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Worksheetsअपठित गद्यांश
Total questions: 37
Worksheet time: 4hrs 30mins
एक जंगल में परिजात का एक पेड़ था। परिजात का कोई मुकाबला नहीं था। उसकी सुंदरता बेजोड़ थी। उसका रंग-रूप निराला था। परिजात को भी अपने गुणों का पूरा-पूरा पता था। नीले आसमान में सिर उठाए इस शान से खड़ा रहता, मानों पेड़ों का सरताज हो। जब बहार के दिन आते तो परिजात अनगिनत नन्हें-नन्हें फूलों से लद जाता, लगता मानों किसी ने आकाश से सारे तारे तोड़कर परिजात की शाखाओं पर टाँक दिए हो। नन्हें फूलों से झिलमिलाता परिजात जब सुगंध भरी पराग जंगल में बिखेरता तो जंगल नंदन बन जाता। चुंबक की तरह परिजात सबको अपनी तरफ़ खींचता, जिसे देखो, वही परिजात की तरफ़ भागता । सतरंगी शालें ओढ़े चटकीली तितलियाँ सहेलियों के साथ झुंड का झुंड बनाकर परिजात का श्रृंगार देखने आतीं तथा जाते-जाते फूलों को खींचकर ढेरों पराग अपने साथ ले जाती।
प्रश्न 1 जंगल में किसका पेड़ था?
पीपल का
सेब का
परिजात का
नीम का
एक जंगल में परिजात का एक पेड़ था। परिजात का कोई मुकाबला नहीं था। उसकी सुंदरता बेजोड़ थी। उसका रंग-रूप निराला था। परिजात को भी अपने गुणों का पूरा-पूरा पता था। नीले आसमान में सिर उठाए इस शान से खड़ा रहता, मानों पेड़ों का सरताज हो। जब बहार के दिन आते तो परिजात अनगिनत नन्हें-नन्हें फूलों से लद जाता, लगता मानों किसी ने आकाश से सारे तारे तोड़कर परिजात की शाखाओं पर टाँक दिए हो। नन्हें फूलों से झिलमिलाता परिजात जब सुगंध भरी पराग जंगल में बिखेरता तो जंगल नंदन बन जाता। चुंबक की तरह परिजात सबको अपनी तरफ़ खींचता, जिसे देखो, वही परिजात की तरफ़ भागता । सतरंगी शालें ओढ़े चटकीली तितलियाँ सहेलियों के साथ झुंड का झुंड बनाकर परिजात का श्रृंगार देखने आतीं तथा जाते-जाते फूलों को खींचकर ढेरों पराग अपने साथ ले जाती।
प्रश्न 2 परिजात अपने आप को स्वयं क्या समझता था ?
पेड़ों का सरताज
पेड़ों का दास
ईश्वर
इनमें से कोई नहीं
एक जंगल में परिजात का एक पेड़ था। परिजात का कोई मुकाबला नहीं था। उसकी सुंदरता बेजोड़ थी। उसका रंग-रूप निराला था। परिजात को भी अपने गुणों का पूरा-पूरा पता था। नीले आसमान में सिर उठाए इस शान से खड़ा रहता, मानों पेड़ों का सरताज हो। जब बहार के दिन आते तो परिजात अनगिनत नन्हें-नन्हें फूलों से लद जाता, लगता मानों किसी ने आकाश से सारे तारे तोड़कर परिजात की शाखाओं पर टाँक दिए हो। नन्हें फूलों से झिलमिलाता परिजात जब सुगंध भरी पराग जंगल में बिखेरता तो जंगल नंदन बन जाता। चुंबक की तरह परिजात सबको अपनी तरफ़ खींचता, जिसे देखो, वही परिजात की तरफ़ भागता । सतरंगी शालें ओढ़े चटकीली तितलियाँ सहेलियों के साथ झुंड का झुंड बनाकर परिजात का श्रृंगार देखने आतीं तथा जाते-जाते फूलों को खींचकर ढेरों पराग अपने साथ ले जाती।
प्रश्न 3 वह अनगिनत फूलों से कब लद जाता था ?
बहार में
वसंत में
पतझड़ में
शीत में
एक जंगल में परिजात का एक पेड़ था। परिजात का कोई मुकाबला नहीं था। उसकी सुंदरता बेजोड़ थी। उसका रंग-रूप निराला था। परिजात को भी अपने गुणों का पूरा-पूरा पता था। नीले आसमान में सिर उठाए इस शान से खड़ा रहता, मानों पेड़ों का सरताज हो। जब बहार के दिन आते तो परिजात अनगिनत नन्हें-नन्हें फूलों से लद जाता, लगता मानों किसी ने आकाश से सारे तारे तोड़कर परिजात की शाखाओं पर टाँक दिए हो। नन्हें फूलों से झिलमिलाता परिजात जब सुगंध भरी पराग जंगल में बिखेरता तो जंगल नंदन बन जाता। चुंबक की तरह परिजात सबको अपनी तरफ़ खींचता, जिसे देखो, वही परिजात की तरफ़ भागता । सतरंगी शालें ओढ़े चटकीली तितलियाँ सहेलियों के साथ झुंड का झुंड बनाकर परिजात का श्रृंगार देखने आतीं तथा जाते-जाते फूलों को खींचकर ढेरों पराग अपने साथ ले जाती।
प्रश्न 4. तितलियाँ क्या करती थीं ?
