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Bhagavad Gita As It Is DAY-37 (9.24-33)

Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa

Life Skills, Philosophy, Special Education

KG - Professional Development

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Bhagavad Gita As It Is DAY-37 (9.24-33)
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1.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

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भगवान् कृष्ण ऐसा क्यों कहते हैं कि मैं समस्त यज्ञों का भोक्ता हूँ? (9.24)

क्योंकि वे ही परम प्रभु व स्वामी हैं (प्रभुरेव च)

क्योंकि वे सारे यज्ञों के फल स्वयं भोगना चाहते हैं

क्योंकि वे सबको अपना सेवक बना कर रखना चाहते हैं

2.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

जो कृष्ण के वास्तविक दिव्य स्वभाव को नहीं पहचान पाते कि वे ही एकमात्र भोक्ता तथा स्वामी हैं, इस अल्पग्यता के कारण उनका क्या होता है? (9.24)

वे क्षणिक लाभ के लिए देवताओं को पूजते हैं

वे इस संसार में आ गिरते हैं

उन्हें जीवन का लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पाता

स्वयं भोक्ता व स्वामी बनकर आनंद में रहते हैं

3.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

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मानवीय सभ्यता का समग्ररूप वर्णाश्रम धर्म और वेदों में वर्णित यज्ञ-अनुष्ठानों का क्या उद्देश्य है? (9.24)

सुख-संपत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का

भगवान् विष्णु की प्रसन्नता

4.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

यदि किसी को अपनी भौतिक इच्छा पूर्ति करनी हो तो कैसे वांछित फल प्राप्त हो सकेगा? (9.24)

विशिष्ट देवताओं की पूजा करे

तंत्र-मंत्र विद्या का सहारा ले

परम भगवान् श्रीकृष्ण से प्रार्थना करे

केवल स्वयं के पुरुषार्थ पर भरोसा करे

5.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

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इनमें से क्या सही नहीं है? (9.25)

जो देवताओं को पूजते हैं, वे भगवान् के धाम में जन्म लेंगे

जो पितरों को पूजते हैं, वे भगवान् के पास जाते हैं

जो भूत-प्रेतों के उपासक हैं, वे उन्हीं के बीच जन्म लेते हैं

जो भगवान् को पूजते हैं वे देवताओं के साथ निवास करते हैं

6.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

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कृष्णभावनामृत आन्दोलन किस दिव्य सूचना को समूचे मानव समाज में वितरित करता है? (9.25)

केवल हरे कृष्ण मन्त्र के जाप से ही मनुष्य सिद्ध हो सकता है

हरे कृष्ण मन्त्र से ही मनुष्य भगवद्धाम वापस जा सकता है

वेदों के कर्मकाण्ड (दर्शपौर्णमासी) में वर्णित देवपूजा विधान

नितांत भौतिक, पिशाच पूजा के काले जादू का अभ्यास

निर्विशेष ब्रह्मज्योति तक जाने व नीचे गिरने की विधि

7.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

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प्रेम तथा भक्ति के साथ प्रदान करने पर भगवान् ने क्या-क्या स्वीकार करना स्वीकार किया है? (9.26)

मांस, मछली या अण्डे

पत्र, पुष्प, जल तथा फल

शाक, अन्न, फल, दूध तथा जल

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