

अलंकार (कक्षा -10 )
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10th Grade
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manoj kumar
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1
अलंकार
अलंकार शब्द का अर्थ है - आभूषण या गहना। जिस प्रकार आभूषण धारण करने से
स्त्री के सौंदर्य में वृद्धि हो जाती है उसी प्रकार काव्य में अलंकारों के प्रयोग से
उसकी सुंदरता में चमत्कार उत्पन्न हो जाता है ।
परिभाषा:
जिन गुण धर्मों द्वारा काव्य की शोभा बढ़ाई जाती है, उन्हें अलंकार कहते हैं।
अथवा
काव्य के सौंदर्यवर्धक गुण अलंकार कहलाते हैं। अलंकारों के योग से काव्य मनोहारी बन जाता है।
अलंकार के भेद –
काव्य में कभी अलग-अलग शब्दों के प्रयोग से सौंदर्य में वृद्धि की जाती है तो कभी अर्थ में चमत्कार पैदा करके । इस आधार पर अलंकार के दो भेद होते हैं –
(i) शब्दालंकार
(ii) अर्थालंकार
2
(i) शब्दालंकार –
जब काव्य में शब्दों के माध्यम से काव्य सौंदर्य में वृद्धि की जाती है, तब उसे शब्दालंकार कहते हैं।
जैसे – कनक-कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय।
यहाँ कनक के स्थान पर उसका पर्यायवाची ‘गेहूँ’ या ‘धतूरा’ रख देने पर काव्य सौंदर्य समाप्त हो जाता है।
शब्दालंकार के भेद:
शब्दालंकार के तीन भेद हैं –
अनुप्रास अलंकार
यमक अलंकार
श्लेष अलंकार
पाठ्यक्रम में शब्दालंकार का केवल एक भेद शामिल है । इसलिए यहाँ केवल एक भेद का ही अध्ययन किया जाएगा।
3
श्लेष अलंकार -
श्लेष का अर्थ है- चिपका हुआ। अर्थात् एक शब्द के अनेक अर्थ
चिपके होते हैं। जब काव्य में कोई शब्द एक बार आए और अलग-अलग सन्दर्भों में
उसके एक से अधिक अर्थ प्रकट हो, तो उसे श्लेष अलंकार कहते हैं; जैसे –
रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष चून।।
यहाँ दूसरी पंक्ति में पानी शब्द एक बार आया है परंतु उसके अर्थ अलग-अलग
प्रसंग में अलग-अलग हैं I अतः यहाँ श्लेष अलंकार है I
4
Multiple Select
चरन धरत चिंता करत चितवत चारों ओर।
सुबरन को खोजत, फिरत कवि, व्यभिचारी, चोर।
यहाँ सुबरन शब्द के एक से अधिक अर्थ है - (कोई दो सही विकल्प चुनो |)
व्यभिचारी के संदर्भ में सुंदर रूप रंगरन
चोर के संदर्भ में इसका अर्थ सोना है।
भगवान का भजन
मानव की प्रसंशा
5
Multiple Select
मंगन को देख पट देत बार-बार ।
यहाँ पर ‘पट’ शब्द के दो अर्थ हैं | (कोई 2 विकल्प चुनो )
वस्त्र
मिठाई
दरवाज़ा
उपहार
6
Multiple Select
मेरी भव बाधा हरो राधा नागरि सोय।
जा तन की झाँई परे श्याम हरित दुति होय।।
यहाँ "हरित" शब्द के अर्थ हैं- (2 विकल्प चुनो )
प्रसन्न होना
हरी घास
हरे पेड़
हरे रंग का होना
7
(ii) अर्थालंकार
काव्य में अर्थ के द्वारा चमत्कार उत्पन्न करने वाले अलंकार अर्थालंकार कहलाते हैं । इस अलंकार में अर्थ के माध्यम से काव्य के सौंदर्य में वृद्धि की जाती है ।
अर्थालंकार के 5 भेद होते हैं |
1) उपमा अलंकार 2) रूपक अलंकार 3) उत्प्रेक्षा अलंकार 4) अतिशयोक्ति अलंकार
5) मानवीकरण अलंकार
पाठ्यक्रम में अर्थालंकार के तीन भेद शामिल हैं। यहाँ उन्हीं भेदों का अध्ययन किया जाएगा।
1.) उत्प्रेक्षा अलंकार - जब उपमेय में उपमान के गुण-धर्म की समानता की संभावना व्यक्त की जाए, तो उसे उत्प्रेक्षा अलंकार कहते हैं; जैसे –