उसके फूलों का पराग ले जाती थीं
फूल ले जाती थीं
डालों पर गाना गाती थीं
कुछ नहीं करती थीं
एक जंगल में परिजात का एक पेड़ था। परिजात का कोई मुकाबला नहीं था। उसकी सुंदरता बेजोड़ थी। उसका रंग-रूप निराला था। परिजात को भी अपने गुणों का पूरा-पूरा पता था। नीले आसमान में सिर उठाए इस शान से खड़ा रहता, मानों पेड़ों का सरताज हो। जब बहार के दिन आते तो परिजात अनगिनत नन्हें-नन्हें फूलों से लद जाता, लगता मानों किसी ने आकाश से सारे तारे तोड़कर परिजात की शाखाओं पर टाँक दिए हो। नन्हें फूलों से झिलमिलाता परिजात जब सुगंध भरी पराग जंगल में बिखेरता तो जंगल नंदन बन जाता। चुंबक की तरह परिजात सबको अपनी तरफ़ खींचता, जिसे देखो, वही परिजात की तरफ़ भागता । सतरंगी शालें ओढ़े चटकीली तितलियाँ सहेलियों के साथ झुंड का झुंड बनाकर परिजात का श्रृंगार देखने आतीं तथा जाते-जाते फूलों को खींचकर ढेरों पराग अपने साथ ले जाती।
प्रश्न 5. इस गद्यांश का शीर्षक है ?
परिजात एक वृक्ष
परिजात पेड़ों का सरताज
परिजात जंगल का राजा
इनमें से कोई नहीं
बढ़ती जनसंख्या ने अनेक प्रकार की समस्याओं को जन्म दिया है- रोटी, कपड़ा, मकान की कमी, बेरोजगारी, निरक्षता, कृषि एवं उद्योगों के उत्पादनों में कमी आदि। हम जितना अधिक उन्नति करते हैं या विकास करते हैं जनसंख्या उनके अनुपात में कहीं अधिक बढ़ जाती है। बढ़ती जनसंख्या के समक्ष सभी सरकारी प्रयास असफल दिखाई देते हैं। कृषि उत्पादन और औद्योगिक विकास बढ़ती जनसंख्या के सामने नगण्य सिद्ध हो रहे हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए जनसंख्या वृधि पर नियंत्रण की अति आवश्यकता है। इसके बिना विकास के लिए किए गए सभी प्रकार के प्रयत्न अधूरे रह जाएँगे।
प्रश्न 6. बढ़ती जनसंख्या ने किसे जन्म दिया है ?
दुर्गुणों को
अनेक प्रकार की समस्याओं को
दुर्भावनाओं को
अनेक प्रकार की विपदाओं को।
बढ़ती जनसंख्या ने अनेक प्रकार की समस्याओं को जन्म दिया है- रोटी, कपड़ा, मकान की कमी, बेरोजगारी, निरक्षता, कृषि एवं उद्योगों के उत्पादनों में कमी आदि। हम जितना अधिक उन्नति करते हैं या विकास करते हैं जनसंख्या उनके अनुपात में कहीं अधिक बढ़ जाती है। बढ़ती जनसंख्या के समक्ष सभी सरकारी प्रयास असफल दिखाई देते हैं। कृषि उत्पादन और औद्योगिक विकास बढ़ती जनसंख्या के सामने नगण्य सिद्ध हो रहे हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए जनसंख्या वृधि पर नियंत्रण की अति आवश्यकता है। इसके बिना विकास के लिए किए गए सभी प्रकार के प्रयत्न अधूरे रह जाएँगे।
प्रश्न 7. विकास कार्य क्यों नहीं दिखाई देते ?
राजनीतिक अक्षमता के कारण
समस्याओं के कारण
भ्रष्टाचार के कारण
जनसंख्या की वृद्धि के कारण
(ग) बढ़ती जनसंख्या ने इनमें से कि
बढ़ती जनसंख्या ने अनेक प्रकार की समस्याओं को जन्म दिया है- रोटी, कपड़ा, मकान की कमी, बेरोजगारी, निरक्षता, कृषि एवं उद्योगों के उत्पादनों में कमी आदि। हम जितना अधिक उन्नति करते हैं या विकास करते हैं जनसंख्या उनके अनुपात में कहीं अधिक बढ़ जाती है। बढ़ती जनसंख्या के समक्ष सभी सरकारी प्रयास असफल दिखाई देते हैं। कृषि उत्पादन और औद्योगिक विकास बढ़ती जनसंख्या के सामने नगण्य सिद्ध हो रहे हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए जनसंख्या वृधि पर नियंत्रण की अति आवश्यकता है। इसके बिना विकास के लिए किए गए सभी प्रकार के प्रयत्न अधूरे रह जाएँगे।
प्रश्न 8. बढ़ती जनसंख्या ने इनमें से किस समस्या को जन्म नहीं दिया है?
