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CHARAK VIMAN STHAN PRACTICE QUESTION

Total questions: 99

Worksheet time: 50mins

Name
Class
Date
1.
1- चिकित्सा शास्त्र के धातुवैषम्य को किस दषविध परीक्ष्य भाव से सुमेलित करते हैं -
a)
a. कार्य
b)
b. कार्ययोनि
c)
c. कार्यफल
d)
d. अनुबन्ध
2.
2- ‘पूर्वश्रुते च संदेहवतः पुनः श्रवणाच्छुतसंशयमपकर्षति’ किसका लक्षण है -
a)
a. अध्ययन
b)
b. अध्यापन
c)
c. संभाषा
d)
d. संस्कार
3.
3- ‘षडधातवो गर्भस्य’ व ‘व्याधेरहितं हितमारोग्यस्येति’ किस वादमार्ग का उदाहरण है -
a)
a. सम्भव
b)
b. स्थापना
c)
c. प्रतिज्ञा
d)
d. निग्रहस्थान
4.
4- ‘स्वाभाविकानां द्रव्याणामभिसंस्कारः’ कहलाता है -
a)
a. प्रकृति
b)
b. करण
c)
c. संयोग
d)
d. काल
5.
5- सभी आहार द्रव्यों का एक पिण्ड में प्रमाण ग्रहण करना कहा जाता है
a)
a. सर्वग्रह
b)
b. परिग्रह
c)
c. अनुग्रह
d)
d. साम्यग्रह
6.
6- ‘कार्याभिनिवृत्तौ प्रयतमानस्य’ दशविधपरीक्ष्य विषय है
a)
a. कारण
b)
b. करण
c)
c. कार्यफल
d)
d. प्रवृत्ति
7.
7- दण्डालसक में दोषों की गति होती है -
a)
a. उर्ध्व
b)
b. अधः
c)
c. तिर्यग
d)
d. कोई नहीं
8.
8- क्षार का प्रयोग किस देश के लोग के लिये सात्म्य है
a)
a. प्राच्य देश
b)
b. चीन देश
c)
c. बाह्लीक देश
d)
d. A+B
9.
9- ‘खालित्यपालित्यानि वलयश्चकाले भवन्ति’ किस द्रव्य के अधिक सेवन का परिणाम है
a)
a. क्षार
b)
b. लवण
c)
c. पिप्पली
d)
d. A+B
10.
10- ‘स्वयमिन्द्रियैर्मनसा चोपलभ्यते’ किसके लिए कहा गया है
a)
a. अनुमान
b)
b. युक्ति
c)
c. आप्तोदेश
d)
d. प्रत्यक्ष
11.
11- ‘ज्ञानाभियोगसंहर्षकरी भवति’ किसका गुण है -
a)
a. अध्ययन
b)
b. संभाषा
c)
c. वादमार्ग
d)
d. अध्यापन
12.
12- ‘यत प्रयोजना कार्याभि निर्वत्तिरिष्यते’ क्या है -
a)
a. कार्य
b)
b. कार्यफल
c)
c. करण
d)
d. कार्ययोनि
13.
13- ‘....खलु रोगविशेषविज्ञानं भवतिः’ च0वि0 4 के अनुसार रिक्त स्थान में होगा
a)
a. चतुर्विधं
b)
b. द्विविधं
c)
c. पञ्चविधं
d)
d. त्रिविधं
14.
14- सम्भाषा के भेद हैं -
a)
a. 2
b)
b. 3
c)
c. 4
d)
d. 5
15.
16- ‘अवितर्कस्मृतिविभागविदो निष्प्रीत्युपतापदर्शिनश्च’ किसका गुण है -
a)
a. जल्पक
b)
b. शिष्य
c)
c. आचार्य
d)
d. आप्त
16.
17- ‘प्रतिकर्मसमारम्भ’ किस दशाविध परीक्ष्य विषय के लिए कहा गया हैं
a)
a. उपाय
b)
b. करण
c)
c. प्रवृत्ति
d)
d. अनुबंध
17.