कहती हुई यूँ उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।
हिम कणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।।
यहाँ उत्तरा के जल (आँसू) भरे नयनों (उपमेय) में हिमकणों से परिपूर्ण कमल (उपमान) की संभावना प्रकट की गई है। अतः उत्प्रेक्षा अलंकार है।
उत्प्रेक्षा अलंकार की पहचान - मनहुँ, मानो, जानो, जनहुँ, ज्यों, जनु आदि वाचक शब्दों का प्रयोग होता है।
8
2.) अतिशयोक्ति अलंकार – जहाँ किसी व्यक्ति, वस्तु आदि के गुण, रूप सौंदर्य आदि का वर्णन इतना बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए कि जिस पर विश्वास करना कठिन हो, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है; जैसे –
एक दिन राम पतंग उड़ाई। देवलोक में पहुँची जाई।।
यहाँ राम द्वारा पतंग उड़ाने का वर्णन तो ठीक है पर पतंग का उड़ते-उड़ते स्वर्ग में पहुँच जाने का वर्णन बहुत बढ़ाकर किया गया है । इस पर विश्वास करना कठिन हो रहा है। अत: यहाँ अतिशयोक्ति अलंकार है ।
अन्य उदाहरण –
i) देख लो साकेत नगरी है यही
स्वर्ग से मिलने गगन में जा रही।
यहाँ साकेत नगरी की तुलना स्वर्ग की समृद्धि से करने का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन है।
9
3. मानवीकरण अलंकार – जब जड़ पदार्थों और प्रकृति के अंग (नदी, पर्वत, पेड़, लताएँ, झरने, हवा, पत्थर, पक्षी) आदि पर मानवीय क्रियाओं का आरोप लगाया जाता है अर्थात् मनुष्य जैसा कार्य व्यवहार करता हुआ दिखाया जाता है तब वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है; जैसे –
हरषाया ताल लाया पानी परात भरके।
यहाँ मेहमान के आने पर तालाब द्वारा खुश होकर पानी लाने का कार्य करते हुए दिखाया गया है। अतः यहाँ मानवीकरण अलंकार है।
अन्य उदाहरण –
i) हैं मसे भीगती गेहूँ की तरुणाई फूटी आती है।
यहाँ गेहूँ तरुणाई फूटने में मानवीय क्रियाओं का आरोप है।
10
Match
निम्नलिखित उदाहरणों को सही अलंकार से मिलाओ
i) धाए धाम काम सब त्यागी। मनहुँ रंक निधि लूटन लागी।
i) पानी परात को हाथ छूयो नहीं नैनन के जल से पग धोये ।
i) है वसुंधरा बिखेर देती मोती सबके सोने पर।
रवि बटोर लेता है उसको सदा सवेरा होने पर।
i) देख लो साकेत नगरी है यही
स्वर्ग से मिलने गगन में जा रही।
मेरी भव बाधा हरो राधा नागरि सोय।
जा तन की झाँई परे श्याम हरित दुति होय।।
उत्प्रेक्षा
अतिशोक्ति
मानवीकरण
अतिशोक्ति
श्लेष
उत्प्रेक्षा
अतिशोक्ति
मानवीकरण
अतिशोक्ति
श्लेष
अलंकार
अलंकार शब्द का अर्थ है - आभूषण या गहना। जिस प्रकार आभूषण धारण करने से
स्त्री के सौंदर्य में वृद्धि हो जाती है उसी प्रकार काव्य में अलंकारों के प्रयोग से
उसकी सुंदरता में चमत्कार उत्पन्न हो जाता है ।
परिभाषा:
जिन गुण धर्मों द्वारा काव्य की शोभा बढ़ाई जाती है, उन्हें अलंकार कहते हैं।
अथवा
काव्य के सौंदर्यवर्धक गुण अलंकार कहलाते हैं। अलंकारों के योग से काव्य मनोहारी बन जाता है।
अलंकार के भेद –
काव्य में कभी अलग-अलग शब्दों के प्रयोग से सौंदर्य में वृद्धि की जाती है तो कभी अर्थ में चमत्कार पैदा करके । इस आधार पर अलंकार के दो भेद होते हैं –
(i) शब्दालंकार
(ii) अर्थालंकार
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