रोटी कपड़े की समस्या
बेरोजगारी की समस्या
निरक्षरता की समस्या
दहेज की समस्या
बढ़ती जनसंख्या ने अनेक प्रकार की समस्याओं को जन्म दिया है- रोटी, कपड़ा, मकान की कमी, बेरोजगारी, निरक्षता, कृषि एवं उद्योगों के उत्पादनों में कमी आदि। हम जितना अधिक उन्नति करते हैं या विकास करते हैं जनसंख्या उनके अनुपात में कहीं अधिक बढ़ जाती है। बढ़ती जनसंख्या के समक्ष सभी सरकारी प्रयास असफल दिखाई देते हैं। कृषि उत्पादन और औद्योगिक विकास बढ़ती जनसंख्या के सामने नगण्य सिद्ध हो रहे हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए जनसंख्या वृधि पर नियंत्रण की अति आवश्यकता है। इसके बिना विकास के लिए किए गए सभी प्रकार के प्रयत्न अधूरे रह जाएँगे।
प्रश्न 9. बढ़ती जनसंख्या के समक्ष कौन से प्रयास असफल दिखाई देते हैं?
सभी सरकारी प्रयास
सभी मानवीय प्रयास
सभी गैर-सरकारी प्रयास
सभी सामाजिक प्रयास
बढ़ती जनसंख्या ने अनेक प्रकार की समस्याओं को जन्म दिया है- रोटी, कपड़ा, मकान की कमी, बेरोजगारी, निरक्षता, कृषि एवं उद्योगों के उत्पादनों में कमी आदि। हम जितना अधिक उन्नति करते हैं या विकास करते हैं जनसंख्या उनके अनुपात में कहीं अधिक बढ़ जाती है। बढ़ती जनसंख्या के समक्ष सभी सरकारी प्रयास असफल दिखाई देते हैं। कृषि उत्पादन और औद्योगिक विकास बढ़ती जनसंख्या के सामने नगण्य सिद्ध हो रहे हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए जनसंख्या वृधि पर नियंत्रण की अति आवश्यकता है। इसके बिना विकास के लिए किए गए सभी प्रकार के प्रयत्न अधूरे रह जाएँगे।
प्रश्न 10. “नगण्य” शब्द का सही अर्थ है
बहुत
थोडा
पर्याप्त
अपर्याप्त
हिंदी अपठित गद्यांश कार्यपत्रिका
दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उत्तर दीजिए -
15 अगस्त 1947 को भारत स्वत्रंत हुआ। इसी ख़ुशी में हम हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मानते है। यह दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है। हमारे अन्य राष्ट्री य पर्व है 26 जनवरी और 2 अक्टूबर क्टूबर हैं। 1947 से पहले भारत अंग्रेज़ो का गुलाम था। अनेक देश - भक्तों ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण त्याग दिए। स्वतंत्रता दिवस पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। मुख्य समारोह दिल्ली में आयोजित किया जाता है। इस दिन प्रधान मंत्री लाल किले पर तिरंगा फहराते है और अमर शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेने की सीख भी देते हैं।
1.भारत कब स्वतंत्र हुआ ?
26 जनवरी ,1947
15 अगस्त ,1947
2 अक्टूबर 1947
हिंदी अपठित गद्यांश कार्यपत्रिका
दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उत्तर दीजिए -
15 अगस्त 1947 को भारत स्वत्रंत हुआ। इसी ख़ुशी में हम हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मानते है। यह दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है। हमारे अन्य राष्ट्री य पर्व है 26 जनवरी और 2 अक्टूबर क्टूबर हैं। 1947 से पहले भारत अंग्रेज़ो का गुलाम था। अनेक देश - भक्तों ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण त्याग दिए। स्वतंत्रता दिवस पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। मुख्य समारोह दिल्ली में आयोजित किया जाता है। इस दिन प्रधान मंत्री लाल किले पर तिरंगा फहराते है और अमर शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेने की सीख भी देते हैं।
2.हमारे राष्ट्रीय पर्व हैं -
होली और दिवाली
ईद और क्रिसमस
26 जनवरी और 2 अक्टूबर
हिंदी अपठित गद्यांश कार्यपत्रिका
दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उत्तर दीजिए -
15 अगस्त 1947 को भारत स्वत्रंत हुआ। इसी ख़ुशी में हम हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मानते है। यह दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है। हमारे अन्य राष्ट्री य पर्व है 26 जनवरी और 2 अक्टूबर क्टूबर हैं। 1947 से पहले भारत अंग्रेज़ो का गुलाम था। अनेक देश - भक्तों ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण त्याग दिए। स्वतंत्रता दिवस पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। मुख्य समारोह दिल्ली में आयोजित किया जाता है। इस दिन प्रधान मंत्री लाल किले पर तिरंगा फहराते है और अमर शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेने की सीख भी देते हैं।
