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Worksheets60. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_13.28-14.07
Total questions: 39
Worksheet time: 1hrs 18mins
श्लोक संख्या 13.29 के अनुसार कौन साधक परम गति की ओर निरन्तर अग्रसर होता होता है ?
जो प्रत्येक वस्तु में परमात्मा को स्थित देखे
जो प्रत्येक जीव में परमात्मा को देखे
जो अपने मन को नीचे ना गिरने दे
उपरोक्त सभी
जो साधक सदैव और सर्वत्र परमात्मा के दर्शन करता है वह कैसे अपने मन को सदैव स्थिर रखता है और नीचे नहीं गिरने देता ?
क्योंकि ऐसा साधक सदैव परमात्मा का दर्शन करता है और इस कारण कभी स्वयं को इंद्रिय तृप्ति में नहीं लगाता |
क्योंकि कृष्ण (परमात्मा) के समक्ष माया कभी प्रकट नहीं होती है |
क्योंकि भक्ति में साधक को दिव्य आनंद का अनुभव होता है और संसार का आनंद उन्हें आकर्षित नहीं करता |
उपरोक्त सभी |
एक तरह से शरीर एक यंत्र है, जिसे परमेश्वर ने__________ की पूर्ति के लिए निर्मित किया है ?
समस्याओं के निदान
इच्छाओं
कर्तव्यों
इंद्रियों
जीव शारीरिक कार्यों से पृथक होकर दिव्य दृष्टि कब प्राप्त कर लेता है ?
जब साधक देखता है की आत्मा शरीर से भिन्न है और सारे कार्य शरीर द्वारा किए जाते हैं
जब साधक का मन स्थिर हो जाता है
जब साधक ध्यान के माध्यम से स्वयं को पहचान लेता है
उपरोक्त सभी
भौतिक संसार में भेदभाव किस कारण से व्याप्त है ?
असमानता
माया
देहात्मबुद्धि
आसक्ति
श्लोक संख्या 13.32 के अनुसार आत्मा दिव्य, शाश्वत और गुणो से अतीत है ।किंतु भगवान कृष्ण तो अनेक गुणो से युक्त हैं ।क्या यह विसंगति नहीं है ?
नहीं, क्योंकि सगुण भगवान गुणो से युक्त है किंतु आत्मा तो मूल रूप में निर्गुण है जो गुणातीत है
नहीं,क्योंकि सगुण भगवान भी प्रकृति के तीन गुणो से परे है किंतु अनेक दिव्य गुणो से युक्त है और इसी अनुसार आत्मा भी मूल में तीन गुणो से परे है
नहीं, क्योंकि आत्मा भौतिक जगत में गुणो से युक्त है किंतु मुक्त होने पर समस्त गुणो से परे है जिस प्रकार परम पुरुष भी है
उपरोक्त में से कोई नहीं
आत्मा के शरीर में होने पर ही शरीर चेतन है, किंतु फिर भी आत्मा शरीर से कैसे लिप्त नहीं होती ?
क्योंकि आत्मा अति सूक्ष्म है
क्योंकि आत्मा अमर है
क्योंकि आत्मा आनन्दमय है
उपरोक्त सभी
श्लोक संख्या 13.33 में भगवान कृष्ण आत्मा को किस वस्तु से तुलना करते हैं ?
आकाश
सूर्य
परमाणु
चेतना
परम चेतना और व्यष्टि चेतना में क्या अंतर है ?
परम चेतना आनंद मय है और व्यष्टि चेतना संकुचित है
परम चेतना समस्त शरीरों के प्रति सचेष्ट है किंतु व्यष्टि चेतना व्यक्तिगत शरीर तक सीमित है
परम चेतना और व्यष्टि चेतना में अंतर तभी तक है जब तक व्यष्टि चेतना परम चेतना में लीन ना हो जाए
परम चेतना सच्चिदानंद है किंतु व्यष्टि चेतना जड़ है
श्रील प्रभुपाद जी के तात्पर्य के अनुसार 13वे अध्याय अर्थ / भाव क्या है ?
ज्ञान मार्ग से भक्ति प्राप्त करना
प्रकृति, चेतना और पुरुष को जानना
शरीर, शरीर के स्वामी और परमात्मा के अंतर को जानना
उपरोक्त सभी
अगर साधुओं और शास्त्रों से ज्ञान व मार्गदर्शन प्राप्त कर लिया जाए तो क्या गुरु बनाने की आवश्यकता है ?
नहीं, क्योंकि ये सभी एक ही बात बोलते
हाँ, क्योंकि गुरु से व्यक्तिगत मार्गदर्शन और उनकी शरणागति व सेवा अवश्यम्भावी है
हाँ, क्योंकि गुरु के बिना कृष्ण कभी भी किसी को नहीं मिले
नहीं, क्योंकि मनुष्य को स्वयं अपना गुरु बनना चाहिए
13 वे अध्याय में भगवान कृष्ण ने कौन से श्लोक में प्रकृति के तीन गुणो का उल्लेख किया है ?
13.15
13.06
13.22
13.33
समस्त मुनि प्रकृति के तीन गुणो के विषय में जान कर कैसे परम सिद्धि प्राप्त करते हैं ?