18- आमविष की असाध्यता का कारण नहीं है -
a)
a. आशुकारित्वात्
b)
b. विरुद्धोपक्रमत्वात्
c)
c. महात्यायत्वात्
d)
d. कोई नहीं
18.
19- पर (विपक्षी) के भेद हैं
a)
a. 2
b)
b. 3
c)
c. 5
d)
d. 4
19.
20- जनपदोध्वंस का मूल है -
a)
a. अधर्म
b)
b. दोष
c)
c. वायु
d)
d. प्रज्ञापराध
20.
21- मधु का गुण है -
a)
a. रुक्ष, तीक्ष्ण व कषाय
b)
b. मधुर, शीतल व मन्द
c)
c. स्निग्धता, शीत व गुरु
d)
d. विशद, रुक्ष व कषाय
21.
22- ‘मनोबुद्धीन्द्रियशरीरतुष्टिः’ किसका लक्षण है -
a)
a. कार्यफल
b)
b. अनुबंध
c)
c. कारण
d)
d. कार्ययोनि
22.
23- अंतिम वादमार्ग का नाम है -
a)
a. वाद
b)
b. प्रतिज्ञाहानि
c)
c. निग्रहस्थान
d)
d. वाक्य प्रशंसा
23.
24- रसविमान के अनुसार किस द्रव्य का अधिक सेवन वर्जित है -
a)
a. मधु पिप्पली क्षार
b)
b. मधु लवण पिप्पली
c)
c. पिप्पली क्षार लवण
d)
d. लवण क्षार व मरिच
24.
25- त्रिविध ज्ञान संग्रह है -
a)
a. प्रत्यक्ष अनुमान व युक्ति
b)
b. असात्म्यसंयोग प्रज्ञापराध व परिणाम
c)
c. आप्तोपदेश प्रत्यक्ष व अनुमान
d)
d. अध्ययन अध्यापन व संभाषापरिषद्
25.
26- ‘महोत्साहाः क्रियावन्त क्लेशसहाः’ किस सार का लक्षण है -
a)
a. मज्जासार
b)
b. मेदसार
c)
c. अस्थिसार
d)
d. मांससार
26.
27- पय के साथ लवण का प्रयोग किस देश के लोग नहीं करते है -
a)
a. बाह्लीक
b)
b. सौराष्ट्र
c)
c. काम्पिल्य
d)
d. सौवीरक
27.
28- कारण भेद से परिषद् के कुल कितने भेद है -
a)
a. 2
b)
b. 4
c)
c. 6
d)
d. 8
28.
29- ‘पर्वस्थूला’ किस सार के व्यक्ति का लक्षण है -
a)
a. अस्थिसार
b)
b. मांससार
c)
c. मेदसार
d)
d. मज्जासार
29.
30- अधर्ममूलक लोभ की उत्पत्ति का सही क्रम है -
a)
a. अत्यादान - गौरव - श्रम - आलस्य - संचय - परिग्रह - लोभ
b)
b. अत्यादान - गौरव - आलस्य - श्रम - संचय - परिग्रह - लोभ
c)
c. अत्यादान - गौरव - आलस्य - श्रम - परिग्रह - संचय - लोभ
d)
d. अत्यादान - श्रम - गौरव - आलस्य - परिग्रह - संचय - लोभ
30.
31- ‘आर्जवम्’ किस-किस सारता का लक्षण है -
a)
a. अस्थि व मांस
b)
b. मांस व मेद
c)
c. रक्त व मांस
d)
d. मांस व मज्जा
31.
32- अलसक की चिकित्सा में उल्लेखन (वमन) के लिये प्रयुक्त द्रव्य हैं -
a)
a. मदनफल क्वाथ व सैधव लवण
b)
b. आरग्वधफल मज्जा व उष्ण जल
c)
c. सैंधव लवण व उष्ण जल
d)
d. यवागु, सैंधव लवण व उष्ण जल
32.
33- विसूचिका का चिकित्सा क्रम है -
a)
a. वमन विरेचन व पथ्य पेयादि
b)
b. लंघन वमन व पथ्य पेयादि
c)
c. विरेचन लंघन व पथ्य पेयादि
d)
d. लंघन विरेचन व पथ्य पेयादि
33.