3.भारत किसका गुलाम था -
अंग्रेजो का
फ्रांसीसियों का
अमेरिकन का
हिंदी अपठित गद्यांश कार्यपत्रिका
दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उत्तर दीजिए -
15 अगस्त 1947 को भारत स्वत्रंत हुआ। इसी ख़ुशी में हम हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मानते है। यह दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है। हमारे अन्य राष्ट्री य पर्व है 26 जनवरी और 2 अक्टूबर क्टूबर हैं। 1947 से पहले भारत अंग्रेज़ो का गुलाम था। अनेक देश - भक्तों ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण त्याग दिए। स्वतंत्रता दिवस पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। मुख्य समारोह दिल्ली में आयोजित किया जाता है। इस दिन प्रधान मंत्री लाल किले पर तिरंगा फहराते है और अमर शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेने की सीख भी देते हैं।
4. 15 अगस्त को प्रधानमंत्री कहाँ तिरंगा फहराते हैं -
राष्ट्रपति भवन
लाल किला
ताज महल
हिंदी अपठित गद्यांश कार्यपत्रिका
दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उत्तर दीजिए -
15 अगस्त 1947 को भारत स्वत्रंत हुआ। इसी ख़ुशी में हम हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मानते है। यह दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है। हमारे अन्य राष्ट्री य पर्व है 26 जनवरी और 2 अक्टूबर क्टूबर हैं। 1947 से पहले भारत अंग्रेज़ो का गुलाम था। अनेक देश - भक्तों ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण त्याग दिए। स्वतंत्रता दिवस पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। मुख्य समारोह दिल्ली में आयोजित किया जाता है। इस दिन प्रधान मंत्री लाल किले पर तिरंगा फहराते है और अमर शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेने की सीख भी देते हैं।
5.हमें किसके जीवन से प्रेरणा लेने की सीख देते हैं -
अमर शहीदों
अभिनेता
चित्र कथा के पात्र
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
प्रश्न -1 शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में किसका महत्त्व है?
थकान
व्यायाम
पसीना
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
शरीर की उपेक्षा करने वाला व्यक्ति अपने लिए -------दरवाजा खोलता है।
खुशी का
धन का
रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को --------- कर दिया है।
व्यस्त
खाली
उदास
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, ----------- तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है।
अशुद्ध जल
ठंडा जल
स्वच्छ जल
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
व्यायाम करने वाले व्यक्ति में ---------- आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
अद्भुत भक्ति
अद्भुत शक्ति
अद्भुत मति
लगभग दो सौ वर्ष की गुलामी ने भारत के राष्ट्रीय स्वाभिमान को पैरों से रौंद डाला, हमारी संस्कृति को समाप्त कर दिया, हमारे विश्वास को हिला दिया और हमारे आत्मविश्वास को चकनाचूर कर दिया। किंतु अपने देश से प्यार करने वाले, इसके एक सामान्य संकेत पर प्राण न्योछावर करने वाले दीवानों का अभाव न था। एक आवाज उठी और देखते-ही-देखते राष्ट्र का दबा हुआ आत्माभिमान उन्मत्त हो उठा। इतिहास साक्षी है- जाने और अनजाने सहस्रत्रों देशभक्त स्वतंत्रता की अमानत निधि को पाने के लिए शहीद हो गए।
प्रश्न -8 भारत ने कितने वर्षों की गुलामी झेली ?
३००
१००
२००
एक चिड़ा पेड़ पर घोंसला बनाकर मज़े से रहता था। एक दिन वह दाना - पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में पहुँच गया। वहाँ खाने- पीने की मौज से बड़ा ही खुश हुआ। उस खुशी में रात को वह घर आना भी भूल गया और उसके दिन मजे में वहीं बीतने लगे। इधर शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया जहाँ चिड़े का घोंसला था। पेड़ ज़रा भी ऊँचा नहीं था। इसलिए खरगोश ने उस घोंसलें में झाँक कर देखा तो पता चला कि यह घोंसला खाली पड़ा है। घोंसला अच्छा- खासा बड़ा था इतना कि उसमें खरगोश आराम से रह सकता था। उसे यह बना- बनाया घोंसला पसन्द आ गया और उसने वहीं रहने का फैसला कर लिया।
चिड़ा पेड़ पर क्या बना के रहता था ?
