Worksheetsमातृभूमि, काशमीरी सेब और वचन - Gulamnabi si And Rahimunnisa mam
Total questions: 40
Worksheet time: 20mins
मातृभूमि पद्य के कवि हैं -
भगवती चरण वर्मा
महादेवी वर्मा
रामकुमार वर्मा
हरिशंकर परसाई
भगवती चरण वर्मा जी के कौनसे उपन्यास पर दो बार फिल्म बनी है-
गबन
भूत के पांव पीछे
दीपशिखा
चित्रलेखा
मातृभूमि के अंदर शाइत हैं
राम
गांधी
बुद्ध
उपर्युक्त सभी
कवि भगवती चरण वर्मा किसे प्रणाम कर रहे हैं
मातृभूमि को
गुरु को
अपनी माँ को
पिता को
भारत माता के हाथों में है -
न्याय पताका और ज्ञानदीप
फल फूल
तलवार
पुस्तकें
सभी ओर गूँज रहा है -
जय हिंद का नाद
दर्द भरा नाद
मधुर नाद
कर्कष नाद
भारत माँ के खेत -
सूखे हैं
खाली हैं
हरे भरे हैं
पीले पीले हैं
माँ सुख संपत्ति धन -धाम बाँट रही है -
हृदय से
मुक्त हस्त से
प्रेम से
गुस्से से
कवि मातृभूमि से निवेदन करता है -
खुद का रूप बदलने को
जग का रूप बदलने को
भारत का रूप बदलने को
शत्रुओं का रूप बदलने को
भारत भूमि के अंदर भरा हुआ है -
सोना - चांदी
कला का धन
खनिजों का धन
नोटों का धन
"चीज" शब्द का बहुवचन है -
चीजें
चीजों
चीज
चीजियाँ
"फल" का अन्य वचन है -
फलों
फलें
फल्ली
फल
"घर" का अन्य वचन रूप है -
घरौंदा
घर
मकान
घरों
निम्नलिखित में से बहुवचन शब्द है -
रुपये
लड़का
पुस्तक
खिड़की
"आँखें" शब्द का अन्य वचन है -
अँखियाँ
आँख
पलक
आँखों
"कर्मचारी" का अन्य वचन है -
कर्मचारी
कामचारी
आचारी
कर्मचारियों
"व्यापारी" का अन्य वचन है -
व्यापार
ब्योपार
व्यापारियों
व्यापारी
इनमें एकवचन रूप शब्द है -
रेवड़ी
कलियाँ
घोड़े
किताबें
"दुकान" का अन्य वचन रूप है -
दुकानों
दुकानें
दुकान
दुकानदार
इनमें से बहुवचन रूप है -
लिफाफे
गधा
औरत
लड़की
"लेखक" शब्द का अन्य वचन है -
लेखकों
लेखिका
लेखक
लिखनेवाला
"कौआ" शब्द का बहुवचन रूप है -
कौए
खोवा
कौव्वॉ
कव्वे
"गमले" शब्द का एकवचन रूप है -
गमला
कमला
गमलों
गमली
इनमें से बहुवचन रूप है -
लड़की
लड़कियाँ
बोतल
मेंज़
आजकल शिक्षित समाज में इन विषयों के बारे में बातचीत की जाती है -
लोगों के बारे में
घरों के बारे में
कपड़ों के बारे में
प्रोटीन और विटामिन के बारे में
सेब का रंग था -
पीला
गुलाबी
हरा
नीला
लेखक सेब खरीदने गए थे -
चौक में
मंडी में
घर पर
रास्ते पर
टोमाटो इसका आवश्यक अंग है -
भोजन का
नाटक का
पाठ का
स्वस्थ का
सेब स्वाद में इस से बढ़कर नहीं है -
अंगूर
केला
आम
सीताफल
कश्मीरी सेब इस विधा का गद्य है -
कहानी
व्यंग रचना
रेखाचित्र
पद्य है
दुकानदार ने सेब के बारे में कहा -
रंगदार हैं
मजेदार हैं
खास कश्मीर के हैं
उपर्युक्त सभी
रेवड़ी बेचने वाला था -
ईमानदार
बेईमान
स्वार्थी
भोला
लेखक प्रेमचंद सेब खाने के लिए लिफाफा खोलते हैं -
सुबह को
शाम को
रात को
दिन को
अब मेजों पर स्थान मिल गया है -
सेब को
गाजर को
हलवे को
केले को
डॉक्टर से बचने के लिए हम खाने को तैयार हैं -
दवाई
निमकौड़ी
सेब
चूर्ण
लेखक ने सेब खरीदे -
आध सेर
पौना सेर
एक सेर
आधा किलो
सेब बेचने वाला था -
राजस्थानी कचोरी वाला
पंजाबी मेवा फरोश
गांव का दुकानदार
पड़ोसी
सेब को देखकर लेखक का जी -
ललचा उठा
घबरा उठा
रो पड़ा
आश्चर्य हुआ
रोज इसे खाइए और डॉक्टर से दूर रहिए -
सेब को
आम को
जाम को
अंगूर को
गिल्लू : महादेवी वर्मा :: कश्मीरी : _________ ।
विष्णुप्रभाकार
परसाई
अब्दुल कलाम
प्रेमचंद
