
60. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_13.28-14.07
Authored by Abhay Ram Das
Religious Studies
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39 questions
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1.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
2 mins • 1 pt
श्लोक संख्या 13.29 के अनुसार कौन साधक परम गति की ओर निरन्तर अग्रसर होता होता है ?
जो प्रत्येक वस्तु में परमात्मा को स्थित देखे
जो प्रत्येक जीव में परमात्मा को देखे
जो अपने मन को नीचे ना गिरने दे
उपरोक्त सभी
2.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
2 mins • 1 pt
जो साधक सदैव और सर्वत्र परमात्मा के दर्शन करता है वह कैसे अपने मन को सदैव स्थिर रखता है और नीचे नहीं गिरने देता ?
क्योंकि ऐसा साधक सदैव परमात्मा का दर्शन करता है और इस कारण कभी स्वयं को इंद्रिय तृप्ति में नहीं लगाता |
क्योंकि कृष्ण (परमात्मा) के समक्ष माया कभी प्रकट नहीं होती है |
क्योंकि भक्ति में साधक को दिव्य आनंद का अनुभव होता है और संसार का आनंद उन्हें आकर्षित नहीं करता |
उपरोक्त सभी |
3.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
2 mins • 1 pt
एक तरह से शरीर एक यंत्र है, जिसे परमेश्वर ने__________ की पूर्ति के लिए निर्मित किया है ?
समस्याओं के निदान
इच्छाओं
कर्तव्यों
इंद्रियों
4.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
2 mins • 1 pt
जीव शारीरिक कार्यों से पृथक होकर दिव्य दृष्टि कब प्राप्त कर लेता है ?
जब साधक देखता है की आत्मा शरीर से भिन्न है और सारे कार्य शरीर द्वारा किए जाते हैं
जब साधक का मन स्थिर हो जाता है
जब साधक ध्यान के माध्यम से स्वयं को पहचान लेता है
उपरोक्त सभी
5.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
2 mins • 1 pt
भौतिक संसार में भेदभाव किस कारण से व्याप्त है ?
असमानता
माया
देहात्मबुद्धि
आसक्ति
6.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
2 mins • 1 pt
श्लोक संख्या 13.32 के अनुसार आत्मा दिव्य, शाश्वत और गुणो से अतीत है ।किंतु भगवान कृष्ण तो अनेक गुणो से युक्त हैं ।क्या यह विसंगति नहीं है ?
नहीं, क्योंकि सगुण भगवान गुणो से युक्त है किंतु आत्मा तो मूल रूप में निर्गुण है जो गुणातीत है
नहीं,क्योंकि सगुण भगवान भी प्रकृति के तीन गुणो से परे है किंतु अनेक दिव्य गुणो से युक्त है और इसी अनुसार आत्मा भी मूल में तीन गुणो से परे है
नहीं, क्योंकि आत्मा भौतिक जगत में गुणो से युक्त है किंतु मुक्त होने पर समस्त गुणो से परे है जिस प्रकार परम पुरुष भी है
उपरोक्त में से कोई नहीं
7.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
2 mins • 1 pt
आत्मा के शरीर में होने पर ही शरीर चेतन है, किंतु फिर भी आत्मा शरीर से कैसे लिप्त नहीं होती ?
क्योंकि आत्मा अति सूक्ष्म है
क्योंकि आत्मा अमर है
क्योंकि आत्मा आनन्दमय है
उपरोक्त सभी
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