Worksheetsपंडित बनारसीदास जी की गोष्ठी पर क्विज
Total questions: 30
Worksheet time: 15mins
कवि बनारसीदास का जन्म कहाँ , कब और कौनसी सम्प्रदाय में हुआ था ?
विक्रम संवत 1693 , जौनपुर , श्वेताम्बर
विक्रम संवत 1643 , जौनपुर , श्वेताम्बर
विक्रम संवत 1524 , जौनपुर , श्वेताम्बर
कवि पंडित बनारसी दास जी की पद्यमय रचनाएं कौनसी है।
नाममाला
अर्द्ध कथानक
बनारसी विलास
उपरोक्त सभी
कवि पंडित बनारसी दास जी के जीवन में किसकी त्रिवेणी दिखाई देती है ।
सत्यम शिवम सुंदरम
असत्यम शिवम सुंदरम
सत्यम अशिवम सुंदरम
इनमे से कोई नहीं
कवि पंडित बनारसी दास जी ने अपनी आत्मकथा को कौनसी भाषा में काव्य रूप में लिखा था।
ब्रजभाषा
हिन्दी भाषा
अंग्रेजी भाषा
संस्कृत भाषा
कवि पंडित बनारसी दास जी द्वारा रचित नाटक समयसार की हस्तलिखित प्रति कहा के मंदिर में है।
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर आगरा
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर कोटा
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर अलीगढ़
इनमे से कोई नहीं
आज के युग में किसका बोलबाला है।
राजनीति , नेतागिरी , अर्थतंत्र
दंगा , जंग
अंधविश्वास
विश्वास
कवि पंडित बनारसी दास जी ने कितने अनुयोगो के ग्रंथों का भाषानुवाद किया।
चारों अनुयोगो के ग्रंथों का
तीन अनुयोगो के ग्रंथों का
दो अनुयोगो के ग्रंथों का
इनमे से कोई नहीं
आज के समय में धर्म के मामले में लोगों की सोच कैसी है।
संकीर्ण और रूढ़िवादी
प्राचीन और रूढ़िवादी
संकीर्ण और अरूढ़िवादी
कवि पंडित बनारसी दास जी कौनसी कला में निपुण थे।
काव्य कला
हास्य कला
चित्र कला
नृत्य कला
हिन्दी साहित्य की सर्वप्रथम आत्मकथा कहलाने का गौरव किसे प्राप्त हुआ।
अर्द्ध कथानक को
धर्म कथानक को
सर्व कथानक को
कवि पंडित बनारसी दास जी की सर्वश्रेष्ठ आध्यात्मिक और लोकप्रिय रचना कौनसी है और उसमें कुल कितने छंद है।
नाटक समयसार ,727
नाटक समयसार ,327
नाटक समयसार ,750
नाटक समयसार ,450
जिन दो युगो की बात आई थी उन दो युगों के नाम क्या थे ।
तीर्थंकरों का युग ,संस्थावाद का युग
तीर्थंकरों का युग , असंस्थावाद का युग
भावों का नाटकीय ढंग से चित्रण कवि पंडित बनारसी दास जी की कौनसी रचना में किया गया था।
समयसार नाटक
गोमटसार नाटक
सेतालिस शक्तियां
इनमे से कोई नहीं
कवि पंडित बनारसी दास जी की कौनसी रचना में धार्मिक , आध्यात्मिक ,उपदेशपरक कविताएं संग्रहित हैं।
बनारसी विलास
नाटक समय सार
अर्द्ध कथानक
इनमे से कोई नहीं
कवि पंडित बनारसी दास जी की नाममाला रचना में कितने दोहे है।
175
195
155
125
कवि पंडित बनारसी दास जी ने नाटक समयसार की रचना किन ग्रंथों को आधार बनाकर की थी।
समयप्राभृत
आत्मख्याति संस्कृत टीका
भाषा टीका
उपरोक्त सभी
पंडित बनारसी दास जी का संपूर्ण जीवन कैसे भावों से भरा हुआ था।
