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रसखान के सवैए

रसखान के सवैए

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9th Grade

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SURYA PGT

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1 Slide • 5 Questions

1

रसखान के सवैए

मानुष हौं तो वही रसखानि, बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन।

जौ पसु हौं तो कहा बस मेरो, चरौं नित नंद की धेनु मँझारन॥

पाहन हौं तो वही गिरि को, जो कियो हरिछत्र पुरंदर धारन।

जौ खग हौं तो बसेरो करौं मिलि कालिंदी कूल कदंब की डारन॥

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2

Multiple Choice

कवि रसखान मनुष्य रूप में कहाँ जन्म लेना चाहते हैं?

1

मथुरा के राजा के रूप में

2

गोकुल के ग्वाले के रूप में

3

गोपियों के रूप में

4

नन्द बाबा के रूप में

3

Multiple Choice

अगले जन्म में कवि पशु रूप में क्या बनना चाहता है?

1

शेर

2

बकरी

3

गाय

4

बैल

4

Multiple Choice

कवि किस पर्वत का अंग बनना चाहता है?

1

अरावली

2

हिमालय

3

विंध्याचल

4

गोबर्धन

5

Multiple Choice

कवि पक्षी बनकर कहाँ रहना चाहता है?

1

वन में करील के वृक्ष पर

2

यमुना के किनारे कदंब के पेड़ पर

3

नन्द बाबा के घर में पिजड़े में

4

आम के बगीचे में

6

Multiple Choice

इस पद में कवि ने क्या व्यक्त किया है?

1

कृष्ण और कृष्णभूमि से अनन्य प्रेम

2

कवि ने अपना सपना बताया है

3

गोपियों के प्रति सहानुभूति

4

कृष्ण और गोपियों का अनन्य प्रेम

रसखान के सवैए

मानुष हौं तो वही रसखानि, बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन।

जौ पसु हौं तो कहा बस मेरो, चरौं नित नंद की धेनु मँझारन॥

पाहन हौं तो वही गिरि को, जो कियो हरिछत्र पुरंदर धारन।

जौ खग हौं तो बसेरो करौं मिलि कालिंदी कूल कदंब की डारन॥

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