान प्रदान करते हैं - बोधयन्तः परस्परम्

d)

वे दिव्य विषयों की ही चर्चा चलाते हैं - कथयन्तश्च मां नित्यं

31.

भगवान् चैतन्य दिव्य भक्ति की तुलना किससे करते हैं? (10.9)

a)

जिस प्रकार मछली जल के बिना नहीं रह सकती

b)

जिस प्रकार तरुण तथा तरुणी को परस्पर मिलने में आनन्द प्राप्त होता है

c)

जीव के हृदय में बीज बोने से

32.

भक्ति बीज अंकुरण व सिंचन किससे होता है? (10.9)

a)

हरे कृष्ण के श्रवण तथा कीर्तन से

b)

स्मार्त ब्राह्मणों को भोजन खिलाने से

c)

दरिद्र नारायण की सेवा करने से

d)

पेशेवर वाचकों से भागवत-सप्ताह कराने से

33.

आप भगवान् के व भक्ति के किस गुण के प्रति सर्वाधिक आकर्षित हैं?

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