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Worksheetsश्री वीरकुन्दकहान पाठशाला Quiz-4
Total questions: 25
Worksheet time: 13mins
वीतरागी का सही अर्थ है
बीत गया है द्वेष जिनका
बीत गया है राग जिनका
बीत गया है मोह राग-द्वेष जिनका
बीत गया है पाप जिनका
यह चित्र किसका है-
तीर्थंकर का
भगवान का
आचार्य जी का
सभी का
भगवान किसे कहते हैं
जो राग द्वेष करते हैं
जो बीतरागी हो
जो अपने को जानते हैं
जो वीतरागी और सर्वज्ञ होते हैं
समवशरण में कौनसे परमेष्ठी विराजमान हैं-
सिद्ध परमेष्ठी
अरिहंत परमेष्ठी
आचार्य परमेष्ठी
उपाध्याय परमेष्ठी
शरीर, धन ,मकान आदि मे अपनापन करना किसका उदाहरण है-
राग का
द्वेष का
मोह का
किसी का नहीं
राग किसे कहते हैं
किसी को भला जानकर चाहना
किसी को बुरा जानकर दूर करना
सब के प्रति राग द्वेष करना
यह सभी
द्वेष किसे कहते हैं
किसी को भला जानकर चाहना
किसी को बुरा जानकर दूर करना
मोह राग द्वेष करना
यह सभी
वीतरागी होने से पहले हमें किन-किन चीजों का क्रम से नाश करना होगा
मोह राग द्वेष
द्वेष राग मोह
मोह द्वेष राग
कोई नहीं
सर्वज्ञ का संधि विच्छेद और अर्थ है-
सर्व + अज्ञ =सभी को थोड़ा जाने
सर्व +ज्ञ= सभी को जाने
स+ र्वज्ञ = सबको ज्यादा जाने
कोइ नही
सर्वज्ञ भगवान सब पदार्थों को कैसे जानते हैं
क्रम से
आगे पीछे
जैसे चाहे
एक साथ
सर्वज्ञ भगवान किन पदार्थों को जानते हैं
मनुष्य लोक के सभी जीवो को
भूत और भविष्य काल को
तीन लोकों व तीनों कालों के
केवल वर्तमान को
क्या सभी भगवान वीतरागी सर्वज्ञ और हितोपदेशी होते हैं
हां
नहीं
सिद्ध भगवान कैसे होते हैं
वीतरागी
सर्वज्ञ
वीतरागी, सर्वज्ञ
हितोपदेशी
वीतरागी, सर्वज्ञ और हितोपदेशी किसका लक्षण है
सिद्ध का
उपाध्याय का
साधु का
अरिहंत का
वीतरागी शब्द का संधि विच्छेद है
वीत+रागी
बीत+अरागी
बी+तरागी
कोई नहीं
जैन धर्म की खडी में ज शब्द किस को सूचित करता है
ज से जलन मत करो
ज से जुआ कभी मत खेलो
जग का हित करना
कोइ नहीं
जैन धर्म की 12 खड़ी में द शब्द किस को सूचित करता है
द से दमन आत्मा का करना
द से दमन कषायों का करना
द से दमन राग का करना
कोइ नहीं
नहीं .................के साथ लेंगे ........ को हाथ.. 1 दिन प्रार्थना की लाइन को पूरा करें
पर स्व
स्व पर
स्वद्रव्य परद्रव्य
परद्रव्यों, स्वद्रव्य
जिन मंदिर में घंटा हमें क्या सूचित करता है
जिन मंदिर आने के लिए
खाने के लिए
अरिहन्तो की पूजा करने के लिए
A और C दोनों
कविता 8 के माध्यम से समय नाम के दो अर्थ कौन से किए हैं
6 द्रव्य और आत्मा
अजीव और आत्मा
शरीर और चेतन
कोई नहीं
हमारे धर्म पिता कौन हैं
पंच परमेष्ठी
केवल अरिहंत
केवल उपाध्याय
केवल साधु
नंबर इज द नाइन -
जिन की आज्ञा फाइन
जिनवर दर्शन फाइन
जिनवर होते हैं फाइन
कोई नहीं
हितोपदेशी कहते हैं
जो हित ( सुखी) होने का उपदेश दे
जो संसार के सुखों का उपदेश दे
अहित का उपदेश दे
कोई नहीं
यह चित्र किसका है
अरिहन्त का
समवशरण का
सिद्ध का
कोई नहीं
सबसे बड़ा पाप है-
मिथ्यात्व
हिंसा
लोभ
सभी