34- विकृति-विषय समवेत होने में कारण होते हैं -
a)
a. 2
b)
b. 5
c)
c. 4
d)
d. 3
34.
35- जल्प व वितण्डा किसका भेद है -
a)
a. संभाषा
b)
b. वाद
c)
c. परिषद
d)
d. कोई नहीं
35.
36- पञ्चाल देश की राजधानी है
a)
a. बाह्लीक
b)
b. कुश
c)
c. सौराष्ट्र
d)
d. काम्पिल्य
36.
37- ‘द्विविधा परीक्षा ज्ञानवतां.......’ हैं -
a)
a. आप्तोपदेश व प्रत्यक्ष
b)
b. प्रत्यक्ष व अनुमान
c)
c. आप्तोपदेश व अनुमान
d)
d. प्रत्यक्ष व युक्ति
37.
38- ‘नाभिस्तनान्तरं जन्तोरामाशय इति स्मृतः’ किस आचार्य का कथन है -
a)
a. चरक
b)
b. शारंगधर
c)
c. सुश्रुत
d)
d. वाग्भट्ट
38.
39- ‘‘उपस्थित श्रेयस्त्वं.........’’ रिक्त स्थान की पूर्ति करें -
a)
a. स्मरेण
b)
b. अविषादेन
c)
c. कल्याणमिनिवेशेन
d)
d. उत्थानेन
39.
40- ‘जनपदोद्ध्वंसनीयं’ अध्याय विमान स्थान का कौन सा अध्याय है -
a)
a. 3rd
b)
b. 4th
c)
c. 5th
d)
d. 2nd
40.
41- जनपदोध्वंस के भाव हैं
a)
a. 4
b)
b. 3
c)
c. 8
d)
d. 6
41.
42- तैल, सर्पि व मधु क्रमशः वात, पित्त व कफ का शमन किससे सम्पादित करते है -
a)
a. रसप्रभाव
b)
b. दोषप्रभाव
c)
c. द्रव्यप्रभाव
d)
d. विकारप्रभाव
42.
43- वादमार्ग के पद (संख्या) है
a)
a. 64
b)
b. 44
c)
c. 12
d)
d. 24
43.
44- आमाशय को ‘मांसाशय’ नाम किसने दिया है
a)
a. डल्हण
b)
b. चक्रपाणि
c)
c. शारंगधर
d)
d. भावमिश्र
44.
45- पित्तज प्रकृति के व्यक्ति की चिकित्सा में सम्मिलित है -
a)
a. सर्पिपान
b)
b. अधश्च दोषहरणं
c)
c. मधुर कषाय तिक्त आहार
d)
d. सभी
45.
46- ‘प्राणैःसहसंयोगः’ किसका लक्षण है -
a)
]a. देश
b)
b. कार्यफल
c)
c. अनुबन्ध
d)
d. कार्य
46.
47 कपोतवल्ली, सोमवल्ली, गोपवल्ली व मधुवल्ली किस आस्थापन स्कन्ध के द्रव्य हैं
a)
a. मधुर
b)
b. कटु
c)
c. अम्ल
d)
d. कषाय
47.
48- निम्न में सही विकल्प नहीं है -
a)
a. सहज कृमि को विंशति विधि में सम्मलित नहीं किया गया है
b)
b. ‘जृम्भा व आनाह’ कफज कृमि का प्रभाव है
c)
c. यूका व पिपीलिका को आचार्य चरक ने वाह्य कृमि में रखा है
d)
d. ‘लोमहर्षभिनिवर्तन’ रक्तज कृमि का प्रभाव है
48.
49- निम्न में सही विकल्प है -
a)
a. त्रिविध परीक्षा - आचार्य वाग्भट्ट
b)
b. अष्टविध परीक्षा - योगरत्नाकर
c)
c. दशविध परीक्षा - आचार्य चरक
d)
d. सभी
49.
50- शस्त्र, क्षार व अग्नि किस स्रोत दुष्टि का हेतु है
a)
a. मांसवह
b)
b. मेदवह
c)
c. शुक्रवह
d)
d. प्राणवह
50.
