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WorksheetsEconomics 2
Total questions: 10
Worksheet time: 10mins
रोजगार की परंपरा वादी सिद्धांत के अनुसार पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की एक सामान्य अवस्था है
अल्प रोजगार
पूर्ण रोजगार
अति पूर्ण रोजगार
रोजगार के परंपरावादी सिद्धांत के अनुसार उत्पादन की मात्रा (a) के स्तर पर निर्भर करती है
श्रम बाजार ने संतुलन के निर्धारण के लिए श्रम की पूर्ति (a) के बराबर होनी चाहिए
श्रम की मांग फलन तथा वास्तविक मजदूरी में संबंध होता है
धनात्मक
ऋण आत्मक
कोई संबंध नहीं
मुद्रा के परिमाण सिद्धांत के अनुसार मुद्रा की पूर्ति परिवर्तन होने से (a) मैं प्रत्यक्ष अनुपात में परिवर्तन होता है
रोजगार के परंपरावादी सिद्धांत के अनुसार वस्तु बाजार एवं श्रम बाजार मैं (a) पाई जाती है
बचत तथा ब्याज की दर में संबंध पाया जाता है
धनात्मक
ऋण आत्मक
कोई संबंध नहीं
रोजगार की परंपरा वादी सिद्धांत के अनुसार रोजगार की अवस्था में बेरोजगारी आ पाई जा सकती हैं
ऐच्छिक बेरोजगारी
संघात्मक बेरोजगारी
मौसमी बेरोजगारी
अनैच्छिक बेरोजगारी
रोजगार के परंपरावादी सिद्धांत के अनुसार अल्पकाल में उत्पादन की तकनीक में कोई परिवर्तन नहीं आता
सही
गलत
कुछ कह नहीं सकते
मुद्रा के परिमाण सिद्धांत के अनुसार चलन वेग तथा उत्पादन की मात्रा को अल्पकाल में स्थिर माना गया है
सही
गलत
कुछ कह नहीं सकते
