Worksheetsकर्मयोग
Total questions: 40
Worksheet time: 30mins
जीव तथा पूर्ण पुरुषोतम भगवान के बिच के इस दिव्य सम्बन्ध की विस्मृति ने ही हर व्यक्ति में यह झूठा भाव उत्पन्न किया हे की वह लघु श्री कृष्ण है
सही
गलत
यह स्पष्ट उदाहरण] कहाँ दिया गया है "शरीर के अंग भोजन खोजने के लिए अलग-अलग चले गए"?
भक्ति रसामृत सिन्धु
महाभारत
हितोपदेश
स्कन्द पुराण
क्या श्री कृष्ण का भक्त बनने के लिए किसी विशेष जाती,पंथ,रंग या देश की कोई सीमा हे?
हाँ, बिलकुल हे
नहीं इसकी कोई झरूरत नहीं
मुर्ख स्वयं को कृष्ण का ______मान लेता है
सेवक
प्रतियोगी
पुत्र
दाम्पत्य प्रेमी
चारो सामजिक वर्ग हे....
भारत में
सूर्यलोक में
पृथ्वी में
सम्पूर्ण ब्रह्माण्डमें
इस ब्रह्माण्ड के अंतर्गत सर्वोच्च शास्त्र कोनसा है?
श्रीमद भागवतम
श्रीमद भगवद्गीता
चैतन्य चरितामृत
उपरोक्त सभी
जो व्यक्ति पूर्णतया अध्यात्मिकृत हो जाता हे वह _______को पार कर जाता हे
भगवान की आध्यात्मिक शक्ति
प्रकृति के गुणों
भगवान की भौतिक शक्ति
कुछ नहीं
वेदान्त के सत्य के द्वारा की परमात्मा.....
मेंरे भौतिक शरीर में हे
भौतिक हे
सर्वव्यापक हे
उपरोक्त सभी
भगवद गीता के कोंसे श्लोक में श्रीकृष्ण ने कहा की वे किसी के द्वारा किये गए किसी विशेष कर्म के कारण नहीं हे न ही ऐसे कर्मफल के कारण हे...?
७.१४
५.१३
८.२६
१०.१०
यज्ञ में कितने मुख्य घटक होते हे?
सात
दस
छह
पांच
पतंजलि की विधि के अनुसार योग का लक्ष्य....
मानसिक स्तर पर उसकी विभिन्न चंचल प्रवुतियो सहित पूर्ण नियंत्रण हे
भौतिक जगत में आत्मा का सम्पूर्ण नितंत्रण
परम भगवान का सम्पूर्ण नियंत्रण
उपरोक्त सभी
योगमार्ग ________हे
चर और एक
एकरूप और दो
चर और दो
एकरूप तथा एक
कर्म योग पुस्तक के दुसरे अध्याय का शीर्षक क्या है?)
दिव्य-ज्ञान
कर्म-योग
कृष्ण के ज्ञान में कर्म
कृष्ण की शक्तियो का ज्ञान
सरीसृप तथा कीटों की कितनी योनिया है?
४००,०००
९००,०००
११,००,०००
३,०००,०००
जंगली पशुओं की कितनी योनिय है?
३,०००,०००
१,०००,०००
२,०००,०००
४००,०००
"कर्तव्य" का अर्थ_____
शास्त्रों तथा पवित्र विधि-ग्रंथो में संस्तुत कार्य
वह कार्य जो शास्त्रों तथा पवित्र ग्रंथो में संस्तुत नहीं किया है
कार्य जो शास्त्रों के विपरीत है
इनमे से कोई नहीं
जो वास्तविक रूप से संन्यस्त हैं, वे समझते हे की_____
सामजिक वर्गीकरण में संस्तुत नैत्यिक कर्तव्य को उन्हें त्यागना नहीं चाहिए
सामजिक वर्गीकरण में संस्तुत नैत्यिक कर्तव्य को उन्हें त्यागना चाहिए
वे कुछ समय के लिए सामाजिक व्यवस्था में अपने निर्धारित दैनिक कर्तव्यों का पालन करना छोड़ देते हैं और फिर से अपने काम पर लौट आते हैं
इनमे से कोई नहीं
पूर्ण पुरुषोतम भगवान श्रीकृष्ण की कृपा तथा गुरु की कृपा से ही कोई भाग्यशाली जीव दिव्य प्रेमाभक्ति सेवा का बीज प्राप्त कर सकता हे| यह कथन किसने कहाँ?