51- ‘इदंवाच्यम् इदमवाच्यं’ किसका लक्षण है
a)
a. संभाषा
b)
b. परिषद
c)
c. वादमार्ग
d)
d. वितण्डा
51.
52- निम्न में कौन रोग परीक्षा है -
a)
a. त्रिविध
b)
b. षड्विध
c)
c. अष्टविध
d)
d. दशविध
52.
53- ‘अजीर्णाध्यशन’ किस स्रोतो दुष्टि का हेतु है
a)
a. रसवह
b)
b. प्राणवह
c)
c. वर्चोवह
d)
d. अन्नवह
53.
54- ‘क्लेशसहिष्णुत्वमुष्णासहिष्णुत्वं’ किस सार का लक्षण है
a)
a. रक्त सार
b)
b. मज्जा सार
c)
c. अस्थि सार
d)
d. मेद सार
54.
55- ‘क्षीणस्याभिक्षतस्य च’ किस स्रोत दुष्टि का निदान है
a)
a. मूत्रवह
b)
b. स्वेदवह
c)
c. प्राणवह
d)
d. मांसवह
55.
56- शिरोविरेचन द्रव्य में अनुपस्थित रस है
a)
a. कटु व मधुर
b)
b. मधुर व तिक्त
c)
c. मधुर व अम्ल
d)
d. मधुर व लवण
56.
57- स्रोतोदुष्टि के लक्षण हैं
a)
a. 4
b)
b. 3
c)
c. 6
d)
d. 5
57.
58- विडंग किस स्कन्ध में रखा गया है
a)
a. तिक्त
b)
b. कटु
c)
c. कषाय
d)
d. अम्ल
58.
59- प्राणवह स्रोतो दुष्टि की चिकित्सा किसके समान करते हैं
a)
a. ज्वर
b)
b. श्वास
c)
c. कास
d)
d. हिक्का
59.
60- ‘सुश्लिष्टसारसन्धिबन्धनाः’ कफज प्रकृति का यह लक्षण कफ के किस गुण के कारण है
a)
a. स्तैमित्य
b)
b. शीत
c)
c. विज्जल
d)
d. मधुर
60.
61- मूत्रवह स्रोतो दुष्टि की चिकित्सा किसके समान करते हैं
a)
a. मूत्राघात
b)
b. मूत्रशुक्र
c)
c. मूत्रकृच्छ
d)
d. सभी
61.
62- ‘मृद्वङ्गाबलवन्तः’ व ‘दीर्घायुषोबलवन्त’ ये किस सार का लक्षण है -
a)
a. मज्जा सार
b)
b. मेद सार
c)
c. अस्थि सार
d)
d. मांस सार
62.
63- ‘गुरुशीतमतिस्निग्धमतिमात्रं समश्नताम्’ किस स्रोत दुष्टि का हेतु है -
a)
a. उदकवह
b)
b. रसवह
c)
c. मेदवह
d)
d. मांसवह
63.
64- स्रोतोदुष्टि व अनुसार चिकित्सा का सही विकल्प नहीं है
a)
a. विट्वह स्रोत - प्रवाहिका
b)
b. स्वेदवह स्रोत - ज्वर
c)
c. उदकवह स्रोत - तृष्णा
d)
d. सभी गलत है
64.
65- ‘हेत्वादि सप्तकोगणः’ किससे सम्बन्धित है
a)
a. कृमि
b)
b. जनपदोध्वंस
c)
c. वादमार्ग
d)
d. कुष्ठ
65.
66- प्रतिज्ञा में हेतु पूछने वाला वाक्य कहलाता है
a)
a. अनुयोग
b)
b. अभ्यनुज्ञा
c)
c. वाक्यदोष
d)
d. अनुयोज्य
66.
67- ‘भुक्त्वा च स्वपतां दिवा’ किस स्रोत दुष्टि का निदान हैं
a)
a. मांसवह
b)
b. रक्तवह
c)
c. मेदवह
d)
d. प्राणवह
67.
68- ‘श्रुतग्राहिणोऽल्पस्मृतयश्च’ किस प्रकृति का लक्षण है -
a)
a. वातज
b)
b. पित्तज
c)
c. कफज
d)
d. द्वंदज
68.