खेत
घोंसला
कुछ नही
दोनों
एक चिड़ा पेड़ पर घोंसला बनाकर मज़े से रहता था। एक दिन वह दाना - पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में पहुँच गया। वहाँ खाने- पीने की मौज से बड़ा ही खुश हुआ। उस खुशी में रात को वह घर आना भी भूल गया और उसके दिन मजे में वहीं बीतने लगे। इधर शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया जहाँ चिड़े का घोंसला था। पेड़ ज़रा भी ऊँचा नहीं था। इसलिए खरगोश ने उस घोंसलें में झाँक कर देखा तो पता चला कि यह घोंसला खाली पड़ा है। घोंसला अच्छा- खासा बड़ा था इतना कि उसमें खरगोश आराम से रह सकता था। उसे यह बना- बनाया घोंसला पसन्द आ गया और उसने वहीं रहने का फैसला कर लिया।
चिड़ा दाना- पानी के चक्कर में कहाँ पहुँच गया ?
बगीचे में
खेत में
घर में
कहीं नही
एक चिड़ा पेड़ पर घोंसला बनाकर मज़े से रहता था। एक दिन वह दाना - पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में पहुँच गया। वहाँ खाने- पीने की मौज से बड़ा ही खुश हुआ। उस खुशी में रात को वह घर आना भी भूल गया और उसके दिन मजे में वहीं बीतने लगे। इधर शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया जहाँ चिड़े का घोंसला था। पेड़ ज़रा भी ऊँचा नहीं था। इसलिए खरगोश ने उस घोंसलें में झाँक कर देखा तो पता चला कि यह घोंसला खाली पड़ा है। घोंसला अच्छा- खासा बड़ा था इतना कि उसमें खरगोश आराम से रह सकता था। उसे यह बना- बनाया घोंसला पसन्द आ गया और उसने वहीं रहने का फैसला कर लिया।
रात में कौन घर आना भूल गया ?
आदमी
चिड़ा
खरगोश
कोई नही
एक चिड़ा पेड़ पर घोंसला बनाकर मज़े से रहता था। एक दिन वह दाना - पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में पहुँच गया। वहाँ खाने- पीने की मौज से बड़ा ही खुश हुआ। उस खुशी में रात को वह घर आना भी भूल गया और उसके दिन मजे में वहीं बीतने लगे। इधर शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया जहाँ चिड़े का घोंसला था। पेड़ ज़रा भी ऊँचा नहीं था। इसलिए खरगोश ने उस घोंसलें में झाँक कर देखा तो पता चला कि यह घोंसला खाली पड़ा है। घोंसला अच्छा- खासा बड़ा था इतना कि उसमें खरगोश आराम से रह सकता था। उसे यह बना- बनाया घोंसला पसन्द आ गया और उसने वहीं रहने का फैसला कर लिया।
शाम को कौन पेड़ के पास आया ?
खरगोश
चूहा
कबूतर
कोई नही
एक चिड़ा पेड़ पर घोंसला बनाकर मज़े से रहता था। एक दिन वह दाना - पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में पहुँच गया। वहाँ खाने- पीने की मौज से बड़ा ही खुश हुआ। उस खुशी में रात को वह घर आना भी भूल गया और उसके दिन मजे में वहीं बीतने लगे। इधर शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया जहाँ चिड़े का घोंसला था। पेड़ ज़रा भी ऊँचा नहीं था। इसलिए खरगोश ने उस घोंसलें में झाँक कर देखा तो पता चला कि यह घोंसला खाली पड़ा है। घोंसला अच्छा- खासा बड़ा था इतना कि उसमें खरगोश आराम से रह सकता था। उसे यह बना- बनाया घोंसला पसन्द आ गया और उसने वहीं रहने का फैसला कर लिया।
जब खरगोश ने घोंसले में देखा तो घोंसला कैसा था ?
भरा था
खाली था
अंडे थे
वहाँ घोंसला था
एक चिड़ा पेड़ पर घोंसला बनाकर मज़े से रहता था। एक दिन वह दाना - पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में पहुँच गया। वहाँ खाने- पीने की मौज से बड़ा ही खुश हुआ। उस खुशी में रात को वह घर आना भी भूल गया और उसके दिन मजे में वहीं बीतने लगे। इधर शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया जहाँ चिड़े का घोंसला था। पेड़ ज़रा भी ऊँचा नहीं था। इसलिए खरगोश ने उस घोंसलें में झाँक कर देखा तो पता चला कि यह घोंसला खाली पड़ा है। घोंसला अच्छा- खासा बड़ा था इतना कि उसमें खरगोश आराम से रह सकता था। उसे यह बना- बनाया घोंसला पसन्द आ गया और उसने वहीं रहने का फैसला कर लिया।
खरगोश कहाँ आराम से रह सकता था ?
घर में
घोंसले में
छत पर
सब जगह
कुछ दिनों बाद वह चिड़ा खा- खाकर मोटा ताज़ा बन कर अपने घोंसलें की याद आने पर वापस लौटा। उसने देखा कि घोंसलें में खरगोश आराम से बैठा हुआ है। उसे बड़ा गुस्सा आया, उसने खरगोश से कहा, "चोर कहीं का, मैं नहीं था तो मेरे घर में घुस गये हो? चलो निकलो मेरे घर से, जरा भी शर्म नहीं आई मेरे घर में रहते हुए?"
चिड़ा खा- खाकर कैसा हो गया ?