सहजता
सरलता
विनम्रता
उपरोकत सभी
पंडित बनारसी दास जी को किसका संयोग मिलने पर समयसार कलश टीका पढ़ने को मिली।
अरथमल जी ढोर
राजमल जी ढोर
नाथमल जी ढोर
इनमे से कोई नहीं
कवि पंडित बनारसी दास जी के पिता का नाम क्या था।
खडगसेन
रायमल
राजमल
इनमे से कोई नही
कवि पंडित बनारसी दास जी का जन्म नाम क्या था।
विक्रमाजीत
विक्रमादित्य
विक्रम
विक्रमदास
कवि पंडित बनारसी दास जी के कितने विवाह और कितनी संतानें हुई।
3 विवाह ,9 संतानें
9 विवाह ,3 संतानें
5 विवाह ,5 संतानें
इनमे से कोई नही
कवि पंडित बनारसी दास जी को पर्याय का विवेक कौनसे पंडित जी से और कौनसे ग्रंथ का प्रवचन सुनने से जागृत हुआ
पंडित रूपचन्द्र जी ,गोम्मटसार ग्रंथ
पंडित रूपचन्द्र जी ,समयसार ग्रंथ
पंडित भागचन्द्र जी ,समयसार ग्रंथ
पंडित रायमल जी ,गोम्मटसार ग्रंथ
पाप के उदय में स्वयं को धर्म से जोड़ कर कौनसे भाव बनाए रखना चाहिए।
समता भाव
क्रोधी भाव
लोभी भाव
इनमे से कोई नहीं
" अनुभव चिंतामणि रत्न , अनुभव है रस कूप । अनुभव मारग मोक्ष को , अनुभव मोक्षस्वरूप ।।
" पंक्तियां कौनसे कवि द्वारा लिखित है।
कवि पंडित बनारसी दास जी
कवि पंडित भूधर दास जी
कवि पंडित रायमल जी
इनमे से कोई नही
कवि पंडित बनारसी दास जी ने अपने जीवन के अंतिम समय में कौनसा छंद लिखा था।
ज्ञान कुतक्का हाथ मारि अरि मोहना ।
प्रगटयो रूप स्वरूप अनंत जु सोहना ।।
जा परजै को अंत सत्य कर मानना।
चलै बनारसि दास फेर नहिं आवना ।।
जो मोह माया मान मत्सर, मदन मर्दन वीर हैं। जो विपुल विघ्नों बीच में भी, ध्यान धारणा धीर हैं॥
भव वन में जी भर घूम चुका, कण, कण को जी भर देखा।
मृग सम मृग तृष्णा के पीछे, मुझको न मिली सुख की रेखा।
इनमे से कोई नहीं
कवि पंडित बनारसी दास जी को कौन सा रोग नहीं था ।
चेचक
कुष्ठ
संग्रहणी
कैंसर
कवि पंडित बनारसी दास जी की सर्वप्रथम रचना कौनसी है।
नाममाला
बनारसी विलास
अर्द्ध कथानक
इनमे से कोई नहीं
कवि पंडित बनारसी दास जी का किसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान था।
हिन्दी साहित्य
संस्कृत साहित्य
अंग्रेजी साहित्य
प्राकृत साहित्य
कवि पंडित बनारसी दास जी ने अपने जीवन के सत्य को कौनसी आत्मकथा में उद्धाटित किया।
अर्द्ध कथानक
नाम माला
बनारसी विलास
नाटक समयसर
" दिग्भ्रमित रहे थे जो प्रारंभ में, नहीं था वस्तुतत्व- विचार जिन्हें,
व्यापार में मिली केवल विफलता, लुटेरों ने लूटा रास्तों में कई बार उन्हें |
मिला फिर इन्हें समागम गुणीजन का हुआ जीवन में तब ज्ञान सूर्य का उदय,
जोड़ लिया स्वयं को स्वाध्याय से, तिरोहित हुआ फिर इनका पापोदय।"
प्रस्तुत पंक्तियों में कौनसे कवि के जीवन के बारे में बताया था।
कवि पंडित बनारसी दास जी के
पंडित राजमल जी के
पंडित जयचंद जी के
इनमे से कोई नहीं