हरदास ठाकुर
नारदमुनी
भगवान चैतन्य
कृष्णदास कविराज गोस्वामी
विष्णु परम आराध्य देव हैं अत: सारे अधीनस्थ देवता विष्णु तथा उनके चरणकमलों की और देखते हैं" | यह कथन कोंसे वेद में दिया गया हैं?
ऋग्वेद
यजुर्वेद
सामवेद
अथर्ववेद
प्राचीन काल में भारत के लोग (जो सम्प्रति 'हिन्दू' नामक मिथ्या नाम से सम्भोधित किये जाते हे) वर्णाश्रम धर्म या सनातन धर्म का पालन करते थे| यह एसी प्रणाली थी, जो मनुष्यों के कार्यकलापों को चार सामाजिक तथा चार आध्यात्मिक क्रमो में व्यवस्थित नहीं करती थी.
सही
गलत
विद्वान सन्तो का कहना है कि भगवान विष्णु के चरणकमलों को प्राप्त करने का अर्थ है, मोक्ष प्राप्त करना|
सही
गलत
स्मृति में कितने प्रकार के पाप है जो विधिग्रंथ से जाने जाती हैं?
चार
पांच
सात
तीन
इसलिए समस्त देशों तथा समुदायों के नेताओं को अपने लाभार्थ तथा अपने अनुयायियों के लाभार्थ सर्वप्रथम ______ संतुष्ट करना सुनिश्चित करना चाहिए |
भगवान शिव
भगवान ब्रह्मा
भगवन इंद्र
परम भगवान श्रीविष्णु
"सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में हम जो कुछ भी विद्यमान देखते हैं, वह मूलतः परम भोक्ता की सम्पति है और व्यक्ति केवल उन्ही वस्तुओ को भोग सकता हे जो उनके द्वारा कृपापूर्वक प्रदान की जाती हैं, किन्तु उसे दुसरो की सम्पति को स्पर्श भी नही करना चाहिए|" यह कथन कोंसे शास्त्र में दिया गया हैं?
इशोपनिषद्
श्रीमद-भागवतम
चैतन्य चरितामृत
भगवद गीता यथारूप
कर्म योग का सार क्या हैं?
सदैव प्रतिकूल कर्मबन्धन से मुक्ति प्राप्त करो
सदैव अनूकुल कर्मबंधन से मुक्ति को प्राप्त करों
अनूकुल कर्मबंधन से मुक्ति को प्राप्त मत करो
इनमे से कोई नहीं
सामान्य तौर पर लोग _________ के मामलों में बेहद व्यस्त होते हैं
भौतिक शरीर
मन
आत्मा
अ और ब दोनों
हमारे गुरुओ द्वारा क्या प्रज्वल्लित किया जाता हे?
अविद्या का अंधकार
ज्ञान का प्रकाश
अ और ब दोनों
इनमे से कोई नहीं
हम देख रहे हे की वर्तमान समय अविद्या के अन्धकार से आच्छादित हे.
सही
गलत
आदर्श आध्यात्मिक गुरु कोन हे?
भगवान शिव
भगवान ब्रह्मा
भगवान गणेश
पूर्ण पुरुषोतम भगवान श्री कृष्ण
जीसस क्राइस्ट इश्वर के______रूप में प्रकट हुए | मुहम्मद साहब ने अपने को इश्वर का ______ कहा.