पतला
मोटा
बीमार
सवस्थ
कुछ दिनों बाद वह चिड़ा खा- खाकर मोटा ताज़ा बन कर अपने घोंसलें की याद आने पर वापस लौटा। उसने देखा कि घोंसलें में खरगोश आराम से बैठा हुआ है। उसे बड़ा गुस्सा आया, उसने खरगोश से कहा, "चोर कहीं का, मैं नहीं था तो मेरे घर में घुस गये हो? चलो निकलो मेरे घर से, जरा भी शर्म नहीं आई मेरे घर में रहते हुए?"
चिड़े ने क्या देखा ?
कौवा आराम से घोंसले में है
चूहा आराम से घोंसले में है
खरगोश आराम से घोंसले में है
घोंसले में कोई नही है
कुछ दिनों बाद वह चिड़ा खा- खाकर मोटा ताज़ा बन कर अपने घोंसलें की याद आने पर वापस लौटा। उसने देखा कि घोंसलें में खरगोश आराम से बैठा हुआ है। उसे बड़ा गुस्सा आया, उसने खरगोश से कहा, "चोर कहीं का, मैं नहीं था तो मेरे घर में घुस गये हो? चलो निकलो मेरे घर से, जरा भी शर्म नहीं आई मेरे घर में रहते हुए?"
किसे गुस्सा आया ?
खरगोश को
चिड़े को
दोनों को
किसी को नही
एक चिड़ा पेड़ पर घोंसला बनाकर मजे से रहता था। एक दिन वह दाना पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में पहुँच गया। वहाँ खाने पीने की मौज से बड़ा ही खुश हुआ। उस खुशी में रात को वह घर आना भी भूल गया और उसके दिन मजे में वहीं बीतने लगे। इधर शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया जहाँ चिड़े का घोंसला था। पेड़ जरा भी ऊँचा नहीं था। इसलिए खरगोश ने उस घोंसलें में झाँक कर देखा तो पता चला कि यह घोंसला खाली पड़ा है। घोंसला अच्छा खासा बड़ा था इतना कि उसमें खरगोश आराम से रह सकता था। उसे यह बना- बनाया घोंसला पसन्द आ गया और उसने वहीं रहने का फैसला कर लिया। कुछ दिनों बाद वह चिड़ा खा- खाकर मोटा ताजा बन कर अपने घोंसलें की याद आने पर वापस लौटा। उसने देखा कि घोंसलें में खरगोश आराम से बैठा हुआ है। उसे बड़ा गुस्सा आया, उसने खरगोश से कहा, "चोर कहीं का, मैं नहीं था तो मेरे घर में घुस गये हो? चलो निकलो मेरे घर से, जरा भी शर्म नहीं आयी मेरे घर में रहते हुए?" खरगोश शान्ति से जवाब देने लगा, "कहाँ का तुम्हारा घर? कौन सा तुम्हारा घर? यह तो मेरा घर है। पागल हो गये हो तुम। अरे! कुआँ, तालाब या पेड़ एक बार छोड़कर कोई जाता हैं तो अपना हक भी गवाँ देता हैं। यहाँ तो जब तक हम हैं, वह अपना घर है। बाद में तो उसमें कोई भी रह सकता है। अब यह घर मेरा है।
गद्यांश को ध्यान से पढ़कर बताइए इसका शीर्षक क्या हो सकता है ?
चतुर पेड़
सुंदर चिड़ा
चतुर खरगोश
कोई भी नही
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल उन महान क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने अपने कार्यों से अंग्रेज़ी हुकूमत को हिला दिया था। जब राम प्रसाद आर्य समाज के संपर्क में आए, इनके जीवन में क्रांति आ गई. इनमें बुराइयों का सामना करने का साहस जाग उठा। उन दिनों स्वतंत्रता आंदोलन जोर पर था। राम प्रसाद को पता चला कि क्रांतिकारी युवक देश में सजग तथा देश की स्वतंत्रता के लिए मर मिटने को तैयार हैं। बिस्मिल क्रांतिकारी संगठन के सदस्य बन गए। इन्होंने एक पुस्तक भी लिखी-'अमरीका को स्वतंत्रता कैसे मिली?' इनकी 'स्वदेश-रंग' नामक पुस्तक बहुत प्रसिद्ध है। आंदोलन में धन की कमी एक बहुत बड़ी समस्या थी। धन जुटाने के लिए इन्होंने किसी दीन-हीन को नहीं सताया, बल्कि अंग्रेजों का सरकारी खजाना लूटने की योजना बनाई। इन्होंने 9 अगस्त, 1925 को काकोरी स्टेशन पर धन लूटकर स्वाधीनता संग्राम में लगा दिया। इसके लिए इनपर मुकदमा चलाया गया इन्हें फाँसी की सजा दी गई । पंडित बिस्मिल ने 26-27 वर्ष की आयु में वह कार्य कर दिखाया, जो लंबी आयु जीने वाले भी नहीं कर पाे। ये
एक कवि भी थे, इनकी ये पंक्तियाँ समय-समय पर हमें प्रेरणा देती हैं:
'सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।'
उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनिए :
1.गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक है।
महान क्रांतिकारी
सरफरोशी की तमन्ना
स्वदेश रंग
