Worksheetsउत्तम आकिंचन्य धर्म
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Worksheet time: 13mins
पूजन के अनुसार आकिंचन्य धर्म को क्या कहा है ❓
धर्म दस सार
कुछ नही मेरा
उत्तम धर्म
आत्मा का लक्षण
उत्तम आकिंचन्य धर्म किसे कहते हैं ❓
अपने ज्ञान दर्शनमय के बिना अन्य कुछ मेरा नही,
मैं किसी अन्य द्रव्य का नही ,
मैं इस देह से भिन्न ज्ञायक हूँ ,
यह देह सम्बन्ध और उपरोक्त सभी
आकिंचन्य भावना मैंने पहले किस भव में भाई थी ❓
वर्तमान भव में
पूर्व भव में
अनादि से आज तक नही
सभी
जिनके आकिंचनयपना होता हैं उनके परमार्थ जो शुद्ध आत्मा का विचार करने की ....प्रगट होती हैं ❓
पर्याय
भाव
शक्ति
अनुकूलता
इनमें से कौन सा परिग्रह का भेद नही हैं ❓
घर मकान
भूमि शयन
राग द्वेष
मिथ्यात्व
इनमें से कौन सा बहिरंग परिग्रह का नाम नही है ❓
नौकर
जाति
सोना - चांदी
खेत
इनमें से कौन सा अंतरंग परिग्रह नही है ❓
हास्य
भय
वेद
ईर्ष्या
निर्ग्रन्थ 6 वे गुणस्थानवर्ती मुनिराज को कौन सा परिग्रह हैं❓
संज्वलन कषाय सम्बंधित
आहार सामग्री का
शास्त्र का
पिच्छी कमंडल का
ग्रहस्थ सम्यकदृष्टि श्रावक को अपरिग्रही किस अपेक्षा से कहाँ ❓
नैगम नय से
व्यवहार से एक देश त्यागी
गृहस्थी में रहते हुए भी पर द्रव्य से एकत्व ममत्व नही हैं।
निश्चय अपेक्षा से कहा हैं।
आकिंचन्य की क्या परिभाषा है ❓
कुछ न कुछ मेरा हैं।
‘‘न मे किञ्चन अकिञ्चनः अर्थात् मेरा कुछ भी नहीं है
मैं ज्ञेय मात्र हूँ ।
मैं अपरिग्रही मुनि हूँ।
आकिंचन्य धर्म किसके आभाव में प्रगट होता है?
मान-कषाय
परिग्रह
मायाचारी
चोरी एवं पर वस्तु के प्रति लालसा का भाव
अकिंचन किनको कहते हैं ❓
उक्त सभी सभी
सभी साधु वेष आकिंचन्य हैं।
सम्पूर्ण आरम्भ और परिग्रह की इच्छा से रहित महासाधु ही अकिंचन कहलाते हैं।
जिनके पास कुछ भी समान ,घर नहीं हो ।
परिग्रह को भार क्यों कहा गया है ❓
क्योकि समान रखने के लिये घर चाहिये।
कर्म का आश्रव करने वाला है
इच्छा की वृद्धि करने वाला
आजुलता का कारण हैं
आकिंचन्य धर्म की क्या महिमा है ❓
सभी तपस्वी कहकर सम्मान करते हैं।
मनुष्य अमूल्य रत्नत्रय निधि को प्राप्त करके तीन लोक के नाथ बन जाते हैं
परिग्रह कम होता हैं ,
सभी
अकिंचन महासाधु किस प्रकार चिंतवन नही करते हैं ❓
आत्मा शरीर से भिन्न है,
तिलतुषमात्र भी परिग्रह मेरा नहीं है,
मेरी आत्मा ज्ञानमयी है, अतीन्द्रिय है, सर्वोत्कृष्ट है,
शास्त्र आदि वस्तु भी साथ न रखे तो ज्ञान -स्वाध्याय कैसे होगा।
जिस प्रकार कोई भारी वस्तु नदी में डूब जाती है और हल्की वस्तु पानी के ऊपर तैरती है
उसी तरह जीव सबकी नजरों में ऊपर उठ जाता हैं।
उसी प्रकार परिग्रह से इच्छा बढ़ती हैं ।
उसी प्रकार अधिक परिग्रह से सहित मनुष्य संसार समुद्र में डूब जाता है ।
उक्त सभी
प्रथमानुयोग के अधार पर आकिंचन्य धर्म के अभाव में क्या होता है?
रावण को पर-स्त्री के प्रति आसक्ति का भाव एवं उसके अपहरण से प्राप्त लोक निंदा एवं नरकायु का बंध
अहंकार वश प्रति-नारायण को नरकायु का बंध।
मान-कषाय वश चक्रवर्ति की पटरानी को नरकायु का बंध
परिगृह वश चक्रवर्ति को नरकायु का बंध
वर्तमान समय में एक गृहस्थ श्रावक आकिंचन्य धर्म का किस प्रकार पालन कर सकता है?
अभक्ष एवं अमर्यादित भोजन, पर-स्त्री, पर-धन में आसक्ति के भाव का अभाव
अनावश्यक भोग सामग्री के नियमपूर्वक संगृहीत नहीं है अर्थात त्याग
उपर्युक्त सभी
इनमें से कोई नहीं
आकिंचन्य धर्म गृहस्थों को क्या सिखाता है?
स्व संपत्ति के प्रति ममत्व का भाव नहीं होना
आचार-पापड़ या खाखरा जैसी अमर्यादित वस्तुओं का संग्रह नहीं करना
पर संपत्ति के प्रति भोग की अभिलाषा नहीं होना
दीक्षा धारण करना चाहिए
भाव परिगृह में क्या गर्भित नहीं है?
चार कषाय चौकड़ी का अभाव
नो कषायों का अभाव
संपत्ति आदि बाह्य परिगृह
उपर्युक्त सभी
आकिंचन्य धर्म कौन सी भावना से समानता रखता है ❓
अन्यत्व भावना
एकत्व भावना
मोक्ष भावना
वैराग्य भावना
इनमे से कौन आकिंचन्य भावना को सुदृढ़ करता है ❓
आत्मा हूँ आत्मा हूं आत्मा
मैं एक शुद्ध सदा अरुपि
मा जम्पये मा चिन्त्ये
अहमिकको खलु शुद्धो
अपरिग्रही और आकिंचन्य धर्म के भावों में क्या अंतर है ❓❓
शब्द और अर्थ भेद है।
शब्द भेद है भाव एक ही है।
कोई भेद नही है ।
अस्ति - नास्ति कथन भेद भाव एक ही हैं
धर्म के मुख्य लक्षण कितने होते है ❓
दस
कोई नही
सभी
असंख्यात
मुनिराज के पास किंचित मात्र परिग्रयः हो तो क्या दोष हैं ❓
सर्वज्ञ की वाणी का अवर्णवाद हो जायेगा।
किंचित परिग्रयः साथ हो तो श्रमण जाये निगोद में ।
थोड़ा सा रखने की छूट है।
दोनों सही
