
Bhagavad Gita As It Is DAY-21 (4.40-42, 5.1-7)
Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa
Life Skills, Philosophy, Special Education
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1.
MULTIPLE SELECT QUESTION
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कौन कौन लोग सदैव संशयग्रस्त रहते हैं, तनिक भी आध्यात्मिक उन्नति नहीं कर पाते और नीचे गिरते हैं व न तो इस लोक में, न ही परलोक में कोई सुख प्राप्त कर पाते हैं? (4.40)
जो लोग पशुतुल्य हैं उनमें न तो प्रामाणिक शास्त्रों के प्रति कोई श्रद्धा है और न उनका ज्ञान होता है
कुछ लोगों को शास्त्रों का ज्ञान होता है और उनमें से उद्धरण देते रहते हैं, किन्तु उनमें वास्तविक विश्वास नहीं करते
कुछ लोगों को भगवद्गीता जैसे शास्त्रों में श्रद्धा होती है फिर भी न तो भगवान् कृष्ण में विश्वास करते हैं, न उनकी पूजा करते हैं
2.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
मनुष्य को संशयग्रस्त बनने से बचने और आध्यात्मिक उत्थान में सफलता प्राप्त करने के लिए क्या करना चाहिए? (4.40)
श्रद्धाभाव से शास्त्रों के सिद्धान्तों का पालन करे और ज्ञान प्राप्त करे
दिव्य ज्ञान द्वारा आध्यात्मिक अनुभूति के दिव्य पद तक पहुँचे
परम्परा से चले आ रहे महान आचार्यों के पदचिन्हों का अनुसरण करे
3.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
5 mins • 1 pt
कौन कर्मों के बन्धन से नहीं बँधता? (4.41)
जो व्यक्ति अपने कर्मफलों का भोग करने के लिए कर्म करता है
जो दिव्यज्ञान में अश्रद्धा के कारण संशयग्रस्त रहता है
पूर्णतः कृष्णभावनाभावित होने के कारण जिसे श्रीभगवान् के अंश रूप में अपने स्वरूप का ज्ञान है
4.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
5 mins • 1 pt
भगवान् अर्जुन के हृदय में उठे संशयों को किससे काटने को कहते हैं? (4.42)
असङ्गशस्त्रेण - विरक्ति के शस्त्र से
अनुध्यासिना - अपने स्मरण की तलवार से
ज्ञानासिना - ज्ञानरूपी शस्त्र से
5.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
सनातन योग में कौन से यज्ञकर्म किये जाते हैं? (4.42)
द्रव्य-यज्ञ जिसमें भौतिक द्रव्यों का त्याग किया जाता है
आत्म-बोध वाला ज्ञान यज्ञ जो विशुद्ध आध्यात्मिक कर्म है
तलाक यज्ञ - सम्बन्ध विच्छेद के लिए
पुत्रेष्टि यज्ञ - पुत्र प्राप्ति के लिए
6.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
जो भगवान् द्वारा उपदेश देने पर भी भगवान् के सच्चिदानन्द स्वरूप को नहीं समझ पाता और गीता के उपदेशों को नहीं समझता, उसके विषय में क्या समझना चाहिए? (4.42)
वह श्रद्धाविहीन है
वह निपट मूर्ख है
वह नीचे गिर जाता है
उसके कार्यकलाप दिव्य हैं
वह भगवद्गीता का अध्ययन शुरू करते ही मुक्त होता है
7.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
चतुर्थ अध्याय में भगवान् ने अर्जुन को क्या बताया है? (5.1)
आत्मा तथा उसके शरीर बन्धन का सामान्य ज्ञान
बुद्धियोग द्वारा इस भौतिक बन्धन से निकलना
ज्ञानी को कोई कार्य नहीं करने पड़ते
सारे यज्ञों का पर्यवसान ज्ञान में होता है
वह पूर्णज्ञान से युक्त होकर, उठ करके युद्ध करे
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