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल उन महान क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने अपने कार्यों से अंग्रेज़ी हुकूमत को हिला दिया था। जब राम प्रसाद आर्य समाज के संपर्क में आए, इनके जीवन में क्रांति आ गई. इनमें बुराइयों का सामना करने का साहस जाग उठा। उन दिनों स्वतंत्रता आंदोलन जोर पर था। राम प्रसाद को पता चला कि क्रांतिकारी युवक देश में सजग तथा देश की स्वतंत्रता के लिए मर मिटने को तैयार हैं। बिस्मिल क्रांतिकारी संगठन के सदस्य बन गए। इन्होंने एक पुस्तक भी लिखी-'अमरीका को स्वतंत्रता कैसे मिली?' इनकी 'स्वदेश-रंग' नामक पुस्तक बहुत प्रसिद्ध है। आंदोलन में धन की कमी एक बहुत बड़ी समस्या थी। धन जुटाने के लिए इन्होंने किसी दीन-हीन को नहीं सताया, बल्कि अंग्रेजों का सरकारी खजाना लूटने की योजना बनाई। इन्होंने 9 अगस्त, 1925 को काकोरी स्टेशन पर धन लूटकर स्वाधीनता संग्राम में लगा दिया। इसके लिए इनपर मुकदमा चलाया गया इन्हें फाँसी की सजा दी गई । पंडित बिस्मिल ने 26-27 वर्ष की आयु में वह कार्य कर दिखाया, जो लंबी आयु जीने वाले भी नहीं कर पाे। ये
एक कवि भी थे, इनकी ये पंक्तियाँ समय-समय पर हमें प्रेरणा देती हैं:
'सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।'
राम प्रसाद के जीवन में परिवर्तन कब आया ?
जब भी क्रांतिकारियों के संपर्क में आए
जब अमरीका को स्वतंत्रता मिली
जब भी आर्य समाज के संपर्क में आए
इनमें से कोई नहीं
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल उन महान क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने अपने कार्यों से अंग्रेज़ी हुकूमत को हिला दिया था। जब राम प्रसाद आर्य समाज के संपर्क में आए, इनके जीवन में क्रांति आ गई. इनमें बुराइयों का सामना करने का साहस जाग उठा। उन दिनों स्वतंत्रता आंदोलन जोर पर था। राम प्रसाद को पता चला कि क्रांतिकारी युवक देश में सजग तथा देश की स्वतंत्रता के लिए मर मिटने को तैयार हैं। बिस्मिल क्रांतिकारी संगठन के सदस्य बन गए। इन्होंने एक पुस्तक भी लिखी-'अमरीका को स्वतंत्रता कैसे मिली?' इनकी 'स्वदेश-रंग' नामक पुस्तक बहुत प्रसिद्ध है। आंदोलन में धन की कमी एक बहुत बड़ी समस्या थी। धन जुटाने के लिए इन्होंने किसी दीन-हीन को नहीं सताया, बल्कि अंग्रेजों का सरकारी खजाना लूटने की योजना बनाई। इन्होंने 9 अगस्त, 1925 को काकोरी स्टेशन पर धन लूटकर स्वाधीनता संग्राम में लगा दिया। इसके लिए इनपर मुकदमा चलाया गया इन्हें फाँसी की सजा दी गई । पंडित बिस्मिल ने 26-27 वर्ष की आयु में वह कार्य कर दिखाया, जो लंबी आयु जीने वाले भी नहीं कर पाे। ये
एक कवि भी थे, इनकी ये पंक्तियाँ समय-समय पर हमें प्रेरणा देती हैं:
'सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।'
बिस्मिल ने धन की समस्या हल करने के लिए क्या योजना बनाई?
गरीबों को लूटने की योजना
अधिक परिश्रम करके धन कमाने की योजना
सरकारी खजाना लूटने की योजना
चंदा इकट्ठा करने की योजना
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल उन महान क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने अपने कार्यों से अंग्रेज़ी हुकूमत को हिला दिया था। जब राम प्रसाद आर्य समाज के संपर्क में आए, इनके जीवन में क्रांति आ गई. इनमें बुराइयों का सामना करने का साहस जाग उठा। उन दिनों स्वतंत्रता आंदोलन जोर पर था। राम प्रसाद को पता चला कि क्रांतिकारी युवक देश में सजग तथा देश की स्वतंत्रता के लिए मर मिटने को तैयार हैं। बिस्मिल क्रांतिकारी संगठन के सदस्य बन गए। इन्होंने एक पुस्तक भी लिखी-'अमरीका को स्वतंत्रता कैसे मिली?' इनकी 'स्वदेश-रंग' नामक पुस्तक बहुत प्रसिद्ध है। आंदोलन में धन की कमी एक बहुत बड़ी समस्या थी। धन जुटाने के लिए इन्होंने किसी दीन-हीन को नहीं सताया, बल्कि अंग्रेजों का सरकारी खजाना लूटने की योजना बनाई। इन्होंने 9 अगस्त, 1925 को काकोरी स्टेशन पर धन लूटकर स्वाधीनता संग्राम में लगा दिया। इसके लिए इनपर मुकदमा चलाया गया इन्हें फाँसी की सजा दी गई । पंडित बिस्मिल ने 26-27 वर्ष की आयु में वह कार्य कर दिखाया, जो लंबी आयु जीने वाले भी नहीं कर पाे। ये
एक कवि भी थे, इनकी ये पंक्तियाँ समय-समय पर हमें प्रेरणा देती हैं:
'सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।'
खजाना कब और कहां लूटा गया?