69- ‘आमदोष’ से किस स्रोतस् की दुष्टि होती है
a)
a. अन्नवह
b)
b. उदकवह
c)
c. स्वेदवह
d)
d. विड्वह
69.
70- ‘....नाम पराजयप्राप्तिः’ रिक्त स्थान में होगा -
a)
a. अभ्यनुज्ञा
b)
b. निग्रहस्थान
c)
c. प्रतिस्थापना
d)
d. कोई नहीं
70.
71- कृमि चिकित्सा में ‘प्रकृतिविघात’ को किसके समान माना जा सकता है
a)
a. संशोधन
b)
b. वृंहण
c)
c. कर्शण
d)
d. संशमन
71.
72- अन्नवह स्रोतस का मूल है
a)
a. आमाशय व महास्रोत
b)
b. पक्वाशय व स्थूलगुद
c)
c. आमाशय व दक्षिण पाश्र्व
d)
d. आमाशय व वाम पाश्र्व
72.
73- ‘‘क्षयात् संधारणात्रौक्ष्यात्..........’’ किस स्रोतो दुष्टि का हेतु है
a)
a. उदकवह
b)
b. रक्तवह
c)
c. प्राणवह
d)
d. रसवह
73.
74- प्राणवह स्रोतस का मूल है
a)
a. हृदय व रक्तवह धमनी
b)
b. हृदय व महास्रोत
c)
c. महास्रोत व फुफ्फुस
d)
d. हृदय व महामूला
74.
75- ‘‘व्यायामादतिसंतापाच्छीतोष्णाक्रमसेवनात्’’ किस स्रोत दुष्टि का हेतु है
a)
a. रसवह स्रोत
b)
b. उदकवह स्रोत
c)
c. स्वेदवह स्रोत
d)
d. रक्तवह स्रोत
75.
76- जृम्भा, क्षवथु व आनाह किस कृमि का प्रभाव है -
a)
a. रक्तज
b)
b. पुरीषज
c)
c. श्लेष्मज
d)
d. मलज
76.
77- स्वेदवह स्रोतस का मूल है
a)
a. स्नायु व त्वचा
b)
b. मेद व लोमकूप
c)
c. वृक्क व वपावहन
d)
d. मेद व जघन
77.
78- ‘‘..............पुनः स्वभाविकानां द्रव्याणाममिसंस्कारः’’ रिक्त स्थान की पूर्ति करें -
a)
a. प्रकृति
b)
b. संयोग
c)
c. कारण
d)
d. करण
78.
79- आचार्य सुश्रुत ने कौन सा स्रोतस नहीं माना है जब कि चरक ने माना है
a)
a. अस्थि, मज्जा व आर्तववह
b)
b. मेद, मांस व स्वेदवह
c)
c. मेद, मांस व आर्तववह
d)
d. अस्थि, मज्जा व स्वेदवह
79.
80- आचार्य चरक के अनुसार विमान स्थान में घृत का गुण होगा
a)
a. स्नेह, शीत व गुरू
b)
b. मधुर, शीत व सर
c)
c. मधुर, मंद व शीत
d)
d. स्नेह, मंद व गुरू
80.
81- ‘‘सर्वस्य हि ग्रहः................’’ किसके लिये कहा गया है
a)
a. परिहार
b)
b. सर्वग्रह
c)
c. परिग्रह
d)
d. अनुग्रह
81.
82- ‘स्निग्ध वर्णस्वराः’ किस सार का लक्षण है -
a)
a. त्वक्
b)
b. मेद
c)
c. मांस
d)
d. मज्जा
82.
83- आचार्य चरकानुसार निम्न में से ‘करण’ के अंतर्गत है -
a)
a. तोयाग्निसंनिकर्ष
b)
b. कालप्रकर्ष
c)
c. भाजन
d)
d. सभी
83.
84- ‘ओकसात्म’ किसके अधीन होता है -
a)
a. काल
b)
b. देश
c)
c. उपयोक्ता
d)
d. उपयोग संस्था
84.