क्योंकि तीन गुणो के विषय में जानने मात्र से व्यक्ति गुणो से परे हो जाता है और परम सिद्धि को प्राप्त कर लेता है
क्योंकि भगवान कृष्ण की अहैतुकी भक्ति करने पर व्यक्ति तीन गुणो को जानकर उनसे पार हो जाता है और परम सिद्धि को पाता है
क्योंकि तीन गुण ही व्यक्ति को इस संसार में बांधने का मूल कारण है
उपरोक्त सभी
भगवान कृष्ण 14.01 श्लोक में कहते हैं की इस अध्याय में बताया गया ज्ञान सर्वश्रेष्ठ है।क्या इसका अर्थ हुआ की यह ज्ञान भगवान कृष्ण द्वारा वर्णित भक्ति योग से भी बढ़कर है ?
जी हाँ, भगवान कृष्ण द्वारा यह स्पष्ट यह कहा गया है
जी नहीं, इसका अर्थ है की ज्ञान योग के भाग में यह ज्ञान पूर्व में कहे गए ज्ञान से श्रेष्ठ है
जी नहीं, इसका अर्थ है की यह ज्ञान भगवान कृष्ण द्वारा बताए गए सर्वश्रेष्ठ भक्ति के ज्ञान को समझने के बहुत अधिक सहायक है और यह ज्ञान एक प्रकार से भक्ति योग का ही भाग है
2 और 3
प्रकृति के तीन गुण में “गुण” शब्द का अर्थ क्या है ?
रस्सी
विशेषण
सगुण
दुर्गुण
श्लोक संख्या 14.02 के अनुसार जो साधक तीन गुणो का ज्ञान प्राप्त कर लेता है वह कृष्ण के समान प्रकृति वाला हो जाता है ।इसका अर्थ क्या है ?
यह की साधक कृष्ण के वैकुंठ धाम को प्राप्त कर लेता है जहां वो भगवान कृष्ण के साथ उनके समान निवास करता है
यह की साधक कृष्ण के समान निर्गुण हो जाता है और निराकार ब्रह्म में कृष्ण के साथ लीन हो जाता है
यह की साधक कृष्ण के समान परब्रह्म स्तर को प्राप्त कर लेता है
1 और 3
निम्नलिखित में से कौन से श्लोक में भगवान कृष्ण ने अपने आध्यात्मिक जगत का वर्णन किया है ?
8.21
15.06
उपरोक्त दोनो
उपरोक्त में से कोई नहीं
आध्यात्मिक जगत के सारे कार्यकलाप आध्यात्मिक होते हैं और यह आध्यात्मिक स्थिति ………… कहलाती है ?
कैवल्य
निराकार
ओमकार
भक्ति
मुंडक उपनिषद के अनुसार “महद ब्रह्म” का अर्थ क्या है ?
भौतिक प्रकृति
अध्यात्मिक प्रकृति
जीव
परमात्मा
निम्नलिखित में से कौन से श्लोक में भगवान कृष्ण अपने को सभी योनीयों का बीज प्रदाता पिता घोषित करते हैं ?
14.02
14.04
14.06
14.08
कौन से वैदिक ग्रंथ में समस्त योनियों की संख्या बतायी गयी है ?
श्रीमद् भागवतम
मत्स्य पुराण
नरसिंह पुराण
पद्मा पुराण
सतो गुण में व्यक्ति सुख और ज्ञान से कैसे बँध जाता है ?
क्योंकि सतोगुण के कारण उत्पन्न आसक्ति से बँध जाता है
क्योंकि सतोगुण में व्यक्ति ज्ञान में दूसरे लोगों से आगे होता है जिस कारण वह अपने को श्रेष्ठ समझने लगता है
क्योंकि सतोगुण मे व्यक्ति जड़ता को प्राप्त होकर बँध जाता है
उपरोक्त सभी
सतोगुण के प्रतिफ़ल क्या हैं ?
प्रकाश (सदबुद्धि)
पाप कर्मों से मुक्ति
आकांक्षा
1 और 2
रजो गुण की विशेषता क्या है ?
आलस
नींद
प्रमाद
स्त्री पुरुष का पारस्परिक आकर्षण
आज के कलियुग के लोगों में कौन से गुण का अधिकता है ?
सतो गुण
रजो गुण
तमो गुण
तीनो गुण बराबर हैं
कृप्या यहाँ पर अपना पता लिखे |
कृप्या यहाँ पर अपना नाम लिखे |
कृप्या यहाँ पर अपनी आयु लिखे |
कृप्या यहाँ पर अपना फोन नो. लिखे |
श्लोक 13.27 में, जीव का अस्तित्व कब से बताया गया है?
ब्रह्माण्ड की सृष्टि के बाद
ब्रह्मा को वेदो का ज्ञान देने के बाद
जीव शाश्वत विद्यमान है, ब्रह्माण्ड की सृष्टि के भी पूर्व अस्तित्व पाया गया है
जीव प्रकृति द्वारा 3 गुणो के संदूषण से उत्पन्न हुए हैं
क्या आपको लगता है कि पेड़, जो लकड़ी, पत्ते आदि के संयोजन से ज्यादा कुछ नहीं है, जीवों को उनके कर्मों के अनुसार दिया गया शरीर है?