दास,पुत्र
पुत्र,दास
पुत्र,पुत्र
इनमे से कोई नहीं
कर्म योग पुस्तक के पहले अध्याय का नाम क्या हे?
हरे कृष्ण मंत्र का जप
कर्म-योग : दिव्य फल से युक्त कर्म
दिव्य ज्ञान
इनमे से कोई नहीं
वास्तव में विद्वान मनुष्य उस सुख - दुःख को अधिक महत्त्व देता हे जो केवल भौतिक तन और मन से सम्बंधित हे
गलत , यह विद्वान मनुष्य के लक्ष्ण नहीं हे
सही
किसने भगवन के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया और नास्तिकता की भावना में नैतिकता का प्रचार किया और कभी यह प्रचार नहीं किया की इस भौतिक जगत में शाश्वत शान्ति और सम्पन्नता प्राप्त करने की कोई संभावना हे
वल्लभाचार्य और शंकराचार्य
भगवान बुद्ध और शंकराचार्य
भगवान बुद्ध और मध्वाचार्य
रामानुजाचार्य और विष्णुस्वामी
श्रीमद भगवद्गीता की सर्वोच्च शिक्षा क्या हे?
जब तक मनुष्य अपने नित्यजीवन को पुन: प्राप्त करने की समस्या का हल निकालने का प्रयत्न नहीं करता, तब तक उसे न तो इस जीवन में और नहीं मृत्यु के बाद वाले जीवन में किसी प्रकार की शान्ति मिल सकती हे
कोई अपनी समस्याओं को शाश्वत सत्य के दृष्टिकोण से हल करने का प्रयास करता है, इस जीवन में या मृत्यु के बाद के जीवन में कोई भी शांति नहीं हो सकती है।
जब तक कोई अपनी समस्याओं को शाश्वत सत्य के दृष्टिकोण से हल करने का प्रयास नहीं करता, तब तक इस जीवन में या मृत्यु के बाद के जीवन में कोई भी शांति हो सकती है।
इनमे से कोई नहीं
अत: जब हम जिव की बात करते हे तो हमें चाहिए की _________को, दो बाह्य आवरणों को, साज-सामग्री के दो स्तरों के रूप में देखे और_____ को उनके केंद्र के रूप में देखें
सजीव शक्ति और मन, शरीर
शरीर तथा मन को, सजीव शक्ति
शरीर तथा सजीव शक्ति, मन
अ और ब दोनों
वास्तविक शांति केवल ________प्राप्त की जा सकती है|
जीवन की भौतिक अवस्था में
शांति सम्मेलन की बैठक से
जीवन की दिव्य अवस्था में
यह केवल नाटकीय बात है
भगवद गीता की भाषा में आत्मा को ____ कहा गया है|
क्षेत्रज्ञ
क्षेत्र
दोनों
कोई नहीं
दिव्य ज्ञान प्राप्त करने के लिए हमारा सर्वप्रथम कर्तव्य क्या हे?
यह समजना की शरीर शाश्वत सत्य हे
यह समजना की आत्मा शाश्वत सत्य हे
यह समजना की शरीर कभी समाप्त नहीं हो सकता
यह समजना की हम ही परम भगवान हे
अत्यंत सूक्ष्म होने के कारण तथा भौतिक नेत्रों द्वारा न देख सकने के कारण आत्मा को __________कहा जाता हे
अव्याखेय
व्याखेय
अकल्पनीय
अ और क दोनों
ब और क दोनों
हमें इतने कष्टों और संघर्षो का सामना करना पद रहा हे|
क्योंकि हमने भौतिक प्रकृति को पार कर लिया हे
क्योंकि हमने इन बाह्य उपाधियो को अंगीकार नहीं किया हे
क्योंकि हमने इन बाह्य उपाधियों को अंगीकार किया हुआ है
उपरोक्त सभी