85- ‘‘तत्र..........नाम तद् यत् करोति, स एव हेतुः, स कर्ता’’ रिक्त स्थान की पूर्ति करें -
a)
a. कार्यं
b)
b. करणं
c)
c. कारणं
d)
d. कार्ययोनि
85.
86- अमात्रा आहार के भेद होते हैं -
a)
a. 1
b)
b. 2
c)
c. 3
d)
d. 4
86.
87- ‘लंघनमेवाग्रे विरिक्तवत्त चानुपूर्वी’ किसकी चिकित्सा है
a)
a. ग्रहणी
b)
b. अलसक
c)
c. विसूचिका
d)
d. अजीर्ण
87.
88- ‘जनपदोद्ध्वंस’ सम्बन्धित ज्ञान का उपदेश आचार्य ने कहाँ दिया था
a)
a. सांकृत्यायन प्रदेश
b)
b. पञ्चाल प्रदेश
c)
c. विदेह प्रदेश
d)
d. हिमवत पाश्र्व
88.
89- स्रोतों की दुष्टि का सामान्य हेतु में प्रयुक्त आहार विहार का सही विकल्प है
a)
a. दोषों व धातुओं के गुण के समान
b)
b. दोषों व धातुओं के गुण के विपरीत
c)
c. दोषों के गुण के समान व धातुओं के गुण के विपरीत
d)
d. दोषों के गुण के विपरीत व धातुओं के गुण के समान
89.
90- ‘घृति’ का अनुमान किससे करते है
a)
a. आमोदेन
b)
b. अविज्ञान
c)
c. स्मरण
d)
d. अलौल्येन
90.
91- शास्त्र ज्ञान के साधन कितने है
a)
a. 2
b)
b. 3
c)
c. 5
d)
d. 8
91.
92- अलसक की चिकित्सा का क्रम है
a)
a. स्वेदन-वमन-वर्ति-उपवास
b)
b. उपवास-स्वेदन-वमन-वर्ति
c)
c. वमन-स्वेदन-वर्ति-उपवास
d)
d. वर्ति-स्वेदन-वमन-उपवास
92.
93- ‘‘विषमं च पच्यते’’ किस प्रकार के आहार से होने वाली हानि है
a)
a. विरुद्ध
b)
b. अतिद्रुत
c)
c. अतिविलम्बित
d)
d. अजीर्ण में भोजन
93.
94- कफ के किस गुण के कारण कफ प्रकृति के पुरुष में ‘अशीघ्रारम्भक्षोभविकाराः’ लक्षण मिलता है
a)
a. शैत्याद
b)
b. स्तैमित्याद
c)
c. विज्जलत्वात्
d)
d. मृदुत्वाद
94.
95- ‘द्रव्यंप्रधानमिति, गुणाःप्रधानमिति वीर्यप्रधानमिति’ ये किस प्रकार का सिद्धान्त है
a)
a. अधिकरण
b)
b. सर्वतंत्र
c)
c. प्रतितंत्र
d)
d. अभ्युपगमन
95.
96- ‘अतिशुष्कान्नसेवनात्’ किस स्रोतो दुष्टि का हेतु है
a)
a. अन्नवह
b)
b. उदकवह
c)
c. प्राणवह
d)
d. रसवह
96.
97- जल्पक के गुण व दोष क्रमशः कितने होते है -
a)
a. 5 व 4
b)
b. 4 व 5
c)
c. 5 व 7
d)
d. 5 व 5
97.
98- ‘स्रोतांसि खलुपरिणाममापद्यमानानां....................अभिवाहिनी’ में रिक्त स्थान की पूर्ति करें
a)
a. दोष
b)
b. धातु
c)
c. रस
d)
d. भाव
98.
99- ग्रहणी की मृदुता या कठिनता की परीक्षा की जाती है -
a)
a. आप्तोपदेश
b)
b. अनुमान
c)
c. युक्ति
d)
d. प्रश्न
99.
100- ‘‘श्रीमद्भ्राजिष्णु’’ लक्षण है
a)
a. त्वक्सार
b)
b. रक्तसार
c)
c. शुक्रसार
d)
d. मज्जासार