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कविता का अर्थ

कविता का अर्थ

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10th Grade

Hard

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Rubeena Peerjade

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6 Slides • 0 Questions

1

Do Now - शब्दार्थ की जोड़ियाँ मिलाइए |

​वृक्ष

​तृण

​बालक

​दामिनी

घास

बिटप

सूर्य

​खल

​मटमैला

​बटु

​समंदर

​ढाबर

​मेंढक

​बुध

​विद्वान

​दादुर

​दुष्ट व्यक्ति

​पतंग

​बिजली

​जलनिधि

2

कविता संबंधित बातें

4

​कविता के पंक्तियों का अर्थ

By Rubeena Peerjade

5

घन घमंड नभ गरजत घोरा| प्रिया हीन डरपत मन मोरा
दामिनी दमक रहहिं घन माहीं | खल कै प्रीती जथा थिर नाहीं

बरषहिं जलद भूमि निअराएँ। जथा नवहिं बुध बिद्या पाएँ

कविता का नाम-कवि का नाम-प्रस्तावना

'बरषही जलद' इस कविता के गोस्वामी तुलसीदास जी ने वर्षा ऋतू में होनेवाले परिवर्तनों का सुंदर वर्णन किया है| उन्होंने वर्षा के साथ ही साथ समाज की स्थिति, विविध गुणों-दुर्गुणों को भी दर्शाया है|
आकाश में बादल घमंड से भरकर भयंकर गर्जना कर रहे हैं। सीता जी के बिना मेरा मन डर रहा है। बिजली बादलों में ऐसे चमक रही है जैसे दुष्ट व्यक्ति की प्रीति (मित्रता) स्थिर नहीं रहती। बादल पृथ्वी के नजदीक आकर ऐसे बरस रहे हैं, जैसे विद्वान व्यक्ति विद्या पाकर विनम्र हो (झुक) जाते हैं।

Do Now - शब्दार्थ की जोड़ियाँ मिलाइए |

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​बालक

​दामिनी

घास

बिटप

सूर्य

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​मटमैला

​बटु

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