9 सितंबर 1925 को राजौरी गार्डन में
9 अगस्त 1925 को काकोरी स्टेशन पर
9 अक्टूबर 1925 को वर्धमान स्टेशन पर
9 जुलाई 1925 को काकोरी स्टेशन पर
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल उन महान क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने अपने कार्यों से अंग्रेज़ी हुकूमत को हिला दिया था। जब राम प्रसाद आर्य समाज के संपर्क में आए, इनके जीवन में क्रांति आ गई. इनमें बुराइयों का सामना करने का साहस जाग उठा। उन दिनों स्वतंत्रता आंदोलन जोर पर था। राम प्रसाद को पता चला कि क्रांतिकारी युवक देश में सजग तथा देश की स्वतंत्रता के लिए मर मिटने को तैयार हैं। बिस्मिल क्रांतिकारी संगठन के सदस्य बन गए। इन्होंने एक पुस्तक भी लिखी-'अमरीका को स्वतंत्रता कैसे मिली?' इनकी 'स्वदेश-रंग' नामक पुस्तक बहुत प्रसिद्ध है। आंदोलन में धन की कमी एक बहुत बड़ी समस्या थी। धन जुटाने के लिए इन्होंने किसी दीन-हीन को नहीं सताया, बल्कि अंग्रेजों का सरकारी खजाना लूटने की योजना बनाई। इन्होंने 9 अगस्त, 1925 को काकोरी स्टेशन पर धन लूटकर स्वाधीनता संग्राम में लगा दिया। इसके लिए इनपर मुकदमा चलाया गया इन्हें फाँसी की सजा दी गई । पंडित बिस्मिल ने 26-27 वर्ष की आयु में वह कार्य कर दिखाया, जो लंबी आयु जीने वाले भी नहीं कर पाे। ये
एक कवि भी थे, इनकी ये पंक्तियाँ समय-समय पर हमें प्रेरणा देती हैं:
'सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।'
बिस्मिल महान क्रांतिकारी क्यों कहलाए?
क्योंकि वह मुस्लिम थे
क्योंकि उन्होंने पुस्तकें लिखी थी
क्योंकि उन्हें फांसी की सजा दी गई थी
क्योंकि उन्होंने अपने कार्य से अंग्रेजी हुकूमत को हिला दिया था
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल उन महान क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने अपने कार्यों से अंग्रेज़ी हुकूमत को हिला दिया था। जब राम प्रसाद आर्य समाज के संपर्क में आए, इनके जीवन में क्रांति आ गई. इनमें बुराइयों का सामना करने का साहस जाग उठा। उन दिनों स्वतंत्रता आंदोलन जोर पर था। राम प्रसाद को पता चला कि क्रांतिकारी युवक देश में सजग तथा देश की स्वतंत्रता के लिए मर मिटने को तैयार हैं। बिस्मिल क्रांतिकारी संगठन के सदस्य बन गए। इन्होंने एक पुस्तक भी लिखी-'अमरीका को स्वतंत्रता कैसे मिली?' इनकी 'स्वदेश-रंग' नामक पुस्तक बहुत प्रसिद्ध है। आंदोलन में धन की कमी एक बहुत बड़ी समस्या थी। धन जुटाने के लिए इन्होंने किसी दीन-हीन को नहीं सताया, बल्कि अंग्रेजों का सरकारी खजाना लूटने की योजना बनाई। इन्होंने 9 अगस्त, 1925 को काकोरी स्टेशन पर धन लूटकर स्वाधीनता संग्राम में लगा दिया। इसके लिए इनपर मुकदमा चलाया गया इन्हें फाँसी की सजा दी गई । पंडित बिस्मिल ने 26-27 वर्ष की आयु में वह कार्य कर दिखाया, जो लंबी आयु जीने वाले भी नहीं कर पाे। ये
एक कवि भी थे, इनकी ये पंक्तियाँ समय-समय पर हमें प्रेरणा देती हैं:
'सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।'
लंबी आयु जीने वाला वाक्यांश के लिए एक शब्द है
लंबायु
अल्पायु
हुमायूं
दीर्घायु