नहीं, उन्मे जीवन के कोई लक्षण नहीं दिखाते हैं
नहीं, वे भौतिक प्रकृति द्वारा इस तरह से निर्मित होते हैं कि वे पर्यावरण और रासायनिक संयोजन द्वारा फल और अन्य आवश्यक चीजें प्रदान करते हैं
A और B दोनों सही हैं
वे जीव हैं जिन्हें उनके कर्मों के अनुसार शरीर प्रदान किया गया है। हमारे पास भागवतम जैसे शास्त्रों में ऐसे कई उदाहरण हैं
गीता के अनुसार अपरा प्रकृति से किसे संबोधित किया गया है?
भौतिक प्रकृति
जीव
भगवान
उपर्युक्त सभी
शरीर , आत्मा तथा परमात्मा को यथारूप देखने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाना महत्वपूर्ण है?
गुरु तथा वैष्णव की शरणगत होना और भक्ति की प्रक्रिया का पालन करना
ज्ञान प्राप्त करने के लिए इच्छुक होना
हमें अपने मन को हमेशा पवित्र कार्यों में संलग्न रहने के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए इस से दिव्या दृष्टि मिलेगी
हमें पदार्थ और आत्मा के बीच अंतर करके वस्तु को देखने के लिए अपने मन को प्रशिक्षित करना चाहिए। यह तकनीक भक्ति के बिना भी चीजों को यथारूप देखने में मदद करेगी
शरीर समाप्त होने के बाद आत्मा था परमात्मा का अस्तित्व और संबंध समाप्त हो जाता है?
जी हाँ , शरीर समाप्त होने पर जीव मुक्त हो जाता है
नहीं, परंतु मनुष्य शरीर में आने के बाद परमात्मा का कर्तव्य संपन्न हो जाता है। वे केवल अन्य योनियों में ही जीवा के साथ रहते हैं
जीव और परमात्मा का संबंध बना रहता है क्योंकि जीव कर्म अनुसार है भौतिक जगत में कोई न कोई शरीर पाता ही रहता है मुक्ति पाने तक
एक युग के समाप्त होने के बाद परमात्मा रूप में भगवान जीव का साथ त्याग देते हैं
क्या जीव का अध्यात्मिक अस्तित्व भी है?
भौतिक शरीर जीव का मूल अस्तित्व है
परम के साथ विलीन हो जाना ही जीव की अध्यात्मिक पहचान है
कोई जीव का अध्यात्मिक या भौतिक अस्तित्व नहीं है, अंत में सब कुछ शून्य है
हाँ, जीव की एक अध्यात्मिक पहचान है जिसे वह अपनी सुप्त कृष्ण चेतना को पुनर्जीवित करने के बाद प्राप्त करेगा
अगर हम इस जीवन या शरीर में समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो इसके पीछे मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण है कृष्ण का पक्षपातपूर्ण निर्णय
पूर्व निर्धारित सुख-दुख के साथ हमें अपनी पूर्व इच्छाओं और कर्मों के अनुसार शरीर में रखा गया है, हम खुद ही इसके लिए जिम्मेदार हैं
हम भौतिक प्रकृति की रक्षा करने में बुरी तरह विफल रहे हैं और इसलिए हमें भुगतना पड़ रहा है
मुख्य करण माया देवी का अंतिम निर्णय है जो है भौतिक जगत की नियमका है
क्या किसी को शारीरिक रचना के नज़र से देखना यथा किसी को देवता किसी को मनुषय, किसी को बिली आदि वास्तविक दृष्टि है?
हाँ, निश्चित रूप से हम चीजों को वैसे ही देख रहे हैं जैसे वे हैं
हाँ, यह वास्तव में आध्यात्मिक अनुभूति है क्योंकि हम जो अनुभव कर रहे हैं उसके आधार पर विश्लेषण कर रहे हैं
नहीं, यह भौतिक दृष्टि है वास्तविक दृष्टि नहीं है
नहीं बुद्धिमाता तो उन्हे निराकार भ्रम का स्वरूप मानने में है
जीवन की 84 लाख प्रजातियों में से, निम्न में से किसको इस भौतिक संसार में भौतिक नहीं अध्यात्मिक शरीर माना जाता है
केवल ब्रह्मा को ही अध्यात्मिक माना जाता है क्योंकि उन्होंने 4 वेदों का ज्ञान प्राप्त किया था
इंद्र और वरुण जैसे शक्तिशाली देवता आध्यात्मिक हैं और इसलिए कई लोग उनके ग्रहों तक पहुंचने के लिए तपस्या करते हैं
यह संपूर्ण ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति आध्यात्मिक है और इसलिए सभी जीवों को आध्यात्मिक माना जाना चाहिए
उपरोक्त में से कोई भी सत्य नहीं है
जीव स्वभाव से _____ है ?
आनन्दमय
शक्तिशाली
बुद्धिमान
करुणाशील
